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महोत्सव आयोजित:जब अधर्म और पाप बढ़ने लगते हैं तब तीर्थंकर भगवान इस धरा पर जन्म लेते हैं: विहसंत सागर

डबरा2 महीने पहले
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  • भगवान पार्श्वनाथ एवं चंद्रप्रभु का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आयोजित

तीर्थंकर भगवान के जन्म पर तीनों लोकों में आनंद छा जाता है। गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक अधिकतर स्वर्ग के देव ही मनातेे हैं। जब अधर्म के पथ चलने वाले बढ़ने लगते, धर्म के प्रति रूचि समाप्त होने लगती है, पाप बढ़ने लगते हैं तो उस समय तीर्थंकर इस धरा पर जन्म लेते हैं। जैसे-जैसे मनुष्यों को धर्म से ग्लानि होने लगती है। तब धर्म के उत्थान के लिए जगत के प्राणियों के कल्याण के लिए कहते तब-तब धर्म का जन्म होता है।

यह बात मेडिटेशन गुरु मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने शनिवार को भगवान पार्श्वनाथ एवं चंदप्रभु के जन्म एवं तप कल्याणक पर महामस्तकाभिषेक जिनेंद्र महाअर्चना पर मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मंच पर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज एवं ऐलक विनियोग सागर महाराज मौजूद थे। मुनिश्री ने कहा कि रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने भी लिखा है कि जब धर्म की हानि होती, पापाचार बढ़ता है तब-तब भगवान का जन्म होता है। जब धर्म का लोप होने लगता है अधर्म बढ़ता तब भगवान का जन्म होता है। कल्याण का अर्थ कल्याणकारी महा अर्चना है। सन्मार्ग, धर्म के मार्ग पर चलने से दुगर्ति से बचा जा सकता है।

महा मस्तकाभिषेक कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान पार्श्वनाथ व चंदप्रभु के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित मध्यप्रदेश शासन के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कर किया। मंत्री मिश्रा ने मुनि विहसंत सागर महाराज को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लिया। साथ ही मंदिर निर्माण के लिए 11000 हजार की राशि दान की। साथ ही पूर्व मंत्री इमरती देवी ने भी मंदिर निर्माण के लिए 51 हजार रुपए की राशि का दान किया। इस दौरान वीरेंद्र जैन, काली जैन, दीपक जैन, मनोज जैन, राजू जैन सहित जैन समाज के कई लोग मौजूद थे।

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