पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

तकनीक की मदद:शिक्षक अब छात्र की फोटो खींचकर जियो टैगिंग करेंगे

डबरा4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर स्कूल की चौखट तक लाकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार तकनीक की मदद ले रही है। स्कूल छोड़ चुके बच्चे और उसके परिवार के अशिक्षित सदस्यों का भी सर्वे किया जाएगा। हर शिक्षक को मेंटर्स के रूप में सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षक को उचित मूल्य दुकान की लिस्ट के आधार पर बच्चों का नाम व पता हासिल करना होगा और उसके घर पहुंचकर बात करनी होगी। एप के जरिए सर्वे के दौरान छात्र का फोटो खींचकर जिओ-टैगिंग करनी होगी।

जानकारी के अनुसार हेड मास्टर हर शिक्षक को लक्षित बच्चों के सर्वे एवं अनुगामी प्रक्रिया के लिए मेंटर शिक्षक के रूप में कार्य बांटेगा। एक मेंटर शिक्षक को स्कूल से 10 से 15 बच्चे की जवाबदेही सौंपी जाएगी। मेंटर शिक्षक द्वारा संपर्क अभियान के लिए जो स्कूल से वंचित व लक्षित बच्चों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी। उसमें छात्र के घर का पता, अंतिम वार किस स्कूल में दर्ज था और बच्चों के परिवार की राशन की दुकान का पता दर्ज है। मेंटर्स शिक्षक, बच्चों के परिवार से संपर्क करेंगे।

एप में बच्चे व परिवार से हुई भेंट को दर्ज कर बच्चों के शत प्रतिशत प्रवेश व स्कूल से बाहर बच्चों का फॉलोअप प्लान की जानकारी भी दर्ज करनी होगी। एप में मेंटर्स शिक्षक को बच्चे की भेंट के दिन जियोटेग फोटो के आधार पर बच्चे से संपर्क की पुष्टि करनी होगी। जिस व्यक्ति से संपर्क किया है, उसका सही नाम, मोबाइल, फोटाे भी लेनी होगी। साथ ही संपर्क के दौरान उस गांव के सरपंच या वार्ड पार्षद का सहयोग लिया जाएगा तथा उनका नाम व मोबाइल नंबर भी लेना होगा।

सर्वे के दौरान एप में यह व्यवस्था भी रहेगी कि बच्चों के पालकों व परिवार के 15 साल से अधिक साल के अन्य सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर असाक्षर का चिह्नांकन भी किया जाएगा। नोडल शाला के प्रधान अध्यापक द्वारा 15 साल से अधिक आयु वर्ग के असाक्षर की सूची तैयार कर इन्हें साक्षर कराने के लिए गांव के शिक्षित महिला या पुरुष को अक्षर साथी के रूप में चिन्हित किया जाएगा।

खबरें और भी हैं...