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अनदेखी:पांच साल में स्टेडियम पर 10 करोड़ से ज्यादा खर्च, हकीकत: खिलाड़ी कंकड़ लगने से हो रहे चोटिल

दतियाएक महीने पहले
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  • स्टेडियम को हरा -भरा करने के लिए पानी का छिड़काव नहीं, बाउंड्रीवाल फिर भी घुस अाते हैं मवेशी

स्टेडियम पर खेलों को बढ़ावा देने और खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए खेल विभाग पिछले 10 साल में 10 करोड़ से अधिक रुपए की राशि खर्च कर चुका है। क्रिकेट से लेकर हर एक खेल की सुविधा भी स्टेडियम में है, लेकिन स्टेडियम पर क्रिकेट के अलावा अन्य किसी खेल का अभ्यास चालू नहीं है। स्टेडियम के प्रांगण को देखकर दुर्दशा देखी जा सकती है। स्टेडियम प्रांगण में लगी प्राकृतिक घास तक सूख चुकी है। मैदान में कांटे और छोटे-छाेटे कंकड़ हैं।

जिससे सुबह और शाम के समय घूमने, क्रिकेट का अभ्यास करने वाले खिलाडी चोटिल हो जाते हैं। खास बात यह है कि स्टेडियम परिसर को हरा भरा करने के लिए न केवल निजी बोरवेल है बल्कि उसमें मोटरपंप भी है और नल कनेक्शन भी हैं लेकिन उसे चालू करके पानी छिड़कने का समय किसी के पास नहीं है। जबकि एक दिन छोड़कर पानी का छिड़काव करने से पूरा स्टेडियम हरा भरा हो सकता है।

मॉर्निंग वॉक के लिए भी आते हैं लोग
जिला मुख्यालय पर खेलकूद समेत अन्य गतिविधियों के लिए सिर्फ एक ही खेल मैदान अथवा स्टेडियम है। पहले यह सुरैइयन मैदान हुआ करता था लेकिन अब नई पीढ़ी इसे स्टेडियम के रूप में जानती है। पहले स्टेडियम में सिर्फ सीड़िया, नीचे हॉल और टीनशेड ही था और क्रिकेट खेलने की ही सुविधा थी। धीरे-धीरे सुविधाएं बढ़ती गईं और आज स्टेडियम में हर सुविधा है। लेकिन इन सुविधाओं का लाभ शहर की खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रही है। कोरोना काल में बिना बॉडी टच वालीं सभी खेल गतिविधियां चालू हैं। लेकिन स्टेडियम पर बने बॉस्केटबाल, बैडमिंटन वुडन कोर्ट के अंदर घास उग आई है। देखकर ऐसा लगता है जैसे सालों से अंदर झाड़ू लगाकर सफाई ही न की गई हो। जबकि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छोटे-छोटे बच्चे, युवा, बुजुर्ग स्टेडियम में मॉर्निंग वॉक के लिए जाते हैं।

साल में सिर्फ एक बार ही हरा-भरा होता है मैदान
स्टेडियम का विशाल मैदान साल में सिर्फ एक बार ही भरा होता है। बारिश के सीजन में जब बारिश शुरू हो जाती है तो सूखा और उजड़ा हुआ प्रांगण हरा भरा हो जाता है। जब बारिश खत्म हो जाती है तो इसे हरा भरा बनाए रखने के लिए पानी का छिड़काव नहीं होता है जिसके चलते घास सूख जाती है और कंकड़ पत्थर के साथ कांटे भी चुभने लगते हैं। वर्तमान में पूरा मैदान सूखा पड़ा है। धूल उड़ रही है।

स्टेडियम में हैं ये सुविधाएं...
स्टेडियम के अंदर क्रिकेट के खिलाड़ियों के लिए न सिर्फ विशाल खेल मैदान है बल्कि बैडमिंटन, टेबल टेनिस, जूडो, मलखंब, एथलेटिकक्स, बास्केट बाॅल की भी सुविधा है। लॉन टेनिस भी बना है। लोन टेनिस वर्ष 2018 तक चालू रहा। तत्कालीन कलेक्टर मदन कुमार, तत्कालीन एसपी इरशाद वली, एसडीएम वीरेंद्र कटारे समेत अन्य अफसर प्रतिदिन शाम को लोन टेनिस खेलकर पसीना बहाते थे, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद लॉन टेनिस बंद है। बास्केटवॉल, टेबल टेनिस समेत अन्य खेल गतिविधियां भी बंद हैं। सिर्फ क्रिकेट का अभ्यास ही चालू है। यही नहीं स्टेडियम पर इसी साल 2 करोड़ 45 लाख की लागत से स्टेडियम का उन्नयन, जिम हॉल एवं पवेलियन का उन्नयन हुआ।

सफाई कराकर पानी छिड़कवाएंगे
पीछे की तरफ सीढिय़ों के पास दो पेड़ हैं जो छाया के लिए लगे हैं। मैंने कर्मचारियों से कहा था कि उनकी सफाई करा दें। स्टेडियम का पूरा मैनेजमेंट राजेंद्र तिवारी देखते थे और वे काफी मेहनती भी हैं, लेकिन वे एक महीने से व्यस्त हैं। मैं खुद चुनाव ड्यूटी में रतनगढ़ पर हूं, स्टेडियम की सफाई कराकर पानी छिड़काव कराने के लिए संबंधित से कहूंगा।
अरविंद राणा, जिला खेल अधिकारी

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