तबाही का मंजर:पुल टूटने से रास्ताबंद, इलाज के लिए मरीजों को अब ग्वालियर ले जाना भी हुआ मुश्किल

सेंवढ़ा2 महीने पहले
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  • सेंवढ़ा में चौथे दिन भी दलदल रही गलियां, घरों से गंदगी हटाना भी चुनौती

सेंवढ़ा नगर के अलावा लहार दबोह आदि कस्बों और एक सैंकड़ा से अधिक गांव लिए आवागमन का साधन सेंवढ़ा सिंध नदी पर बना पुल टूट जाने से यात्री वाहनों का ग्वालियर से संपर्क कट गया है। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य कारणों से अगर किसी व्यक्ति को इमरजेंसी में ग्वालियर जाना है, तो उसे क्षमता न होने के बावजूद प्राइवेट गाड़ी करनी पड़ रही है। जो कि गोराघाट के लंबे रास्ते के कारण 2500 रुपए तक किराया लेती है। यानि 150 की जगह अब ग्वालियर जाने के लिए लोगों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है।

इससे अधिक समस्या पुल के दूसरी तरफ के उन 18 गांव के लोगों को है जो कि अपने ही तहसील मुख्यालय पर नहीं आ पा रहे हैं। बाढ़ के बाद चौथे दिन लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही है। गलियों में पसरा दलदल लोगों को निकलने नहीं दे रहा। वहां के रहवासी अपने घरों में बने कीचड़ से परेशान हैं। क्योंकि उसके साफ करने के लिए पानी चाहिए जो अभी नहीं आ रहा। प्रशासन ने जब गलियों की सफाई नहीं करवाई, तो घरों के कीचड़ को निकालने के लिए कहां से व्यवस्था होती। बाढ़ के इफेक्ट को जानने के लिए जब ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र का दौरा किया गया तो कई प्रकार की समस्याएं सामने आई। इनमें वह लोग जो प्रभावित हैं उनके अलावा एक बड़ा वर्ग जो कि प्रभावित इलाके से बाहर नगर के ऊंचाई वाले हिस्से पर रहता है उसकी भी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। मसलन दूध सब्जी सहित कई वस्तुएं जो कि नदी के पास स्थित पड़ौस के गांव से आती थी, अब उनका आना बंद हो गया है। जिससे लोगों को यह सामग्री महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही है।

ग्वालियर से यातायात बंद होने का परिणाम भी पूरा क्षेत्र भुगत रहा है। सवारी वाहन जो गरीब का सहारा होते हैं, वह पूरी तरह बंद है। दो दर्जन से अधिक बसें जो प्रतिदिन ग्वालियर सेंवढ़ा के बीच चलती थी अब वह केवल मौ तक ही आ रही हैं और वहीं से लौट रहीं हैं। माल वाहक वाहनों का आना भी कम हो गया है और इसका असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।

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