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  • After The Flood, The Administration Did Not Take Care Of Cleaning, Then Social Institutions Came Forward, Sankua's Ghats Were Cleared In A Month

गूदरिया मठ पर बनी सुरक्षा दीवार:बाढ़ के बाद प्रशासन ने सफाई कराने नहीं ली सुध तो आगे आईं सामाजिक संस्थाएं, एक माह में साफ हो गए सनकुंआ के घाट

सेंवढ़ा22 दिन पहले
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  • जनसहयोग से लाखों रुपए खर्च कर कराए निर्माण कार्य, घाट की सफाई के साथ निकाली पुरानी गऊमुख
  • आश्रम क्षेत्र में भी जनसहयोग से शुरू हुए निर्माण कार्य, अब लोगों ने सेंवढ़ा में नवीन पुल और पुरानी को उपयोगी बनाने की मांग रखी

सिंध नदी में पांच महीने पहले आई बाढ़ से प्रभावित सनकुंआ घाट और ऐतिहासिक स्थलों की शासन प्रशासन की उपेक्षा के बाद जनसहयोग से तस्वीर बदलने लगी है। जनसहयोग के लिए न सिर्फ आमजन आगे आए हैं बल्कि धनसंग्रह का काम भी शुरू हो चुका है। फिलहाल सनकुंआ पर स्थित प्राचीन गूदरिया सरकार मंदिर पर आरसीसी की 100 मीटर लंबी और चौड़ी दीवार का निर्माण हो चुका है। बाढ़ के साथ आई रेत और मिट्टी एवं इमारतों के अवशेषों से दब चुके घाट साफ हो चुके हैं। सैकड़ों फीट मलबा निकाला जा चुका है। प्राचीन गोमुख के अंदर जमा मलबे को हटाकर ऐतिहासिक महत्व के स्थल को स्वच्छ किया जा गया है।

दूसरी ओर आश्रम क्षेत्र में विभिन्न समाजों द्वारा क्षतिग्रस्त हुए भवनों को दुरुस्त करने का काम शुरू की दिया है। हालाकि सेंवढ़ा को भिंड और ग्वालियर से जोड़ने वाला पुल नहीं बनने के कारण लोगों में आक्रोश की स्थिति बनी हुई है। यहां बता दें कि 3-4 अगस्त को सिंध में बाढ़ के रूप में पहली बार एक बड़ी त्रासदी आई थी। चूंकि सनकुंआ सिंध नदी में मौजूद प्राचीन धार्मिक तीर्थ स्थल है। पुराणकालीन ऐतिहासिक महत्व के स्थल, सन्यासियों की गुफाएं, मंदिर यहां धरोहर के रूप में स्थित है। बाढ़ के कारण सबसे अधिक नुकसान सनकुंआ पर मौजूद इन्हीं स्थलों का हुआ।

काफी संख्या में प्राचीन मंदिर जमींदोज हो गए। खास बात यह रही कि सिंध के रौद्र रूप ने भी मंदिरों के अंदर बिराजे देवी देवताओं की मूर्तियां पूरी तरह सुरक्षित रहीं, लेकिन मंदिरों के बाहरी हिस्से को काफी नुकसान हुआ। एक साथ इतने अधिक मंदिरों और आश्रमों का नुकसान क्षेत्र की बड़ी क्षति थी।

घाट को साफ कराने और मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने की जिम्मेदारी धर्मस्व विभाग की थी, स्थानीय सामाजिक संगठन और राजनैतिक दलों द्वारा धर्मस्व विभाग से मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए योजना बनाने के लिए कई बार पत्र लिखकर राशि जारी करने की मांग की गई लेकिन लोगों की यह मांग उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार रही। नतीजतन लोगों ने महीनेभर पहले जनसहयोग से लाखों रुपए की राशि एकत्रित कर जनसहयोग देते हुए महीनेभर में ही सनकुंआ घाट को साफ कराकर इसकी तस्वीर बदल दी।

घाट से हटाए गए रेतीले टीले और मिट्‌टी

सनकुंआ घाट पर एसडीओपी उपेंद्र दीक्षित के नेतृत्व में दो माह पहले स्वच्छता अभियान प्रारम्भ किया गया। पहले जन सहयोग से श्रमदान के साथ कार्यक्रम किया गया इसके बाद लोडर, जेसीबी चलवाकर घाट पर बने रेतीले टीले हटवाए गए। हजारों घन मीटर रेत एवं मिट्टी हटाई गई इसके बाद अगला टास्क पुरानी गोमुख को साफ करने का था जो कि काफी जटिल काम था पर जन सहयोग से एसडीओपी दीक्षित के नेतृत्व में किया गया। फिलहाल साफ सफाई का कार्य पूर्ण हो चुका है स्वच्छता के साथ घाटों की धुलाई पुताई का कार्य कराया जा चुका है।

प्राचीन तीन कलश्याऊ एवं उसके पास स्थित मठ की पुताई की गई है7 खास बात यह रही कि मठ के अंदर सिंगल स्टोन मूर्तियां की दीवारों पर स्थापित पाई गई उनकी भी रंग रोशन किया गया। नाले का गंदा पानी जो घाट के पास ही बह रहा था उसको दूसरी जगह व्यवस्थित करवाया गया इस कार्य में काफी श्रम और पैसा भी खर्च हुआ।

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