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  • More Than Half Of The Buses Have Been Craving For Riders, Fare Has Also Been Increased By 40%, Auto Has Been Riding More Than The Capacity

बस सेवा:आधी से ज्यादा बसें सवारियों को तरस रहीं, किराया भी 40% तक बढ़ाया, ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारी भरकर दाैड़ा रहे

दतिया4 दिन पहले
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सेंवढ़ा बस स्टैंड... सिर्फ 12 सवारियां लेकर चल दी बस, एकाध के चेहरे पर था मास्क, फोटो खींचा तो मुंह ढंक लिया
  • जिले में पूरी तरह से शुरू नहीं हो पा रहा बसों का संचालन, खर्चा निकालने के लिए मनमाना वसूल रहे किराया

प्रदेश सरकार ने बस संचालकों का तीन माह का टैक्स माफ कर दिया। संचालकों को पूरी क्षमता के साथ बसें चलाने की छूट भी दे दी। बावजूद इसके जिले के रूटों पर अब तक 50 फीसदी ही बसों का संचालन शुरू हो सका। कारण बसों को सवारियों ही नहीं मिल रही। दूसरी ओर इन्हीं रूटों पर दौड़ रहे ऑटो ओवर लोड चल रहे है। कम सवारियां मिलने व खर्चा न निकल पाने के कारण बस संचालकों ने किराया भी 30 से 40 फीसदी बढ़ा दिया। हाल यह है कि बसों को सवारियों से भरने के लिए कंडेक्टर से लेकर बस चालक तक सवारियों से किराए को लेकर मोलभाव कर रहे है। ऐसा ही नजारा सेंवढ़ा बस स्टैंड पर देखने को मिला।

सभी रूटों पर सवारियों की समस्या
जिला मुख्यालय दतिया बस स्टैंड से कोरोना से पूर्व लगभग 120 बसें ग्वालियर, झांसी, शिवपुरी, सेंवढ़ा, भांडेर, उनाव व बड़ौनी के रूटों पर रवाना होती थी। वर्तमान में हाल यह है कि सभी रूटों पर मिला कर 40 से 50 बसें रवाना हो रही है। रूटों पर बसों का संचालन कम होने से सवारियां ऑटो से सफर कर रही है। जिससे बसों की स्थिति और अधिक खराब हो रही है।

सेंवढ़ा बस स्टैंड... सिर्फ 12 सवारियां लेकर चल दी बस, एकाध के चेहरे पर था मास्क, फोटो खींचा तो मुंह ढंक लिया
दोपहर 3 बजे। सेंवढ़ा बस स्टैंड पर झांसी, ग्वालियर व लहार जाने के लिए बसें लगी थी। कंडेक्टर के साथ क्लीनर आवाजें लगा रहे थे। सभी बसों में 8 से 10 सवारियां मौजूद थी। दैनिक भास्कर संवाददाता रमाशंकर नगरिया जैसे ही बस के पास पहुंचे तो चालक ने सवारी समझकर पूछा- कहां जाना है। ग्वालियर जाने व किराया पूछने पर बताया कि ग्वालियर के 120 रुपए लगेंगे। अंत में वह बोला 100 रुपए दे देना। 12 सवारियों को लेकर बस चल दी। तीन किलोमीटर के सफर के बाद 10 सवारी और जुड़ गई। एक दो को छोड़कर किसी के चेहरे पर मास्क नहीं था। संवाददाता ने जैसे ही फोटो खींचना चाहा तो कुछ लोगों ने मुंह ढंक लिया। बस में सफर कर रहे संतोष शिवहरे को कोरोना का कोई डर नहीं था।

शिवहरे कहते हैं कि हम खेत में काम करने वाले लोग हैं। सुबह ही इतना पसीना बहा चुके हैं कि कोरोना नहीं होगा। कोरोना एसी में रहने वालों की समस्या है। इसी दौरान कुछ लोगों ने अपने अपने जेब से सेनेटाइजर निकालकर हाथ साफ किए। पूछने पर चालक ने इशारा किया कि भगवान शिव की मूर्ति के बगल में सेनेटाइजर रखा है। स्थानीय बस संचालक भूरे पाठक कहते हैं कि लॉकडाउन से अब तक 20 रुपए लीटर डीजल बढ़ गया। बीमा राशि में कई गुना वृद्धि हो गई और सवारी नहीं है, ऐसे में बस चलाना केवल नुकसान का काम है। बस स्टैंड पर मौजूद लोगों ने बताया कि ग्वालियर दतिया , लहार आदि मिलाकर कुल 80 बसों का परिचालन होता था जो घटकर 15-20 रह गया है।

उनाव बस स्टैंड... बस में बैठी सिर्फ दो सवारियां, निजी वाहनाें से सफर कर रहे
मंगलवार की दाेपहर डेढ़ बजे दैनिक भास्कर संवाददाता पंकज शर्मा उनाव बस स्टैंड पहुंचे। यहां भांडेर से होते हुए बस उनाव पहुंची। यह दतिया जाएगी। बस में सिर्फ 2 सवारी बैठी हैं। कम सवारियां देख कर बस को स्टैंड पर लगा कर ड्रायवर भी नीचे उतर गया। काफी इंतजार के बाद जब सवारियां नहीं मिली तो बस तीन सवारियों के साथ ही रवाना हो गई। स्थानीय बस संचालक भज्जू राय कहते हैं कि सवारियां न मिलने के कारण लगातार घाटा हो रहा है। बसों के बीच काफी अंतराल होने के बाद भी सवारियां नहीं मिल रही। कोरोना काल में लोग निजी वाहनों से सफर करना सुरक्षित मान रहे हैं।

भांडेर बस स्टैंड... सवारियां कम इसलिए किराया ज्यादा
दाेपहर 1 बजे दैनिक भास्कर संवाददाता शाहिद कुरैशी बस पहुंचे। यहां भांडेर से बस दतिया जा रही थी। बस में कुल 12 सवारियां थी। यात्री बंटी पाल कहते हैं कि सवारियां कम होने के कारण सोशल डिस्टेंस तो हो रहा है। लेकिन बस संचालक किराया ज्यादा वसूल रहे हैं। बसों का किराया कम होना चाहिए।

ऑटो चलने के कारण नहीं मिल रहीं सवारियां
जिले में अभी 50 फीसदी बसें ही शुरू हो सकी। कारण ऑटो है। प्रशासन को ज्ञापन देकर कई बार ऑटो का हाईवे पर संचालन बंद कराने की मांग की, लेकिन सहयोग नहीं मिल रहा। बसों का सवारियां नहीं मिल रही। घाटे में चल रही है। इसलिए रूटों पर पूरी बसें नहीं चल पा रही। कोरोना के कारण लोग निजी वाहनों से भी सफर करना पसंद कर रहे है। उसका भी प्रभाव पड़ रहा है।
तुलसी मोटवानी, अध्यक्ष, जिला बस ऑपरेटर संघ ।

नहीं उठा आरटीओ का फोन, मैसज का भी ज
बस संचालकों द्वारा वसूले जा रहे मनमाने किराए को लेकर जिला परिवहन अधिकारी से उनके मोबाइल नंबर 8085972252 पर चर्चा करने का प्रयास किया तो 5 बार फोन लगाने के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उन्हें वाट्सएप पर मैसेज भी भेजा, लेकिन जबाब नहीं आया।

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