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धर्मसभा:अध्यात्म के दर्पण में हम मन का श्रृंगार करने लग जाएं तो जीवन जीने की कला मिल जाएगी: प्रतीक सागर

दतिया12 दिन पहले
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  • सोनागिर में आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में मुनिश्री ने दिए श्रद्धालुओं को प्रवचन

दर्पण में देखकर हम तन का श्रृंगार तो रोज करते हैं मगर अध्यात्म के दर्पण में मन का श्रृंगार करने लग जाएं तो जीवन जीने की कला मिल जाएगी। जो जीने की कला सीख लेता है वह अपने समय, शक्ति और साधनों का दुरुपयोग जरा भी बर्दाश्त नहीं करता।

वह जिस क्षण इस सत्य को समझ जाएगा उसी क्षण से अपने जीवन को नया मोड़ दे देगा। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने शनिवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के तमाम धर्मों की पाठशाला है। हमारे देश के संविधान में जन-जन के कल्याण की भावना निहित है। राष्ट्र की मूलधारा से जुड़कर हम एक आदर्श नागरिक बन सकें, ऐसा प्रयास प्रत्येक नागरिक का होना चाहिए। हम ऐसा कोई भी कार्य न करें जो धर्म, समाज व राष्ट्र के कानून के विरुद्ध हो।

यदि हम एक रुपए के टैक्स की चोरी करते हैं या रिश्वत लेते हैं तो हमें पता होना चाहिए कि हम सिर्फ एक रुपए की ही चोरी नहीं कर रहे हैं अपितु हम देश के सौ करोड़ रुपए लोगों की भी चोरी का अपराध कर रहे हैं। यदि हम राष्ट्र की किसी भी सम्पत्ति को क्षति पहुंचाते हैं तो याद रखें हम अपने ही अस्तित्व को क्षति पहुंचा रहे हैं क्योंकि राष्ट्र के अस्तित्व से हमारा अस्तित्व भी जुड़ा है।

राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र प्रथम है, धर्म द्वितीय है और व्यक्ति तृतीय है। धर्म सभा के पहले मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज की संगीतमय आरती दीपों से की गई। मुनिश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजित किए जाएंगे।

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