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बाढ़ के बाद दिखे जख्म:तंबू में ठहरे बाढ़ पीड़ित पाली-सुनारी के लोगों तक मदद नहीं पहुंची तो चक्काजाम

दतिया3 महीने पहले
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शनिवार को इंदरगढ़-गोराघाट रोड पर पाली-सुनारी गांव के बाढ़ पीड़ितों ने राहत नहीं मिलने पर चक्काजाम किया। - Dainik Bhaskar
शनिवार को इंदरगढ़-गोराघाट रोड पर पाली-सुनारी गांव के बाढ़ पीड़ितों ने राहत नहीं मिलने पर चक्काजाम किया।
  • बाढ़ पीड़ित अब अपनी गृहस्थी लेकर रिश्तेदारों के यहां जाने को मजबूर

सिंध नदी में उफान के आई बाढ़ ने दतिया और सेंवढ़ा तहसील के कई गांवों में तबाही ला दी है। बाढ़ के कारण मकान खंडहर हो गए हैं। गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया है। कोटरा गांव के लोग मकान ढहने से अब अपना सामान ट्रैक्टरों में लादकर अपने रिश्तेदारों के यहां दूसरे गांवों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। इधर, सेंवढ़ा नगर के वार्डों में कीचड़ के हालात निर्मित हो गए हैं। लोग न बाहर से आ पा रहे हैं और न अंदर जा पा रहे हैं।

वहीं चार दिन से गोराघाट-इंदरगढ़ रोड पर तंबू में ठहरे सेंवढ़ा विधानसभा के पाली, सुनारी गांव के ग्रामीणों ने शनिवार को इंदरगढ़-गोराघाट रोड पर जाम लगा दिया। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पीड़ितों का कहना था कि राहत सामग्री उनके पास नहीं आई है, जिससे बच्चे, बड़े बुजुर्ग सभी भूखे प्यासे हैं। कोई भी राहत सामग्री देने नहीं आ रहा है। जाम लगने की खबर मिलने पर गोराघाट पुलिस और इंदरगढ़ तहसीलदार सुनील भदौरिया ग्रामीणों के बीच पहुंचे। तहसीलदार की समझाइश के बाद जाम खुला। बता दें कि दो-तीन अगस्त की रात में सिंध नदी किनारे बसे गांव में बाढ़ तबाही लेकर घुसी और अपने साथ सब कुछ बहा ले गई थी। तीन दिन बाद बाढ़ का पानी तो उतरकर अपनी हद में आ गया लेकिन नदी किनारे बसे गांव को कभी न भुला पाने वाले गहरे जख्म दे गया। लगभग 500 से ज्यादा मकान ढह गए।

लगभग 11 हजार लोग बेघर हो गए। बाढ़ के कारण करीब ढाई हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी दलहन, तिलहन फसलें बह गई हैं। ग्रामीणों की आय का साधन मवेशी भी बाढ़ में बह गए हैं। ग्रामीणों के पास खुद के पकड़े, खाने के लिए अनाज और रहने के लिए छत नहीं बची है।

बाढ़ के बाद नजर आने लगा तबाही का मंजर

ग्राम कोटरा- आबादी लगभग 800: बाढ़ से 80 फीसदी मकान गिर गए। जो 20 फीसदी बचे हैं वे उनमें नए मकान हैं लेकिन नींव कमजोर हो गई है, जानमाल का खतरा है।

वर्तमान स्थिति: गांव के 80% लोग मलवे में दबा सामान निकालने के बाद गांव छोड़कर नाते रिश्तेदारी में चले गए हैं। 20% लोग बचे हैं जो फिर से गृहस्थी सहेजने का प्रयास कर रहे हैं।

बड़ौनकलां- आबादी करीब 4 हजार: गांव की निचली आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। लगभग डेढ़ सौ घरों में नुकसान हुआ है। यहां लोगों के घर और गृहस्थी बर्बाद हो चुकी है। वर्तमान स्थिति: जो लोग बाढ़ की चपेट में आकर घर मकान गवां चुके हैं उनके लिए इसी गांव के दूसरे लोग फरिश्ता बनकर खाना पीना मुहैया करा रहे हैं।

चूना चौकी- आबादी करीब डेढ़ सौ: बाढ़ आते ही गांव के लोग पहाड़ी पर बस गए थे। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सामान सट्‌टा लेकर रिश्तेदारी में चले गए। इक्का दुक्का लोग ही बचे हैं जो कि अब बेघर होने पर पॉलिथीन, घास फूस से रहने लायक आशियाना बना रहे हैं।

हिनौतिया- आबादी करीब ढाई हजार: यह गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। गांव के लोग पहाड़ी पर आश्रय लिए हैं। गांव के 30 फीसदी लोग घर छोड़कर चले गए हैं बांकी अभी भी मलबा में गृहस्थी तलाश रहे हैं। ग्राम धौर्रा- आबादी लगभग 250: गांव नदी किनारे होने के कारण बाढ़ की चपेट में आने से सभी मकान गिर गए हैं। स्थिति यह है कि बाढ़ की पीड़ित लोग चूना चौकी पर पॉलिथीन के घर बनाकर रह रहे हैं।

मदद के लिए समाजसेवियों ने बढ़ाए हाथ, तंबुओं में रह रहे लोगों को बांटे राशन के पैकेट
शनिवार को अन्नदान सेवा समिति सदस्य ट्रॉलियों में राशन के पैकेट भरकर सिंध नदी के किनारे के गांव बड़ौनकलां, कोटरा, धौर्रा, चूनाघाटी और मजरा टोला पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे। राशन सामग्री से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली मुख्य मार्गों पर भरे कीचड़ में फंस गए। काफी देर बाद निकालकर तंबुओं में रह रहे लोगों के बीच पहुंचे। समाजसेवियों ने प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 10 किलो आटे का थैला, दो किलो आलू, एक किलो दाल, एक किलो चावल, एक किलो नमक, मिर्च, धनिया मसाले और तेल के पैकेट दिए। इस समिति में शैलेंद्र यादव, दीपक सचदेवा, छोटे राजा गुर्जर, लालचंद आडवाणी, रामकुमार तिवारी, अरुण तिवारी, सिल्लन साहू, अनुराग चौधरी, लवी बाजवा, राजू त्यागी, संघर्ष यादव व अमित महाजन शामिल हैं।
जिले में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए न्यू कलेक्टोरेट में बाढ़ नियंत्रण कक्ष क्रमांक 9 के मुख्य द्वार के बगल में स्थापित किया गया है। जिले में कहीं पर भी अतिवृष्टि या बाढ़ की सूचना इस कक्ष के दूरभाष क्रमांक 07522-235100 पर दी जा सकती है। अपर कलेक्टर एके चांदिल ने आदेश जारी कर बाढ़ नियंत्रण कक्ष में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है।

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