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परेशानी:जिले में दो माह से पीसीवी टीके नहीं, जुलाई महीने में सेंवढ़ा के किसी भी बच्चे को नहीं मिली वैक्सीन

सेंवढ़ा12 दिन पहले
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  • कोरोना काल में सामान्य वैक्सीन की कमी, दूसरी ओर कोरोना की कोवैक्सीन वितरण में अनियमितता

कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के पास सभी पात्र व्यक्तियों को कोरोना की वैक्सीन लगवाने की जिम्मेदारी है। इसके साथ साथ जन्म के बाद बच्चों को लगाई जाने वाली नियमित वैक्सीन भी विभाग द्वारा लगाई जा रही हैं। पर एक साथ चल रहे दोनों अभियान पर असर दिखने लगा है। जिले में पिछले माह से ही बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए दी जाने वाली पीसीवी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। धीरे धीरे वैक्सीन सेंटरों का स्टाक भी समाप्त हो गया और इसका नतीजा यह हुआ कि जुलाई माह में सेंवढ़ा के बच्चों को पीसीवी के टीके ही नहीं लगे।

दूसरी ओर 28 दिन में दूसरे डोज वाली भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के वितरण में भी बड़ी अनियमितता उजागर हुई है। इसके अनुसार कोबैक्सीन की मांग बढ़ने के बाद ब्लाॅक मेडिकल ऑॅफिसर सेंवढ़ा द्वारा जिले से प्राप्त को वैक्सीन के 1500 डोज में से महज दस फीसदी सेंवढ़ा को दिए शेष इंदरगढ़ और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगवा दिए। नतीजा यह हुआ कि को वैक्सीन का एक डोज लगवा चुके सैकड़ों लोगों को दूसरा डोज नहीं लग पा रहा।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों को जीवन रक्षक टीके लगाए जाते है। यह टीके 15 दिन से एक माह के अंतर पर नियमित 2 वर्ष से अधिक समय तक लगते है। टीकों की विशेषता यह है कि यह बच्चों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से रोकथाम करने में मददगार होते है। कौन सा टीका कब लगना है इसका भी चार्ट जारी होता है। और इसी लिए विभाग तय समय में लोगों से टीका अवश्य लगवाने की हिदायत देता है।

ऐसा ही एक टीका है पीसीवी-1 यह टीका बच्चों को जन्म लेने के 45 दिन बाद लगता है। चूंकि अगले 75 दिन में तीसरा टीका लगाया जाता है और ऐसे में अन्य टीकों के साथ इसे समय सीमा में लगाया जाता हैं। पर जिले में यह टीका मई माह माह में समाप्त हो गया था। इस सच्चाई को स्वयं जिले के स्टोर कीपर स्वीकार करते है। स्टोर कीपर राजेश कुमार के अनुसार पीसीवी की एक्सपायरी पहले केवल तीन माह थी ओर इसी लिए अधिक स्टाक नहीं रहता था। लगभग एक दो माह पहले इसका स्टाक समाप्त हो गया, डिमांड भेजी और एक दो दिन पहले ही वैक्सीन आई है। जबकि सेंवढ़ा में अभी तक वैक्सीन की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में जिन बच्चों का जन्म दो माह पहले हुआ था वह वैक्सीन लगवाने के लिए पिछले कई दिनों से भटक रहे हैं।

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