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कोरोना काल में पहली बार ऐसे नतीजे:बिन परीक्षा पहली बार 10वीं के सभी छात्र पास, पिछले सत्र में सिर्फ 53 फीसदी रहा था रिजल्ट

दतिया16 दिन पहले
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  • सालभर नहीं खुले स्कूल, सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई, कोरोना संक्रमण बढ़ा तो परीक्षा भी नहीं हो सकी थी
  • एमपी बोर्ड के 10वीं के रिजल्ट में इस बार टॉपर की सूची जारी नहीं

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बुधवार को हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। इस बार सभी स्कूलों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा है यानी 10वीं का हर छात्र पास हाे गया। इससे पढ़ाई में कमजोर या पढ़ाई न करने वाले छात्र ज्यादा खुश हाे गए। बीते वर्ष 2020 में जिले में हाईस्कूल का परिणाम 53 फीसदी रहा था, यानि औसत रूप से जिले के 100 छात्रों में से 53 छात्र उत्तीर्ण हुए थे। शेष 47 छात्र पूरक या अनुत्तीर्ण की श्रेणी में रहे थे लेकिन इस बार कोरोना काल ने सभी छात्रों को उत्तीर्ण करा दिया।

बता दें कि काेरोना के कारण पूरे साल स्कूल नहीं खुले थे। बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के सहारे रहे। मार्च में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो जाने और अप्रैल व मई में कोरोना का कहर होने के कारण माध्यमिक शिक्षा मंडल ने वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया। शासन ने परीक्षा परिणाम के लिए फार्मूला तैयार किया। बच्चों के टेस्ट, अर्द्ध वार्षिक परीक्षा के साथ किसी भी स्कूल के बीते तीन साल के परीक्षा परिणाम के श्रेष्ठ परिणाम के अंकों के आधार पर परीक्षा परिणाम तैयार किया गया। सभी स्कूलों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रखने के भी निर्देश देते हुए स्कूलों से ही छात्रों के अंक मांगे गए। मंडल ने अपने फाॅर्मूला व रिकाॅर्ड के आधार पर छात्रों को अंक देकर बुधवार को औपचारिक रूप से परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। प्रदेशभर के सभी हाईस्कूलों के साथ जिले के सभी हाईस्कूल के छात्रों को उत्तीर्ण घोषित कर दिया गया।

बीते साल रमपुरा हाईस्कूल में सिर्फ 15% रहा था रिजल्ट

बीते साल मार्च में देश में कोरोना ने दस्तक दी थी। 25 मार्च से लॉकडाउन लगा था, तब तक हाई स्कूल के कुछ पेपर हो चुके थे। इसके बाद शासन ने कोरोना गाइड लाइन का पालन कराते हुए छात्रों से शेष पेपर भी हल कराए थे। ऐसे में अंकों के आधार पर ही परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। जिले में वर्ष 2020 में भांडेर ब्लाॅक के सरकारी हाईस्कूल सोहन का रिजल्ट सबसे अधिक 95 फीसदी रहा था जबकि सबसे कम सिर्फ 15.38 फीसदी रिजल्ट भांडेर ब्लाॅक के ही रमपुरा हाईस्कूल का रहा था।

अच्छा रिजल्ट: इस बार किसी प्राचार्य को नहीं मिलेगा नोटिस

इस रिजल्ट से सरकारी स्कूल के प्राचार्यों को भी सुकून रहा। कारण, पहले स्कूल का रिजल्ट खराब अाने पर प्राचार्यों को नोटिस जारी किए जाते थे अाैर तमाम सवाल-जवाब हाेते थे लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हाेगा। बीते साल जिले के 122 सरकारी हाईस्कूल में से 7 स्कूल ऐसे थे जिनका परीक्षा परिणाम 30 फीसदी या इससे कम रहा था जबकि 32 स्कूल ऐसे थे जिनका परीक्षा परिणाम 50 फीसदी या इससे कम रहा था लेकिन इस बार सभी स्कूलाें में सभी छात्र पास हो गए।

इस बार टाॅपर सूची भी नहीं

प्रदेश सरकार ने इस बार टॉपर सूची भी जारी नहीं की है। जिला स्तर पर भी टॉपर सूची तैयार नहीं की गई। ऐसे में जहां कमजोर छात्रों को खुशी मिली। वहीं सालभर मेहनत से पढ़ाई करने वाले बच्चे निराश हुए क्योंकि प्रदेश या जिले की टॉपर सूची में नाम दर्ज कराने के सपने पर पानी फिर गया।

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