पकड़ से बाहर हत्यारा / पहेली बनकर रह गया आंगनबाड़ी सहायिका की हत्या का मामला, हत्यारे का नहीं लगा सुराग

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

भांडेर. जब किसी व्यक्ति की हत्या के मामले में परिवार के लोग ही चुप्पी साधकर बैठ जाएं तो फिर पुलिस के लिए भी अपराधी को पकड़ना मुश्किल हो जाता है। पूर्व में हुईं कुछ हत्याएं इसका सीधा उदाहरण हैं। भांडेर के पीरवली मोहल्ला निवासी 55 वर्षीय आंगनबाड़ी सहायिका रामकुमारी साेनी की हत्या के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। रामकुमारी की हत्या के बाद उसके भाईयों के साथ-साथ उसके दामाद ने भी चुप्पी साध ली है। जबकि मोहल्ले में सहायिका की किसी से किसी तरह की दुश्मनी नहीं थी। इसलिए अब इस हत्याकांड का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है। 
भांडेर के बोहरान मोहल्ला में 23 अक्टूबर 2018 को याकूब पुत्र अनवर खान और उसकी पत्नी सलमा खान की घर में सोते वक्त किसी ने लाठी अथवा बल्लम से हमला कर हत्या कर दी थी। इस दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने मोहल्ले में हर किसी से पूछताछ की लेकिन पुलिस को एक भी ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे कि आरोपी तक पहुंचा जा सके। याकूब और उसकी पत्नी की हत्या एक राज बनकर रह गई। याकूब और अनवर की तरह ही पीरवली मोहल्ला में आंगनबाड़ी सहायिका की हत्या कर दी गई। रामकुमारी की लाश भी खटिया पर मिली और संभवत: किसी लाठी से ही सिर पर हमला किया गया।
एक साल पहले सेंवढ़ा में भी तिवारी परिवार के मां-बेटे की धारदार हत्या की गई थी। ग्राम विलौनी में भी महिला की खटिया पर लाश मिली थी और गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि पीएम रिपोर्ट में हुई थी। डेढ़ साल पहले ग्राम कुम्हैड़ी में कुएं के अंदर गर्भवती महिला की लाश मिली थी। 
करीब 10 हत्याकांड ऐसे हैं जो एक पहली बनकर रह गए। इसका मुख्य कारण यह है कि जिनके अपनों की हत्या हुई उन्होंने ही किसी पर संदेह जाहिर नहीं किया। कहते हैं कि हर अपराधी बारदात के बाद कुछ न कुछ सबूत छोड़ जाता है लेकिन इनमें पुलिस को एक भी सबूत भी नहीं मिला। हालांकि भांडेर थाना प्रभारी राेशनलाल भारती का आंगनबाड़ी सहायिका रामकुमारी सोनी की हत्या के मामले में कहना है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा।

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