पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Gwalior
  • Datiya
  • Identification Of Datia Becoming Paddy; Area Increased 4 Times In 4 Years, The Demand Of Basmati Here Till Punjab Haryana

गेहूं के साथ धान का कटाेरा भी बन रहा हमारा:धान बन रही दतिया की पहचान; 4 साल में 4 गुना बढ़ा रकबा, यहां के बासमती की पंजाब-हरियाणा तक मांग

दतिया2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
तस्वीर इंदरगढ़ की है। खेत में धान की पौध तैयार होते हुए। - Dainik Bhaskar
तस्वीर इंदरगढ़ की है। खेत में धान की पौध तैयार होते हुए।
  • 2017 में सिर्फ 16650 हेक्टेयर था रकबा, 2020 में बढ़कर 74770 हेक्टेयर हुआ
  • जिले में पैदा हुई 75 फीसदी धान पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश तक जा रही

गेहूं के बाद हम हमारा जिला धान का कटोरा भी बनता जा रहा है। खरीफ सीजन में धान का रकबा साल दर साल बढ़ रहा है। 2017 की तुलना में 2020 में रकबा बढ़कर चार गुना हाे चुका है। यहां से 75 फीसदी धान पंजाब, हरियाणा व उत्तरप्रदेश भेजी होती है।

कारण, किसान बासमती की पैदावार अधिक करते हैं जिसकी इन राज्याें में अच्छी मांग है। धान का रकबा अगर ऐसे ही बढ़ता रहा तो जिले में राइस मिल उद्योग की संभावना पैदा होंगी। धान की पैदावार की शुरुआत सबसे पहले सेंवढ़ा अनुभाग से हुई। अच्छा मुनाफा मिलने पर किसानों का इस ओर रुझान बढ़ा। शासन भी समर्थन मूल्य पर जिले से धान की खरीद करता है। ऐसे में किसानों के लिए धान की फसल लाभ का सौदा सिद्ध हो रही हैं। धान की पैदावार में किसान के लागत के बराबर मुनाफा होता है।

लगभग 8 साल पहले सेंवढ़ा अनुभाग के ग्राम पोसरा, देभई, भगुवापुरा क्षेत्र के किसानों ने खरीफ के सीजन में अपनी बहुत कम यानि किसी ने 10 बीघा तो किसी ने 12 से 15 बीघा में जिले में धान की पैदावार करना शुरू की। पानी की सुविधा, जलवायु और मिट्टी अनुकूल हाेने के साथ धान की अच्छी पैदावार हुई और किसानों को बाजार में भाव भी अच्छे मिले। लागत से दोगुना मुनाफा मिला तो किसानों को रुझान धान की फसल की ओर बढ़ता चला गया। बीते साल किसानों ने 74 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार की थी।

कृषि विभाग ने इस बार 75 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार का प्रस्ताव तैयार किया है। चूंकि इस साल समय से पहले अच्छी बारिश हो गई। मानसून भी समय पर आने की संभावना के साथ सामान्य बारिश का अनुमान है। ऐसे में किसानों द्वारा धान की पैदावार अधिक करने की संभावना भी बन रहीं हैं।

सेंवढ़ा अनुभाग में सबसे अधिक पैदावार

जिले में धान की पैदावार की शुरुआत करने वाले किसानों में शामिल देभई निवासी अशोक शर्मा कहते हैं कि क्षेत्र की मिट्‌टी धान की फसल के अनुकूल है। धान के लिए काली व पड़ुवा मिट्‌टी अच्छी होती है। क्षेत्र में पानी की बोर सफल हैं। चूंकि मिट्‌टी अनुकूल है। पानी की समस्या नहीं है और शुरुआत में मुनाफा भी अच्छा मिला। इसीलिए धान का रकबा बढ़ता चला गया। किसान शर्मा के अनुसार एक बीघा में धान लगाने पर 5 से साढ़े 5 हजार का खर्चा आता है। 1 बीघा में साढ़े 5 से 6 क्विंटल धान की पैदावार होती है। बाजार में 3 से 4 हजार तक का भाव मिला तो मुनाफा अच्छा हो जाता है। इसलिए किसान धान की पैदावार कर रहे हैं।

बासमती की पैदावार अधिक

गल्ला व्यापारी विजय वैध, गोले साहू, मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि जिले के किसान सबसे अधिक 1121 व 1509 किस्म की धान पैदा करते हैं। यह दोनों बासमती की किस्म हैं। सुगंधा की भी पैदावार होती है। बासमती की पैदावार अधिक होने से हरियाणा के पानीपत, करनाल, कैथल, पंजाब से जालंधर, अमृतसर उप्र के बरेली जैसे शहर में यहां से धान भेजी है। इन स्थानों पर बासमती चावल की मिल अधिक हैं। कुछ स्थानीय व्यापारी धान की निर्यात इन शहरों में करते हैं तो कुछ मिल के लोग यहां धान खरीदने आते हैं।

अच्छे रेट मिलते है, जलवायु का प्रभाव कम पड़ता है, इसलिए बढ़ रहा रकबा

धान की फसल में रिस्क कम है। चूंकि बासमती की पैदावार अधिक होती है। इसलिए किसानों को भाव अच्छे मिलते हैं। जलवायु का प्रभाव भी कम पड़ता है। किसानों के पास पानी की सुविधा भी है। यही कारण हैं कि किसानों का रुझान धान की पैदावार पर है।
डॉ. आरकेएस तोमर, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र दतिया

खबरें और भी हैं...