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कोरोना काल का दशहरा:पहली बार 65 फीट का रावण मास्क लगाकर जलेगा; 75 किलो रद्दी, 500 बांस और 70 साड़ियों का उपयोग

दतियाएक महीने पहले
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कोरोना काल का दशहरा कई मायनों में खास होगा। इस साल भी स्टेडियम मैदान में दशहरा पर्व पर रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलेंगे। लेकिन रूप बदला होगा। मास्क लगे रावण और हाथ में सेनेटाइजर की बोतल लिए कुंभकरण का दहन होगा। इस साल पहली बार 65 फीट ऊंचे रावण और 60-60 फीट ऊंचे कुंभकरण व मेघनाद के पुतले जलेंगे। इतनी ऊंचाई के पुतले पहली बार जलेंगे। तीनों पुतलों के बीच दो-दो गज की दूरी भी सोशल डिस्टेंस का पालन कराते हुए रखी जाएगी।

बता दें कि स्टेडियम पर पिछले 7 साल से 50 फीट तक ऊंचाई वाले रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलते आए हैं। चल समारोह गोविंद गंज से प्रारंभ होता है। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी, हनुमान जी के अलावा अन्य देवी देवताओं की झांकी रथों पर सवार होकर पूरे बाजार से निकलती हैं। सबसे आगे रावण का पांच फीट ऊंचा प्रतिकात्मक रावण चल चल समारोह में चलता है। स्टेडियम पर चल समारोह पहुंचने पर भगवान श्रीराम और रावण का युद्ध होता है, युद्ध में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के मरने पर पुतला दहन होता है।

इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई अब तक की सबसे ज्यादा 65 फीट है। जबकि रावण के मझले भाई कुंभकरण और उसके प्रिय मेघनाद की ऊंचाई पांच-पांच फीट कम यानि 60 फीट रखी गई। तीनों राक्षसों के पुतले ग्वालियर का वर्मा परिवार बना रहा है। संतोष वर्मा, उनकी पत्नी अनीता, बहू अर्चना, भतीजा गोलू, भांजा सोनू, छोटे भाई कृष्णा, नरेंद्र, छोटू, प्रमोद आदि एक महीने से दिन रात पुतले बनाने में जुटे हैं। तीनों पुतलों के चेहरे बनकर तैयार हो चुके हैं। अब सिर्फ बीच का हिस्सा बन रहा है। आगामी तीन दिन में तीनों पुतले बनकर तैयार हो जाएंगे। दशहरे के दिन सुबह तीनों पुतले क्रेन मशीन से खड़े कर दिए जाएंगे।

प्रेरणा देने रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के बीच होगा फासला
मूर्तिकार संतोष वर्मा बताते हैं कि नवरात्र और दशहरा पर्व पहली बार कोरोना रूपी महामारी के बीच मनाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण छूने, छींकने, खांसने से फैलता है और इसकी अभी तक वैक्सीन नहीं बनी है। मास्क, सेनेटाइजर और दो गज दूरी ही इसका इलाज है। इसलिए दशहरा पर्व पर रावण दहन में रावण के चेहरे पर मास्क लगाया जाएगा। जबकि कुंभकरण के हाथों में सेनेटाइजर की बोतल होगी। इसके अलावा तीनों के पुतले एक दूसरे से काफी फासले पर रखे जाएंगे। ताकि लोग इनसे प्रेरणा लें।

75 किलो रद्दी, 500 बांस और 70 साड़ियों का उपयोग
दशहरा पर जलने वाले रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बनाने में 75 किलो रद्दी का उपयोग किया गया है। इसके अलावा 500 बांस की लड़कियाें से पुतलों का ढांचा तैयार किया गया है। इसके अलावा 70 साड़ियां भी लगाई गई हैं। इसके अलावा पांच किलो हरा, पीला, नीला, काला व अन्य तरह का कलर उपयोग किया गया है। पुतला बनाने वाले संतोष बताते हैं कि तीनों के चेहरों की लंबाई 15-15 फीट है। जबकि बॉडी 35 फीट और पैरों की लंबाई 10 से 15 फीट रखी गई है।

आतिशबाजी से आसमान में लिखा दिखेगा... मास्क लगाएं
रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों में दो लाख रुपए से अधिक कीमत की आतिशबाजी भरी जा रही है। यह आतिशबाजी हाथ की बनी है। इसलिए इसकी आवाज की गूंज भी ज्यादा होगी। यही नहीं जब तीनों के पुतले जलेंगे तो जलती हुई आतिशबाजी आसमान में पहुंचेगी इस जलती हुई रंग बिरंगी शतरंगी आतिशबाजी से आसमान में कोरोना का स्लोगन-कोई रोड से न निकले, मास्क लगाएं और दो गज दूरी का ध्यान रखें आदि जागरूकता संदेश भी देखने को मिलेंगे।

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