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अनदेखी:शहर के पार्कों पर अतिक्रमण, अंदर ही फेंकते हैं कचरा इसलिए खत्म हो रही सुंदरता, संक्रमण का भी खतरा

दतिया5 दिन पहले
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किलाचौक स्थित गोविंद पार्क के चारों तरफ अतिक्रमण होने से पार्क दिखाई नहीं दे रहा है।
  • बेजा कब्जों की चपेट में वीर सिंह पार्क, गोविंद सिंह पार्क, बम-बम महादेव पार्क

शहर के सभी पार्क लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में हैं। पार्कों के बाहर गुमटियां रखी हैं, हाथ ठेले रखे हैं, वाहन पार्क हो रहे हैं और कुछ पक्की दुकानें बन गई हैं। अतिक्रमण के कारण पार्क दिखाई तक नहीं देते हैं। हैरानी नगर पालिका पार्कों का सौंदर्यीकरण कराना तो दूर, अतिक्रमण मुक्त कराने में भी दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। पार्कों का अस्तित्व धीरे धीरे समाप्त होता जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो एक दिन पार्कों का नामोनिशान नहीं बचेगा और पार्कों के स्थान पर अतिक्रमण ही अतिक्रमण होगा।

शहर में नगर पालिका आम जनता की सुविधा के लिए एक भी पार्क विकसित नहीं कर सकी है। यहां तक कि मिनी स्मार्ट योजना के तहत नए पार्क के निर्माण के लिए दो साल पहले लाखों रुपए की राशि शासन ने नगर पालिका को उपलब्ध कराई थी। नगर पालिका पार्क बनाने के लिए जगह तक नहीं तलाश सकी है। राजस्व विभाग ने नगर पालिका को बस स्टैंड बायपास पर संचालित कच्ची शराब की फैक्ट्री के पास जगह उपलब्ध कराई थी। इसलिए नपा के जनप्रतिनिधियों ने कंजरों के डेरों के पास जमीन लेने से इंकार कर दिया था।

जनप्रतिनिधियों ने राजस्व विभाग से सेंवढ़ा चुंगी बायपास रोड पर खाली पड़ी सरकारी जमीन आवंटित करने की मांग की लेकिन वहां राजस्व विभाग ने नपा को जमीन आवंटित नहीं की। इसका मुख्य कारण यह है कि राजस्व विभाग की इस सरकारी जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए हैं और अभी भी अतिक्रमण जारी है। लोग कच्चे पक्के मकान बनाकर जगह कब्जाते जा रहे हैं और राजस्व विभाग को अपनी ही जमीन की चिंता नहीं है।

पार्कों के निर्माण पर लाखों खर्च, लेकिन देखरेख नहीं
नगर पालिका पिछले 20 साल में शहर के पार्कों के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार, निर्माण आदि काम पर लाखों रुपए खर्च कर चुकी है। लेकिन इन 20 सालों में शहर के एक भी पार्क पर एक रुपया खर्च नहीं किया। उल्टा पार्क बिना देखरेख के कारण उजड़ गए। जबकि 20 साल पहले शहर के सभी पार्क हरे भरे थे, फूलों, छाया के पेड़ लगे थे, फव्वारे भी चलते थे। लेकिन धीरे-धीरे इनके बुरे दिन आने शुरू हो गए और पार्क वीरान हो गए। अब पार्कों में लोग जुआ खेलते थे, शराब पीते हैं और टॉयलेट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। किलाचौक के गोविंद पार्क को समाज सेवी त्यागी ने खुद मेहनत कर रुचि दिखाकर संवार दिया है जो आज किलाचौक की शान है। जिसकी चौतरफा लोगों द्वारा प्रशंसा भी की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब एक व्यक्ति पार्क को संवार सकता है तो नगर पालिका के पास तो पैसा भी और कर्मचारी भी हैं फिर नपा क्यों पार्कों को संवारने में रुचि नहीं दिखा रही है।

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