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भेदभाव:रिंग रोड निर्माण के लिए गरीबों के मकान तोड़े, राजनीतिक पहुंच वालों को छोड़ दिया

दतिया12 दिन पहले
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आसपास के मकान गिरा दिए यहां थम गई जेसीबी मशीन - Dainik Bhaskar
आसपास के मकान गिरा दिए यहां थम गई जेसीबी मशीन
  • 14 करोड़ लागत से बन रही रिंग रोड के निर्माण में नगर पालिका की कब्जा हटाओ मुहिम संदेह के घेरे में

रिंग रोड निर्माण में हटाए जा रहे अतिक्रमण में भेदभाव नजर आ रहा है। रोड निर्माण के लिए नगरपालिका ने ज्यादातर गरीब लोगों के तो मकान तोड़ दिए लेकिन जब बारी राजनीतिक पहुंच वाले लोगों की आई तो जेेसीबी थम गई। राजनीतिक पहुंच वालों में कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने जमीन के अलावा आवास निर्माण के लिए पैसे भी ले चुके हैं। ऐसे में नपा की कार्रवाई संदेह के घेरे में आ रही है। इस संबंध में नगर पालिका सीएमओ का कहना है कि 8 से 10 मकान ही ऐसे बचे हैं, इन्हें शीघ्र तोड़ दिया जाएगा।

बता दें कि दतिया शहर को चारों ओर से घेरे एक ऊंची-मोटी दीवार थी। दीवार को राजसी समय में शहरपनाह का नाम दिया गया था। स्थानीय भाषा में लोग इसे रर के नाम से जानते थे। यह पूरी तरह से सरकारी थी। समय के साथ लोगों ने कहीं दीवार को खोखला किया तो कहीं दीवार पर ही अवैध कब्जा कर निर्माण शुरू कर दिए।

वर्ष 2014 में इसे तोड़कर रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बनवाया। कोई भी अतिक्रमणकारी रहने के लिए परेशान न हो, इसलिए उनके विस्थापन की व्यवस्था की गई। शुरूआती दौर में जब नपा ने सर्वे किया जो रर पर 131 परिवारों का कब्जा था। लोगों को जैसे ही पता चला कि रर पर रहने वाले लोगों को जमीन के साथ मकान बनाने के लिए पैसे मिल रहे हैं तो अवैध कब्जाधारियों की संख्या बढ़ गई। यह लगभग 190 तक पहुंच गई। नपा ने ग्राम चितुंवा के पास मोदीनगर बसाया। यहां पर रर पर रहने वाले लोगों को प्लाट के साथ भवन बनाने के लिए पीएम आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए पैसे दिए।

जमीन के साथ पैसे भी ले चुके
वीरेन्द्र सेन ने चितंुवा में जमीन के साथ पैसा भी ले लिया। शेष लोग राजनीतिक पहुंच वाले लोग हैं। ऐसे में इनके मकान तोड़ने की हिम्मत नपा नहीं जुटा पा रही है। इससे रिंग रोड का निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

आसपास के मकान गिरा दिए यहां थम गई जेसीबी मशीन
चूनगर फाटक पर रिंग रोड के दायरे में पूर्व पार्षद बृजेश दुबे, अल्पसंख्यक मोर्चा के गुड्‌डू कुरैशी, आरएसएस से जुड़े वीरेन्द्र सेन, प्रो. निलय गोस्वामी आदि के मकान आ रहे हैं। नवंबर से जैसे ही काम ने गति पकड़ी जेसीबी मशीन ने सभी के निर्माण कार्यों को तोड़ते हुए आगे बढ़ रही थी। लेकिन यहां आकर थम गई। यहीं नहीं गुर्जा हनुमान मंदिर के पास भी कुछ पहुंच वाले लोगों के मकानों को नहीं तोड़ा गया। इससे रिंग रोड में एक बार फिर बाधा पैदा हो रही है।

बाधा के कारण 3 साल में नहीं बन सकी रिंग रोड, राजनीतिक निर्माण बन रहे बाधा
14 करोड़ की लागत से लगभग 3 किमी लंबी रिंग रोड का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। कुछ लोग इस मामले को हाईकोर्ट ले गए। निर्माण कार्य अटक गया। जून 2018 में हाईकोर्ट का अड़ंगा हटा तो नपा ने तेजी के साथ रर तोड़ने का काम शुरू किया। लेकिन इसी साल विधानसभा चुनाव हुए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आ गई। कांग्रेस सरकार के दौरान रिंग रोड का काम पूरी तरह से बंद रहा। मार्च 2020 में एक बार फिर प्रदेश में भाजपा सत्तारुढ़ हुई तो रिंग रोड का काम फिर से शुरू हुआ। नवंबर 2020 से रिंग रोड के काम ने गति पकड़ी तो अब राजनीतिक निर्माण बन रहे बाधा।

सभी निर्माण तोड़े जाएंगे
रिंग रोड के दायरे में आने वाले लोगों को चितुंवा में विस्थापित कर दिया है। रिंग रोड पर 8 से 10 पक्के निर्माण टूटने के लिए रह गए हैं। इन्हें भी तोड़ा जाएगा।
एके दुबे, सीएमओ, नपा, दतिया

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