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मनमानी:मेंटेनेंस के नाम पर रोज 4 से 5 घंटे कटौती फिर भी फॉल्ट होने से बार-बार बिजली गुल

दतिया5 दिन पहले
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  • महीने भर चलेगा मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती का सिलसिला, भीषण गर्मी में लोग परेशान

बिजली का दावा है कि वह शहरी क्षेत्र में उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली दे रही है। लेकिन हकीकत यह है कि लोगों को 18 से 20 घंटे ही बिजली मिल रही है। मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कंपनी चार से पांच घंटे बिजली सप्लाई बंद रखती ही है, इसके अलावा फाल्ट, लाइन बस्ट, ट्रांसफार्मर खराब आदि के लिए भी घंटों बिजली सप्लाई बंद रखती है। सवाल यह है कि जब लाइन मेंटेनेंस हो रहा है तो फिर लाइनें खराब क्यों हो रही हैं।

दैनिक भास्कर ने जब इसके पर्दे के पीछे की सच्चाई जानी तो सामने आया कि एक घंटे एक फीडर पर बिजली सप्लाई बंद रखने से औसत ढाई हजार यूनिट बिजली बचती है। इस लिहाज से हजारों यूनिट बिजली को एक दिन में लाइन बंद करके बचाया जा रहा है। वहीं बिजली उपभोक्ता गर्मियों के मौसम में असमय बिजली चली जाने से परेशान हो जाते हैं। बिजली कभी दिन में तो कभी रात में किसी भी समय चली जाती है। बता दें कि शहर में बिजली कंपनी के 18 फीडर लगे हुए हैं। इन फीडरों से साढ़े चार सौ ट्रांसफार्मर पर सौ किमी लंबी लाइनों में बिजली सप्लाई होती है। शहरी क्षेत्र के तकरीबन 25 हजार उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई मिलती है। सबसे ज्यादा लोड सिटी नंबर एक और उनाव रोड फीडर पर होता है।

सिटी नंबर पर शहरी क्षेत्र और उनाव रोड पर उद्योगिक मिल लगे होने से बिजली का अधिकार भार है और सबसे ज्यादा बिजली कटौती इन दोनों फीडर पर ही होती है। कभी फाल्ट के नाम पर तो कभी लाइन मेंटेनेंस के नाम पर। बिजली कंपनी साल में दो बार बिजली मेंटेनेंस करती है।

एक बार दीपावली त्योहार से पहले प्रतिदिन चार से पांच घंटे फीडरों को बंद रखकर लाइन मेंटेनेंस किया जाता है। जबकि दूसरी बार अप्रैल महीने में आंधी तूफान और बारिश के पूर्व। मेंटेनेंस इसलिए किया जाता है ताकि बरसात, आंधी, तूफान अथवा अन्य कारणों से लाइन बार-बार टूटे न और सप्लाई प्रभावित न हो। सवाल उठता है कि साल भर में दो बार मेंटेनेंस हो रहा है फिर लाइनें बार-बार खराब क्यों हो जाती हैं?
ऐसे समझिए बिजली कटौती की हकीकत

शहरी क्षेत्र में बिजली कंपनी 18 फीडरों से बिजली सप्लाई देती है। इन सभी फीडरों पर अलग-अलग लोड है। लेकिन एक घंटे में औसत ढाई हजार यूनिट एक फीडर पर बिजली खपत होती है। बिजली कंपनी मेंटेनेंस के नाम पर चार से पांच घंटे बिजली काटकर हजारों यूनिट बिजली बचाती ही है। साथ में फाल्ट और लाइन खराब होने के कारण कभी भी सप्लाई बंद कर भी हजारों यूनिट बिजली बचाती है। जब कंपनी की बिजली बचत का वार्षिक मूल्यांकन होता है तो कंपनी के अफसरों की पीठ थपथपाई जा सके।

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