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कार्यक्रम आयोजित:लक्ष्मीबाई ने जीते जी कभी अंग्रेजों की पराधीनता स्वीकार नहीं की: उपाध्याय

दतियाएक महीने पहले
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  • हिन्दू जागरण मंच ने मनाई महारानी लक्ष्मीबाई व माता जीजाबाई की पुण्यतिथि

रानी लक्ष्मीबाई एक वीर और साहसी महिला थीं। भले ही उनकी उम्र ज्यादा नहीं थी लेकिन उनके निर्णय हमेशा परिपक्व हुआ करते थे। जब अंग्रेजों ने झांसी पर आक्रमण कर दिया और रानी लक्ष्मीबाई को पराधीनता के लिए विवश किया तो उन्होंने अंग्रेजों की पराधीनता स्वीकार न करते हुए अंतिम सांस तक अंग्रेजों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। यह बात हिन्दू जागरण मंच के विभाग महामंत्री नरेंद्र उपाध्याय ने गुरुवार को बुंदेला कॉलोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में महारानी लक्ष्मीबाई एवं माता जीजाबाई के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बेटी बचाओ अभियान विभाग प्रमुख एवं जिला प्रभारी संजय दीक्षित ने माता जीजाबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वीर माता जीजाबाई छत्रपति शिवाजी की माता होने के साथ-साथ उनकी मित्र, मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी थीं। उनका सारा जीवन साहस और त्याग से भरा हुआ था। उन्होंने जीवन भर कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों को झेलते हुए भी धैर्य नहीं खोया और अपने पुत्र ‘शिवा’ को वे संस्कार दिए, जिनके कारण वह आगे चलकर हिंदू समाज के संरक्षक छात्रपति शिवाजी महाराज बने।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष रवि शर्मा ने की। कार्यक्रम को वीरांगना वाहिनी की जिला संयोजिका पूजा शर्मा, नगर संयोजिका रेखा सेन व प्रियंका गुप्ता ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन अनुज सिंह बुंदेला और आभार व्यक्त अंकित समाधिया द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संगठन के जिला उपाध्यक्ष पप्पी त्यागी, जिला मंत्री नीरज शर्मा, उदय परमार, प्रशांत सेन, शिवम दुबे, श्वेता गोरे, अंजली दीक्षित, सीमा कुशवाहा आदि शामिल रहे।

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