पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

दो संस्थाएं, एक ही काम, हालात अलग:जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में हर तरह से मरीजों की देखरेख, मेडिकल कॉलेज के वार्ड में मरीज बेसहारा

दतियाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में मरीजों की जानकारी उनके परिजनों को देते डॉक्टर एसएन शाक्य। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में मरीजों की जानकारी उनके परिजनों को देते डॉक्टर एसएन शाक्य।

जिले में एक ही परिसर में कोविड मरीजों को दो जगह इलाज की व्यवस्था है लेकिन दाेनाें जगह की व्यवस्थाओं में फर्क है। मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में संक्रमित के भर्ती होने के बाद गर्मी के इस दौर में मरीज को पानी की पूछने वाला भी कोई नहीं होता। अगर मरीज गंभीर है तो वह दिनचर्या कैसे करे, यह भी संकट है। पहले कोरोना वार्ड में मरीज के अटेंडेंट को जाने की अनुमति थी। ऐसे में लोग अपने मरीजों की जरूरत पूरी कर देते थे। हालांकि यह गलत था। दो दिन पहले कलेक्टर संजय कुमार की फटकार के बाद इस पर रोक लगा दी गई। अब हाल यह है कि मरीज यहां से निकल कर निजी अस्पतालों में जा रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज का कोविड वार्ड
जिगना के कपिल तिवारी 5 मई को यहां भर्ती हुए। पहले अटेंडेंट को वार्ड में जाने की अनुमति थी तो भाई देखरेख कर रहा था। कलेक्टर की फटकार के बाद वार्ड में अटेंडेंट का जाना बंद कर दिया गया। इसके बाद मरीज की देखरेख करने वाला कोई नहीं रहा। पानी की व्यवस्था भी नहीं है। अगर बाथरूम जाना है तो कैसे जाएं। मरीज को किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी है तो कोई देखरेख करने वाला नहीं है। परेशान होकर कपिल ने डॉक्टर से कहा- छुट्‌टी कर दो। तत्काल कपिल की छुट्‌टी कर दी गई। वर्तमान में वे एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

जिला अस्पताल का कोविड वार्ड: यहां डॉक्टर हर मरीज की जांच करने के बाद बाहर बैठे परिजन को हालत बताते हैं
यहां भर्ती चूनगर फाटक निवासी 95 वर्षीय विमला देवी की देखरेख पैरामेडिकल स्टाफ कर रहा है। अधिक वृद्ध होने के कारण यहां उनके लिए दो पलंग जोड़कर डबल बैड कर दिया गया है ताकि वे गिरे नहीं। जरूरत के लिए समय समय पर वार्ड में तैनात नर्स मरीजों के हालचाल पूछती रहती हैं। वार्ड में तैनात डॉ. एसएन शाक्य सुबह हर मरीज की जांच के बाद बाहर बैठे परिजन को मरीज का हालचाल बताते हैं। जरूरत या खानपान की वस्तुएं मरीजों तक समय से पहुंचा दी जाती हैं ताकि मरीज को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

अब हर पलंग पर घंटी की व्यवस्था कर रहे हैं
मरीजों की देखरेख के लिए वार्ड बॉय हैं। वे वार्ड के बाहर बैठते हैं। वार्ड में अधिक समय नहीं रुक सकते। मरीज इशारे से या किसी के सहयोग से उन्हें बुला लें। पानी के लिए वार्ड में कैंपर रखे रहते हैं। जो मरीज गंभीर हैं, उनके पलंग के पास 5 लीटर के कैंपर हैं। अब हर मरीज के पलंग के पास घंटी लगाने की व्यवस्था कर रहे हैं ताकि जिसे जरूरत हो, वह घंटी बजा दे।
डॉ. अर्जुन सिंह, प्रभारी कोविड वार्ड, मेडिकल कॉलेज

खबरें और भी हैं...