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यह लापरवाही भारी न पड़ जाए:अस्पताल में रोज पहुंच रहे बुखार-दस्त से पीड़ित 40-50 बच्चे, फिर भी सभी की कोरोना जांच नहीं

दतिया13 दिन पहले
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जिला अस्पताल में बच्चे का सैंपल लेते स्वास्थ्य कर्मी। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल में बच्चे का सैंपल लेते स्वास्थ्य कर्मी।
  • स्वास्थ्य विभाग का बच्चों की सैंपलिंग पर फोकस नहीं, फीवर क्लीनिक पर रोज औसत 15 बच्चे स्वेच्छा से करा रहे जांच
  • उल्टी-दस्त होना कोरोना के लक्षण, जांच सिर्फ भर्ती होने वाले बच्चों की कर रहे

बच्चे इन दिनों उल्टी, दस्त व बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। यह कोरोना के भी लक्षण हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन उल्टी, दस्त व बुखार से पीड़ित 40 से 50 बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 फीसदी बच्चे गंभीर हाेते हैं। एेसे बच्चाें काे भर्ती करना पड़ रहा है।

भर्ती किए जा रहे इन बच्चों का ताे सैंपल लेकर कोरोना जांच की जा रही है लेकिन अन्य बीमार बच्चों की जांच नहीं की जा रही। यही लापरवाही कहीं तीसरी लहर का कारण न बन जाए। अस्पताल में संचालित फीवर क्लीनिक पर भी वर्तमान में जांच के लिए पहुंच रहे लोगों में औसत रूप से 15 फीसदी बच्चे हाेते हैं जो स्वेच्छा से जांच के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक कोई भी बच्चा या किशोर कोरोना संक्रमित नहीं निकला है।

कोरोना की तीसरी लहर का प्रभाव सबसे अधिक बच्चों पर हाेने की अाशंका जताई जा रही है। देश के कुछ हिस्सों में तीसरी लहर के संकेत भी मिल रहे हैं। वर्तमान में जिले में सिर्फ एक कोरोना संक्रमित है। 8 दिन से कोई नया कोरोना संक्रमित नहीं मिला है। अगर 3 दिन और कोई मरीज नहीं निकलता है तो जिला कोरोना मुक्त हो सकता है लेकिन बारिश के मौसम में बढ़ रहे उल्टी, दस्त, बुखार की मरीज चिंता बढ़ा रहे हैं। खासतौर से बच्चे जाे इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

जिला अस्पताल की ओपीडी में ही 40 से 50 बच्चे हर दिन इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। निजी क्लीनिकों के साथ जिले के ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों को भी जोड़ दें तो हर दिन सैकड़ों की संख्या में बच्चे उल्टी,दस्त, बुखार से पीड़ित होकर इलाज ले रहे हैं। चूंकि हाल ही में शादियों का सीजन समाप्त हुआ है। जिले के समीपस्थ जिलों के साथ देश के विभिन्न स्थानों पर आवागमन जारी है। ऐसे में कोरोना पर निगरानी के लिए बच्चों की कोरोना जांच होनी चाहिए लेकिन इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग नहीं दिख रहा।

सिर्फ भर्ती बच्चों की हो रही जांच

उल्टी, दस्त, बुखार भी कोरोना के लक्षण हैं। ऐसे में ओपीडी में पहुंचने वाले सभी बच्चों की कोरोना जांच होनी चाहिए ताकि कोरोना पर पूरी तरह से निगरानी रहे लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप उपाध्याय के अनुसार हर दिन औसत रूप से 5 से 10 बच्चों की उल्टी, दस्त, बुखार से स्थिति गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा रहा हैं। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की ही कोरोना जांच कराई जा रही है।

दस्तक अभियान में चिह्नित किए जा रहे बच्चे, निगरानी के निर्देश

इन दिनों प्रदेश के साथ जिले में भी दस्तक अभियान चल रहा है। 19 जुलाई से शुरू हुए अभियान में स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि अभियान के दौरान खांसी, जुकाम, बुखार, उल्टी, दस्त से पीड़ित बच्चे मिले तो उन्हें चिह्नित किया जाए। बता दें कि दस्तक अभियान के तहत कुपोषित बच्चों के साथ एनीमिया, निमोनिया से पीड़ित बच्चों को खोज कर उन्हें विटामिन ए की खुराक दी जाती है। अभियान में 6 माह से लेकर 5 साल तक के बच्चों को शामिल किया जाता है। अभियान के तहत कर्मचारियों को इससे अधिक उम्र के बच्चों पर भी निगरानी के निर्देश दिए हैं।

हर दिन औसत रूप से हो रही 700 जांच

वर्तमान में जिले की फीवर क्लीनिकों पर हर दिन औसत रूप से 700 से 800 लोगों की कोरोना जांच हो रही है। राहत की बात यह है कि संक्रमण शून्य हैं। अगर इसके साथ बच्चों की जांच को और बढ़ा दिया जाए तो कोरोना पर कड़ी निगरानी हो सकेगी।

कोई बच्चा संदिग्ध होगा तो कराएंगे जांच

अस्पताल में डॉक्टरों की सलाह पर या फिर अभिभावकों के चाहने पर बच्चों की भी कोरोना जांच की जा रही है। अभी बच्चों की विशेष रूप से जांच नहीं हो रही। जिले में दस्तक अभियान चल रहा है। कर्मचारियों को बच्चों की निगरानी के निर्देश हैं। अगर अभियान के दौरान कोई बच्चा संदिग्ध लगता है तो जांच कराई जाएगी। -डॉ. आरबी कुरेले, सीएचएमओ

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