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कुप्रबंधन:जिला अस्पताल की 175 नर्स हड़ताल पर गईं, मरीजों को ड्रिप लगाने के लिए भी स्टाफ नहीं

दतिया20 दिन पहले
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अस्पताल के गेट पर खड़ी रही एंबुलेंस, इस तरह मरीज हुए परेशान। - Dainik Bhaskar
अस्पताल के गेट पर खड़ी रही एंबुलेंस, इस तरह मरीज हुए परेशान।
  • नर्स हड़ताल की सूचना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने नहीं की स्टाफ की वैकल्पिक व्यवस्था
  • भर्ती मरीज बोले- सुबह से नर्सों को ढूंढ रहे हैं, हमें दवा देने वाला भी कोई नहीं है

जिला अस्पताल में दोनों शिफ्टों में पदस्थ 175 नर्सिंग स्टाफ 12 सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला गया। सुबह नर्सें अस्पताल तो पहुंचीं लेकिन काम नहीं किया। खाती बाबा मंदिर के पास नर्सें एकत्रित हुईं और यहां नारेबाजी करती रहीं। सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं में ही नर्सों ने काली पट्‌टी बांधकर काम किया।

अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीज ड्रिप, इंजेक्शन लगवाने के लिए बार-बार नर्सिंग स्टाफ के कक्षों में झांकते रहे लेकिन नर्सें नहीं मिलीं। अस्पताल प्रबंधन ने भी हड़ताल की सूचना होने के बाद भी स्टाफ की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।

मप्र नर्स एसोसिएशन संघ के प्रदेशस्तरीय आह्वान पर 12 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को नर्सों ने कलेक्टर से लेकर सिविल सर्जन तक को ज्ञापन देकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी। ज्ञापन में अन्य राज्यों की तरह उच्चस्तरीय वेतनमान देने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कोरोना काल में शहीद हुए नर्सिंग स्टाफ के परिजन को अनुकंपा नियुक्ति देने के साथ 15 अगस्त को राष्ट्रीय कोरोना योद्धा अवार्ड से सम्मानित करने, कोरोना काल में शासन स्तर पर जितनी भी घोषणा की गईं उन पर अमल करने, अग्रिम दो वेतनवृद्धि का लाभ देने आदि मांगें की गई थीं।

बुधवार को फीमेल नर्सें अस्पताल में ड्यूटी समय पर लांच बॉक्स लेकर पहुंचीं लेकिन काम नहीं किया। सुबह के समय महिला नर्सें खाती बाबा मंदिर के पास एकत्रित हुईं और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल में नीलम द्विवेदी, जिला उपाध्यक्ष दीक्षा खोबरागड़े, सचिव सोनम कुंवरे, कोषाध्यक्ष रीना अहिरवार, संध्या ठाकुर, सोनम आठनकर, रुचि पटेल, प्रमिला बघेल, सोनम पाटिल, कविता हर्दा, रेशमा चौधरी आदि शामिल रहीं।

खड़ी रही एंबुलेंस, मरीजों को लाने-ले जाने में हुई समस्या

मेटरनिटी बिल्डिंग के अंदर न केवल डिलीवरी मरीज बल्कि सर्जरी मरीज भी भर्ती हैं। यहां एक भी वार्ड में कूलर नहीं लगा है। उमसभरी गर्मी के कारण मरीजों का हाल बेहाल है। वार्डों में छत के पंखे तो लगे हैं लेकिन उनसे लू निकल रही है जिससे मरीज परेशान हैं। खास बात यह है कि अस्पताल में कई दानदाताओं ने पूर्व में कूलर दान किए हैं लेकिन ये कूलर कहां हैं, किसी को नहीं पता। उधर, अफसर एसी रूम में बैठ रहे हैं। अस्पताल में प्राइवेट एंबुलेंस मरीजों को लाने, ले जाने के इंतजार में घंटों मेटरनिटी के मैन गेट पर खड़ी रहती हैं। अगर किसी मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा है तो उसके लिए भी रास्ता नहीं रहता है।

वार्ड में परेशान होते रहे मरीज

भास्कर टीम बुधवार को सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के मेटरनिटी में पहुंची। यहां वार्डों में मरीज लेटे थे। वार्ड में एक भी स्टाफ नर्स नजर नहीं आई। स्टाफ रूम में भी महिला नर्सें नहीं थीं। केवल डिलीवरी रूम में ही एक नर्स नजर आई। इसके बाद टीम दूसरी मंजिल पर सर्जरी रूम में पहुंची तो यहां भी नर्सिंग स्टाफ नजर नहीं आया। यहां भर्ती एक महिला ने बताया कि सुबह से कोई देखने नहीं आया। कौन सी दवा कब खानी है, यह पूछने के लिए उसका बेटा तीन बार नर्स को देखने गया लेकिन कोई नहीं मिला। आखिरकार जब डॉक्टर राउंड पर आए, उन्हीं से पूछकर दवा खाई। इसी तरह डिलीवरी वार्ड में भर्ती प्रसूता के साथ बैठे परिजन ने बताया कि सुबह से ही नर्सें नहीं आईं हैं। जब पूछा तो पता चला कि नर्सें हड़ताल पर हैं।

कोविड के स्टाफ को तैनात कर दिया है

नर्सों की कुछ मांगे राज्य स्तर पर हैं लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि हम व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलाएं। किसी भी मरीज को असुविधा न हो। इसलिए हमने कोविड के स्टाफ को तैनात कर दिया है। कोविड में मेडिकल कॉलेज और हमारा टेंपरेरी स्टाफ लगा था जिसे हमने वापस बुला लिया है और यहां तैनात कर दिया है। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ भी है, उसका भी हम सहयोग ले रहे हैं। -डॉ. केसी राठौर, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

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