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  • Paddy Purchase Will Be Done After One Month On Support Price, Farmers Are Still In Need Of Money, So It Is Helpless To Sell At A Lower Price

परेशानी:समर्थन मूल्य पर एक माह बाद होगी धान की खरीद, किसानों को पैसों की अभी जरूरत इसलिए कम भाव में बेचना मजबूरी

दतिया8 महीने पहले
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  • धान का रकबा करीब दोगुना होने के बाद भी पिछले से पंजीयन आधे रह गए क्योंकि समर्थन की खरीद शुरू होने से पहले ही धान बेच देते हैं किसान इसलिए पंजीयन में भी रुचि नहीं

धान की फसल अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में मंडियों में आना शुरू हो जाती है, लेकिन प्रदेश सरकार हर साल नवंबर माह के दूसरे सप्ताह से समर्थन मूल्य पर खरीददारी शुरू करती है। इस बीच किसान रबी फसल के लिए खाद-बीज के इंतजाम के फेर में समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का पंजीयन होने के बाद भी मंडियों में कम भाव पर धान बेचने को मजबूर हैं। व्यापारी भी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। समर्थन मूल्य से पांच सौ रुपए तक सस्ती धान खरीदी जा रही है। हर साल देरी से समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी का नतीजा है कि जिले में धान का रकबा बढ़ने के बाद भी पंजीयन कराने वाले किसान उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच रहे हैं क्याेंकि जब तक खरीदी शुरू हाेती है तब तक किसान अपनी धान बेच चुके हाेते हैं।

जिले में समर्थन मूल्य पर सामान्य धान 1868 रुपए व धान ग्रेड ए 1888 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी जानी है। शासन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर गेहूं की कटाई से पहले यानि मार्च में ही शुरू कर देता है। जबकि धान की खरीद कटाई के 1 माह बाद शुरू करवाई जा रही है। चूंकि खरीफ की फसल की कटाई के तत्काल बाद ही रबी फसलों की बुबाई का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में किसानों को खाद बीज के लिए पैसों की जरूरत होती है।

इसी वक्त तीज त्योहार के साथ सगाई संबंध भी किसान करते हैं। पैसों की जरूरत को देखते हुए समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू न होने पर किसान मंडियों में धान लेकर पहुंचने लगता है। आवक अधिक होते ही व्यापारी मनमानी शुरू कर देते है। आक्रोशित किसान हंगामा करने के लिए मजबूर हो जाते है। यही कारण है कि इंदरगढ़ मंडी में पांच दिन में दो बार धान बेचने आए किसान हंगामा कर चुके है।

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  • ग्राम पचोखरा के कृषक नरेंद्र कुशवाहा भी डाक बोली के इंतजार में ट्रॉली पर बैठे मिले। नरेंद्र ने पचोखरा केंद्र पर पंजीयन कराया। उनका कहना है कि त्योहार आ गया है। सामान खरीदना है। खेतों की जुताई कराना है इसलिए पैसों की आवश्यकता है। इसलिए मजबूरी में यहां धान बेचने के लिए लाइन में लगे हैं। धान सस्ती जा रही है फिर भी बेच रहे हैं ताकि किसी तरह खर्च चले।
  • इंदरगढ़ मंडी में धान बेचने के लिए लाइन में लगे ग्राम भड़ौल के कृषक रामसेवक तिवारी ने पंजीयन कराया है। इसके बाद भी वे एक ट्रॉली धान बेचने के लिए मंडी पहुंचे। पूछने पर रामसेवक का कहना है कि धान की खरीदी एक महीने बाद शुरू होगी तब तक कौन इंतजार करेगा। खाद बीज तो अभी खरीदना है।
  • मंडी में एक ट्रॉली धान बेचने आए मुरगुवां के कृषक मानसिंह ठाकुर का कहना है कि उन्होंने मुरगुवां सोसायटी पर पंजीयन कराया है लेकिन खरीदी कब शुरू होगी कोई ठिकाना नहीं है। चना, मटर, गेहूं की बोवनी अभी होना है इसलिए पैसों का इंतजाम भी करना है। मंडी में 1200 रुपए धान बिक रही है उसके लिए भी व्यापारियों को मनाना पड़ रहा है।

धान का रकबा 41 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 70 हजार, पंजीयन पिछले साल की तुलना में कम हुए
साल 2019 में जिले में 41 हजार 268 हेक्टेयर में किसानों ने धान की फसल बोई थी। समर्थन मूल्य पर 15764 किसानों ने पंजीयन कराया था। इस साल जिले में 70 हजार हेक्टेयर में धान की फसल बोई है। लेकिन हैरानी कि इस बार पिछले साल की तुलना में सिर्फ 7381 किसानों ने ही पंजीयन कराए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जिले में धान की खरीदी हर साल एक महीने देरी से होती है। जबकि किसान रबी सीजन की बोवनी अक्टूबर महीने से ही प्रारंभ कर देते हैं।

व्यापारियों का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित किया जाएगा
उपमंडी इंदरगढ़ के व्यापारियों द्वारा धान की नियमित खरीददारी न करने, कम कीमत पर धान खरीदने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इस संबंध में व्यापारियों को मौखिक तौर पर समझाया जा चुका था। इसके अलावा उन्हें नोटिस भी दिया जा चुका है गुरुवार को इन व्यापारियों को अंतिम चेतावनी जारी की जाएगी। अगर व्यापारी बोली नहीं लगा रहा है तो इसके बाद इन पर मंडी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे व्यापारियों का क्रय विक्रय प्रतिबंधित किया जाएगा।
राम कुमार गुप्ता, सचिव, कृषि उपज मंडी समिति सेंवढ़ा

पांच दिन में दो बार हो चुका है हंगामा
पिछले साल धान 2400 रुपए क्विंटल मंडियों के अंदर बिकी थी। जबकि समर्थन मूल्य पर धान के रेट कम थे। किसानों को धान पर काफी फायदा हुआ था। इसलिए धान का रकबा अचानक बढ़कर सीधे 70 हजार हेक्टेयर में पहुंच गया। भारी मात्रा में धान की आवक होने पर व्यापारियों ने मनमानी शुरू कर दी। दतिया कृषि मंडी में जहां धान 1450 से 1550 रुपए तक बिक रही है तो वहीं इंदरगढ़ मंडी में 900 से 1300 के बीच बिक रही है। यही कारण है कि 9 अक्टूबर को इंदरगढ़ में किसानों ने कम रेट मिलने पर जाम लगा दिया था। एक दिन पहले व्यापारी आपस में झगड़ गए थे और तीन बजे के बाद खरीदी बंद होने से तीन किमी लंबा जाम लग गया था।

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