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गड़बड़ी की जुगत:कागजों में दर्ज थे 115 गौवंश, जबकि गोशाला में मिले महज 55, अनुदान के लिए कर रहे फर्जीवाड़ा

दतिया अंचल13 दिन पहले
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  • गोशालाओं में सुविधाएं नहीं, कहीं पानी, तो कहीं लाइट के प्रबंध नहीं

गोशाालाओं में गौवंश की देखरेख के नाम पर फर्जीबाड़ा किया जा रहा है। शासन से मिलने वाले अनुदान के लिए कागजों के ऊपर गोशालाओं में अधिक गौवंश दिखाए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में इनकी संख्या बेहद कम है। भास्कर संवाददाता ने जिले में संचालित गोशालाओं का जायजा लिया, तो दर्ज गोवंश से कम गोवंश मिले। हालांकि वहां मौजूद कर्मचारियों का कहना था कि गाय गांव में गई हैं, रात तक वापस आ जाएंगी। वहीं गोशालाओं में गौवंश की देखभाल समुचित व्यवस्थाएं भी नहीं की गई, कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं लाइट नहीं है।

बता दें कि कांग्रेस सरकार ने प्रत्येक पंचायत में गोशाला शुरू करने की घोषणा की थी। तब गोशालाओं का निर्माण शुरू हो गया। पिछले कुछ महीनों में गोशालाओं का संचालन भी शुरू कर दिया है। सेंवढ़ा में आठ जबकि भांडेर में आठ गोशालाएं संचालित हो रही हैं। जिनमें बड़ी संख्या में गौवंश रखने की बात कही जा रही है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। भास्कर संवाददाताओं ने प्रत्येक ब्लॉक की गोशालाओं की स्थिति देखी। तो वहां कागजों में दर्ज गौवंश की संख्या से कम गाय मिली। ऐसा इसलिए क्योंकि गोवंश के नाम पर मिलने वाले अनुदान में फर्जीबाड़ा किया जा सके।

भांडेर: भास्कर संवाददाता ने शनिवार की शाम पौने पांच बजे बेरछ का जायजा लिया। यहां 55 गाय मौजूद थीं। चौकीदार गुलाब सिंह यादव ने चर्चा की, तो उन्होंने बताया कि गोशाला में 115 गाय हैं। लेकिन गाय को चराने के लिए भेज देते हैं। 65 अभी भी बाहर है। गोशाला में पेयजल व लाइट की व्यवस्था नहीं है। चौकीदार सभी गाय को तीन टाइम पानी पीने के लिए नदी पर ले जाता है। ऐसा ही हालत अन्य गोशालाओं का है।

बीकर: भास्कर संवाददाता ने रविवार की दोपहर बीकर गोशाला का जायजा लिया। जिस वक्त संवाददाता गौशाला में पहुंचा, वहां ताला लगा हुआ था। काफी देर इंतजार करने के बाद भी मौके पर कोई नहीं मिला। अंदर मुश्किल से 45-50 गाय नजर आ रही थी। जबकि कागजों मंे इनकी संख्या काफी अधिक है। इसके अलावा गायों के लिए न तो चारे का इंतजाम नजर आया और न ही पानी का।

सेंवढ़ा: यह ग्राम पंचायत अतरेटा में सेामवार को 4 बजे संवाददाता ने गोशाला का जायजा लिया। गौशाला के अंदर करीब 50-60 गाय थी, जबकि गोशाला में 100 गाय दर्ज हैं। गोशाला का संचालन 26 जनवरी से किया जा रहा है। मोके पर कप्तान सिंह बघेल द्वारा गोबर उठाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि कुछ गाय चरने के लिए बाहर जाती हैं जो शाम को वापस आने लगती हैं। समिति सचिव कालका प्रसाद बघेल ने बताया कि 11 हजार 228 उनके खाते में आए हैं।

20 रुपए प्रति गाय मिलता है अनुदान

गोशाला के अंदर प्रति गाय के हिसाब से अनुदान दिया जाता है। नियमानुसार प्रति दिन के हिसाब से एक गाय के 20 रुपए उनकी खुराक लिए दिए जाने का प्रावधान हैं। यही वजह है कि कागजों में अधिक संख्या बताकर अनुदान के नाम पर फर्जीबाड़ा किया जा रहा है। हालांकि सरसई व अन्य कुछ गोशालाओं का संचालन कुछ समय पहले ही शुरू हुआ है। ऐसे में उन्हें अब तक अनुदान नहीं मिल सका।

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