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अनदेखी:अंकुरित फसल चट कर गया टिड्‌डी दल, दोबारा होगी बोवनी कृषि विभाग का बहाना बजट न होने से छिड़काव नहीं हुआ

दतियाएक महीने पहले
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  • जिले के सेंवढ़ा, इंदरगढ़, दतिया और भांडेर क्षेत्र में बार-बार टिड्‌डी दल का हमला, कृषि विभाग की अनदेखी

जिले में डेढ़ माह से टिड्‌डी दल का आतंक है। जब दल ने जिले में प्रवेश किया था, उस समय खेत सूखे थे। वर्तमान में खेतों में खरीफ की फसल अंकुरित हो रही है। टिड्‌डी दल अंकुरित फसलों को चौपट कर रहा है। हैरानी इस बात की है कि फसलों पर कीट व्याधि होने पर उसके निराकरण के लिए जिम्मेदार कृषि विभाग के अधिकारी समस्या का समाधान करने के बजाय बजट का रोना रो रहे हैं। किसान अंकुरित फसल चौपट हो जाने पर खेतों में फिर से बुबाई के लिए मजबूर हो रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक हानि हो रही है। टिड्‌डी दल पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने दल भी बनाए। लेकिन हाल यह है कि कोई भी दल संबंधित क्षेत्रों में आजतक न तो समस्या का समाधान करने पहुंचा और न ही हो रहे नुकसान का आंकलन करने। 
टिड्‌डी दल ने जिले में  25 मई को ग्राम रामसागर, खोड़न और उसके आसपास प्रवेश किया था । लेकिन खेत खाली होने के कारण बागवानी फसलें छोड़कर किसी को नुकसान नहीं हुआ। पिछले डेढ़ महीने से टिड्‌डी दल जिले के अंदर गांव-गांव घूम रहा है। जिले के तीनों अनुभागों के करीब 50 से ज्यादा गांवों में टिड्‌डी दल हमला कर चुका है। यहां तक कि 15 दिन पहले दतिया शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी टिड्‌डी दल हमला कर चुका है। लेकिन कृषि विभाग ने टिड्‌डी दल को जिले से बाहर भगाने अथवा नष्ट करने के लिए एक बार भी न तो दवा का छिड़काव कराया और न ही अन्य किसी तरह के प्रबंध किए। कागजों में फील्ड अधिकारियों का एक दल गठित कर दिया। यह दल डेढ़ महीने में कहीं भी किसी भी गांव में टिडि्डयों को भगाते नहीं देखा गया। 
अब तक इन गांवों में हो चुका है नुकसान

ग्राम हमीरपुर, डगरई, लरायटा, खैरी, मकौनी, इंदरगढ़, थरेट, सरसई, लहार हवेली, खिरिया आलम, ईगुई, ग्यारा, मलक पहाड़ी, पंडोखर, गोंदन, डीपार, मंगरौल, छोटा आलमपुर, सिंधवारी, बहादुरपुर, महाराजपुरा समेत 50 से ज्यादा गांव हैं जहां किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। लेकिन न तो नुकसान का सर्वे हुआ न ही टिड्‌डी दल पर नियंत्रण करने कोई कारगर कदम उठाए गए। किसानों ने थाली बजाकर, आतिशबाजी चलाकर खेतों में दौड़ लगाकर टिडि्डयों को भगाया।

तिली, मूंग की दोबारा बोवनी करना पड़ेगी
हमने 20 दिन पहले तिली, मूंग की बोवनी कर दी थी। फसल उग आई थी जो टिडि्डयों ने साफ कर दी हमें दोबारा बोवनी करना पड़ी।
शंकर सिंह, कृषक बहादुरपुर
दोबारा लगवाना पड़ रही धान की पौध
मेरे चार बीघा जमीन में धान की रुपाई हुई थी। दो दिन पहले टिडि्डयों ने पौध को जहां तक पानी भरा था उतना खाकर नष्ट कर दिया। मैं दोबारा धान लगवाना पड़ी।
रामनिवास दफेदार, कृषक थरेट
10 बीघा में धान की पौध का नुकसान हुआ
हमारी 10 बीघा खेत में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। धान की पौध भी खत्म हो चुकी है। अब पौध खरीदकर धान लगाना पड़ेगी।
राजू शर्मा, कृषक थरेट

खरीफ फसलों को नष्ट कर रहा टिड्‌डी दल, दोबारा करनी पड़ रही बुवाई
इस साल जून माह में ही पर्याप्त बारिश हो जाने पर किसानों ने धान, मूंगफली, उड़द, मूंग, मूंगफली, ज्वार आदि फसलों की बोवनी शुरू कर दी है। गुरुवार तक जिले में 12 हजार 840 हेक्टेयर में धान की रुपाई हो चुकी है। जबकि मक्का 540 हेक्टेयर, ज्वार 920 हेक्टेयर, अरहर 300 हेक्टेयर, उड़द 18 हजार 650 हेक्टेयर, मूंग 1350 हेक्टेयर, सोयाबीन 450 हेक्टेयर, मूंगफली 8 हजार 540 हेक्टेयर और तिल की बोवनी 13 हजार 250 हेक्टेयर में हो चुकी है। बोवनी 20 जून के बाद से ही शुरू हो गई थी। इसलिए फसलें अंकुरित हो गई हैं, धान की रुपाई के साथ मूंगफली की निदाई का कार्य भी शुरू हो गया है। टिड्‌डी दल के हमले में अंकुरित फसलें नष्ट हो रही हैं। जिस कारण किसानों को खेतों की जुताई कराकर फिर से बोवनी करना पड़ रही है। इससे न केवल खाद, बीज, जुताई में एक्सट्रा लागत लग रही है बल्कि समय की भी बर्बादी हो रही है।

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