लुहारी में विधायक को करना पड़ा विरोध का सामना:पानी उतरने पर गांव लौटे तो सब उजड़ा मिला, न सिर पर छत न खाने को अनाज

भितरवार2 महीने पहले
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गांव उजड़ने के बाद अब सड़क किनारे तिरपाल की झोपड़ी बनाकर रह रहे ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
गांव उजड़ने के बाद अब सड़क किनारे तिरपाल की झोपड़ी बनाकर रह रहे ग्रामीण।
  • बसई गांव के लोग पानी उतरने के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे

जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर भितरवार तहसील के बसई गांव के 150 मकान बाढ़ के पानी से डूब गए थे। बाढ़ का पानी उतरने पर तीन बाद लोग अपने घर लौटे तो उनके पैरो तले जमीन सरक गई। पचास से ज्यादा मकान पूरी तरह से टूट चुके थे। शेष मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। गृहस्थी के नाम पर कुछ नहीं बचा।

बर्तन, कपड़े, कूलर-पंखा, अनाज मिट्‌टी में मिल चुका था। ऐसा मंजर देख महिलाओं-पुरुषों के आंसू निकल आए। कुछ लोग यह हाल देख परिवार सहित लखेश्वरी मंदिर, भितरवार मंडी और रिश्तेदारों के यहां फिर चले गए हैं। मदद के लिए यहां पर प्रशासन का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा। दिनभर लोग उजड़ी हुई गृहस्थी को संभालने में लगे रहे । हालांकि अभी भी नदी के नजदीक के दस घरों में पानी भरा हुआ है। 40 कच्चे पक्के मकानों के धराशायी होने से गृहस्थी उसमें दब गई है। घर की महिलाएं मलबे में से गृहस्थी खोजती रहीं। पुरुष बक्सों और टंकियों में भरे अनाज को बाहर निकाल रहे थे। पानी के कारण अनाज तो पूरा खराब होे चुका हैे। उसकी सड़ांध फैल रही है। गांव के गुलाबंसिंह रावत और जगदीश रावत ने कहा कि उनके पास कुछ नहीं बचा है।

सालभर के लिए जो अनाज बचाकर रखा था, वह भी बेकार हो गया है। गांव के जगराम बाथम ने कहते हैं कि पक्का मकान बड़ी मेहनत से बनाया था। वह पूरा धराशायी हो गया। टंकी में भरा अनाज सड़ गया है। हम तो जीते जी मर गए। सरकार से भी कोई मदद नहीं मिल रही। खाने तक के लिए कुछ नहीं मिल रहा।

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