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जालसाजी:पंजीयन से वंचित किसान, फर्जी लोगों ने खेत में खड़ी धान की फसल, करा लिया ज्वार व बाजरा का पंजीयन

सेंवढ़ा10 दिन पहले
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  • पंजीयन की आखिरी तारीख निकली, अब तहसीलदार के लाॅगइन का सहारा, रोज आ रहे दर्जनों मामले

खरीफ फसल के उपार्जन के लिए सैंकड़ों किसानों के सर्वे नंबरों पर अन्य लोगों ने पंजीयन करवा लिया। खास बात यह है कि फर्जी पंजीयन करने वाले इन किसानों ने खेत मेंं खड़ी धान की फसल के बजाय ज्वार और बाजरा की उन फसलों का पंजीयन कराया, जो बाजार में काफी कम और समर्थन मूल्य पर काफी उंचे दामों में बिकती है।

वहीं पिछले कई दिनों से धोखेबाजी का शिकार हुए किसान आवेदन लेकर तहसील और खाद्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं। पर अब तक न तो उनके पंजीयन हुए और न ही फर्जी पंजीयन करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई। उपार्जन के पंजीयन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर थी जो अब निकल चुकी है ऐसे में किसानों के पास तहसीलदार लाॅगइन का सहारा बचा हुआ है।

खरीफ उपार्जन के लिए शासन द्वारा एमपी ऑन लाइन अथवा स्वयं के मोबाइल के माध्यम से किसान को पंजीयन कराने की सुविधा दी गई थी। लगभग 47 हजार हेक्टेयर सिंचित भूमि का पंजीयन किसानों द्वारा किया गया है। हालांकि यह सिंचित रकवा पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। इसी कारण इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की सुगबुगाहट है।

नियमानुसार फसल गिरदावरी के दौरान जो फसल किसान के सर्वे नंबर में दर्ज रहती है, किसान उसी फसल का पंजीयन कर सकता है। पर जिस प्रकार न सिर्फ खेत में खड़ी फसल और पंजीयन में दर्ज फसल में अंतर है, इससे इस पूरे मामले में सर्वे दलों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे है।

गड़बड़ी का खामियाजा वह किसान भुगत रहा है जिन्होंने एक अक्टूबर के बाद पंजीयन के लिए समितियों से संपर्क किया। जब किसान अपनी पावती लेकर पंजीयन केंद्रों पर गए तो उन्हें पता चला कि उनकी फसल का पंजीयन हो चुका है। यहां बता दें कि क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों किसान हैं, जिनके अभी तक पंजीयन नहीं हुए हैं।

नहीं हो रही सुनवाई, किसान बोले- ऐसे लोगों के खिलाफ न्यायालय में जाएंगे
दरयापुर कृषक मनसुख कुशवाह ने बताया कि उनके परिवार के पास जो कृषि भूमि है उसमें उनके द्वारा धान लगाई गई। पंजीयन कराने के दौरान सामने आया कि बहादुरपुर निवासी हरचरन पटवा नाम के किसी व्यक्ति के नाम से उनकी जमीन का पंजीयन हो चुका है। उसमें ज्वार की फसल का उपार्जन दर्ज है। इसकी शिकायत तहसील कार्यालय में की, पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। कुशवाह का कहना है कि उन्हें अपनी फसल को उपार्जन केंद्र पर बेचने का अधिकार मिले और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो वरना वह न्यायालय की शरण लेंगे।

4 हेक्टेयर के पंजीयन पर नजर
जिन लोगों ने फर्जी तरीके से दूसरे किसानों के सर्वे नंबर अपने नाम से पंजीकृत किए हैं उनके द्वारा एक ही पंजीयन पर कई सर्वे नंबर दर्ज गए। इससे रकवा काफी बड़ गया। यह मामला सामने आते ही प्रशासन ने रिकार्ड खंगाला तो कई क्षेत्रों में सिंचित रकवे से अधिक का पंजीयन पाया गया। सूत्रों के अनुसार अब शासन स्तर से ऐसे किसान जिनके द्वारा 4 हेक्टेयर से अधिक का पंजीयन किया गया है उनके रिकार्ड की जांच की जा रही है।

आज से तहसीलदार के लाॅगइन से होगा समस्या का समाधान
^आज से पंजीयन के सत्यापन का कार्य संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार के लाॅगइन पर प्रारंभ हो गया है। ऐसे किसानों के रिकार्ड की जांच की जाएगी। लाॅगइन पर अगर गलत नाम से पंजीयन है तो उसका भी सुधार हो सकता है। हालांकि फसल गिरदावरी के आधार पर फसल लिखी है उसमें सुधार संभव नहीं है।
राजेश जाटव, निरीक्षक, खाद्य आपूर्ति विभाग दतिया

किसानों के साथ बड़ा धोखा...
इस पूरे मामले में कांग्रेस के कार्यकारी ब्लाक अध्यक्ष राजू लठैत द्वारा एसडीएम अनुराग निगवाल को पत्र सौंपा गया। उन्होंने बताया कि सेंवढ़ा क्षेत्र में कुछ लोग किसानों के हित के लिए चलाई जा रही योजना का लाभ हड़पना चाहते है। अतरेटा के 17 किसानों की फसल का पंजीयन अजय कमरिया नाम के व्यक्ति ने करवा लिया है।

पंजीयन धान की जगह बाजरा का करवाया गया है। रिकार्ड निकलवाने पर परिवार की जानकारी ऊंचिया ग्राम की लिखी है जो कि सही नहीं हैै। लठैत ने ऐसे मामलों में मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबरों के आधार पर जांच करवाने तथा दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की है।

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