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  • Those Who Do Not Have Land Of Ownership Were Approved By The PM's Residence, NAP Also Gave Two Installments, Then Got The Investigation Done, Then The Poll Was Open.

गड़बड़ी:जिनके पास स्वामित्व की भूमि नहीं उन्हें पीएम आवास कर दिए मंजूर, नप ने दो किस्त भी दीं, जांच कराई तब खुली पोल

डबरा16 दिन पहले
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तीसरी किस्त नहीं मिल पाने के कारण पूरा नहीं हो पा रहा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण। - Dainik Bhaskar
तीसरी किस्त नहीं मिल पाने के कारण पूरा नहीं हो पा रहा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण।
  • साल 2017 से अब तक 902 प्रधानमंत्री आवास किए स्वीकृत, 100 से ज्यादा हितग्राहियों ने सरकारी जमीन पर ही करा लिया निर्माण
  • तीन महीने पहले पकड़ी गड़बड़ी, लेकिन जांच के फेर में पात्र हितग्राहियों की आवास की किस्त अटकी

प्रधानमंत्री आवास योजना में 80 प्रतिशत ऐसे हितग्राहियों के आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनके पास स्वामित्व की भूमि तक नहीं है। इनमें से 100 से ज्यादा हितग्राही तो सरकारी भूमि पर झोंपड़ी बनाकर रह रहे थे। यही नहीं नगरपरिषद द्वारा इन हितग्राहियों के खाते में पहली व दूसरी किस्त की राशि भी ट्रांसफार कर दी।

बाद में शासन द्वारा तीसरी किस्त भू स्वामित्व की भूमि के दस्तावेज लेने के बाद ही ट्रांसफर किए जाने के आदेश के चलते गड़बड़ी की पोल खुल गई। नगरपरिषद सीएमओ द्वारा इसके लिए पांच कर्मचारियों को नोटिस भी दिए गए थे। लेकिन इसके बाद से ही कार्रवाई आगे नहीं बढ़ शकी। जिसका खामियाजा पात्र हितग्राहियों को भी भुगतना पड़ता है।

दरअसल वर्ष 2017 से 2019 तक प्रधानमंत्री आवास का लाभ चार चरणों में कुल 902 हितग्राहियों को प्रदान किया गया। इनमें से 234 हितग्राहियों के खातों में पहली व दूसरी किस्त भी डाली गई है, वहीं 300 हितग्राहियों के खाते में पहली किस्त डल चुकी है। लेकिन अब भू स्वामित्व की भूमि के दस्तावेज जमा कराने वालों को ही तीसरी किस्त प्रदान की जानी है।

लेकिन स्वीकृत की गई सूची में से 80 प्रतिशत हितग्राही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं की भूमि ही नहीं है, ऐसे में वह दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। 100 से ज्यादा हितग्राही तो ऐसे हैं जिनके पास किसी तरह की भूमि नहीं है और वह शासकीय भूमि पर रह रहे हैं। अब इन्होंने शासकीय भूमि पर पीएम आवास का कार्य कराया और अब यह लटक गया है।

अब नामांतरण कराने के लिए भटक रहे हितग्राही

नगर परिषद द्वारा नियमानुसार भूमि स्वामी वालों को ही किस्त डाली जा रही है। लेकिन जिस भूमि पर आवास स्वीकृत किए गए हैं वह पूर्वजों के नाम पर दर्ज हैं। लेकिन बुराइयों के पास रिकॉर्ड नहीं होने के कारण उनका नामांतरण नहीं हो पा रहा है और वह नामांतरण के लिए चक्कर लगा रहे हैं।

ऐसे किया जाता है सर्वे:पीएम आवास योजना का लाभ देेने के लिए हितग्राहियों से आवेदन लिए जाते हैं। इसके बाद इन आवेदनों का राजस्व विभाग और नगरपरिषद के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसके बाद सूची एसडीएम कार्यालय पहुंचती है और यहां से कलेक्टर कार्यालय में जाती है।

यहां से स्वीकृत होने के बाद योजना का लाभ हितग्राही को दिया जाता है। भौतिक सत्यापन के दौरान हितग्राहियों के सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है जिसमें खुद के स्वामित्व की भूमि के दस्तावेज भी शामिल रहते हैं। लेकिन भौतिक सत्यापन किए जाने के बाद भी ऐसे हितग्राहियों के आवास स्वीकृत कर दिए गए जिनके पास स्वामित्व की भूमि तक नहीं थी।

हितग्राहियाें के खाते में तीसरी किस्त डाल दी गई

जिन हितग्राहियों के नामांतरण हो चुके हैं उनके खाते में तीसरी किस्त डाल दी गई है। जहां तक आवास स्वीकृति में गड़बड़ी की बात है तो मैं इस बारे में पता करवाता हूं कि पूरा मामला क्या है उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
पीयूष श्रीवास्तव, सीएमओ नगर परिषद पिछोर

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

नगरपरिषद द्वारा स्वीकृत सूची के आधार पर हितग्राहियों के खातों में किस्त की रारि उनके बैंक अकाउंट में डालना शुरू कर दिया था, लेकिन शासन द्वारा आदेश दिए गए कि इनसे भूस्वामित्व के दस्तावेज जमा कराए जाने के बाद ही अगली किस्त डाली जाए। इसके बाद जब नगरपरिषद अधिकारियों द्वारा जांच की गई तो 80 प्रतिशत हितग्राही ऐसे हैं जिनके स्वयं के नाम पर भूमि ही नहीं है और व पैतृक मकान में रह रहे हैं।

वहीं 100 से ज्यादा हितग्राही ऐसे निकले जिनके पास किसी भी प्रकार की भूमि नहीं है और वह सरकारी भूमि पर निवास कर रहे हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर सीएमओ महेंद्र सिंह यादव द्वारा पांच कर्मचारियों हरिसिंह कुशवाह, राजकुमार यादव, मनोज शर्मा, सुरेंद्र परिहार, बलराम वाल्मीकि को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। वहीं राजस्व विभाग द्वारा जिम्मेदारों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

हितग्राहियाें के खाते में तीसरी किस्त डाल दी गई

जिन हितग्राहियों के नामांतरण हो चुके हैं उनके खाते में तीसरी किस्त डाल दी गई है। जहां तक आवास स्वीकृति में गड़बड़ी की बात है तो मैं इस बारे में पता करवाता हूं कि पूरा मामला क्या है उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
पीयूष श्रीवास्तव, सीएमओ नगर परिषद पिछोर

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