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नपा की अनदेखी:लाला के ताल का पानी हुआ जहरीला, छोटी मछलियों की मौत से वातावरण में फैली दुर्गंध

दतियाएक महीने पहले
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विसर्जन के चार दिन बाद भी तालाब में उतरा रहीं मां दुर्गा की प्रतिमाएं।
  • सुबह रोज लग रही मंडी, दुर्गंध के कारण व्यापारियों और ग्राहकों का खड़ा होना मुश्किल

लाला के ताल का पानी गंदा होने के साथ जहर बनता जा रहा है। ताल का पानी हरा और जहरीला हो जाने से उसके अंदर पल रहीं मछलियों की मौत हो रही है। पानी में छोटी-छोटी मछलियां उतराने लगी हैं। वहीं घाटों पर जमी गंदगी और कचरा सड़ रहा है। खास बात यह है कि ताल के किनारे प्रतिदिन आठ से नौ घंटे मंडी लगती है। मंडी में करीब एक सैकड़ा थोक व्यापारी, पांच सौ से ज्यादा फुटकर सब्जी विक्रेता और शहर के लोग सब्जी खरीदने जाते हैं लेकिन बदबू के कारण ताल के किनारे एक मिनट खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। लेकिन नगर पालिका ने ताल के पानी की सफाई कराना तो दूर, घाटों की तक सफाई नहीं कराई है। पूरा तालाब गंदा नाला बनता जा रहा है।

शहर का लाला का ताल ही ऐसा ताल है जो कभी खाली नहीं होता है। अधिक बारिश में ताल ओवरफ्लो होता है तो छोटी पुलिया से पानी निकलकर ठंडी सड़क पर पहुंच जाता है। कभी भी ताल की सफाई नहीं हुई और न ही ताल कभी सूखा जिस कारण पूरा पानी गंदा तो हो ही गया, साथ ही काई जम गई और पूरा ताल हरा हो गया है। तालाब में लगातार बढ़ रही गंदगी के कारण अब लोग यहां नहाना तो दूर इसके पास खड़ा होना तक पसंद नहीं करते हैं। सुबह मॉर्निंग वाॅक पर जाने वाले लोगों ने भी अपना रास्ता बदल दिया है। ताल के किनारे लगीं लाइटें, पाथवे लोगों की आवाजाही बंद होने से शोपीस बनकर रह गई हैं।

ताल के किनारे लग रही मंडी, गंदगी से हैं परेशानी
कोरोना काल में लॉकडाउन लगने के बाद सब्जी मंडी को हाथीखाना से हटाकर लाल के ताल पर शिफ्ट किया गया था। सात महीने से लाल के ताल किनारे मंडी संचालित हो रही है। एक सैकड़ा बड़े व्यापारी यहां किसानों की सब्जियां खरीदते हैं और बेचते हैं। पांच सौ से ज्यादा फुटकर दुकानदार यहां थोक में सब्जी खरीदने आते हैं। इसके अलावा शहर के लोग भी थोक में सब्जी लेने जाते हैं। सुबह चार बजे से मंडी में सब्जियों की खरीदी शुरू हो जाती है और दोपहर 12 बजे तक मंडी संचालित होती है। लेकिन कुछ दिनों से ताल में बदबू फैलने के कारण व्यापारियों के साथ आमजन का मंडी में खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। गंदगी और बदबू से लोग परेशान हैं, नगर पालिका के अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे। प्रतिमा विसर्जन से लेकर लोग तालाब में गंदगी फेंक रहे हैं। ऐसे में तालाब की बर्बादी हो रही है।

पानी गंदा फिर भी ताजिया, जवारे और प्रतिमाओं का विसर्जन
लाला के ताल को गंदा करने के पीछे जितनी जिम्मेदार नगर पालिका है उतना ही शहर का आमजन भी है। ताल में फूल पत्तियां तो विसर्जित की ही जा रही हैं इसके अलावा मोहर्रम पर ताजियों का विसर्जन, डोल ग्यारस पर गणेश प्रतिमाओं, नवरात्र में देवी प्रतिमाओं और जवारे का विसर्जन किया जा रहा है। जिससे ताल का पानी लगातार गंदा हो गया। नगर पालिका विसर्जन के बाद सफाई कराना तो दूर सीढिय़ों और घाटों तक की सफाई नहीं कराती है। जबकि नगर पालिका के पास भारी भरकम सफाई अमला है।

प्रशासक के भरोसे नगर पालिका, देखने तक नहीं गए
नपा पिछले 10 महीने से प्रशासक के अधीन है। लेकिन प्रशासक सिर्फ दो बार ही नपा पहुंचे हैं। वह भी तत्कालीन कलेक्टर रोहित सिंह इसके बाद संजय कुमार और अब वर्तमान में बी विजय दत्ता नपा के प्रशासक हैं लेकिन वे भी एक बार नगर पालिका का निरीक्षण करने नहीं गए। प्रशासक का नपा पर नियंत्रण नहीं है इसलिए पूरी नपा भगवान भरोसे चल रही है।

ताल में मछलियों की मौत हो रही है, बदबू से परेशान हैं
ताल में मछलियों की मौत हो रही है और बदबू चारों तरफ फैल रही है। बदबू के कारण एक मिनट खड़ा होना मुश्किल होता है। लेकिन मंडी सात-आठ घंटे चलती है और इतनी देर बैठने से बीमार होने का डर है।
हीरा सेठ, थोक व्यापारी, सब्जी मंडी

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