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कोरोना से बदलाव:नए भवन निर्माण में लोग वेन्टीलेशन के साथ ओपन स्पेस की कर रहे मांग, कोरोना काल से बदल रहा डिजाइन

दतिया13 दिन पहले
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  • पहले छोटे प्लाट वाले पूरे स्पेस पर कमरों को देते थे तवज्जो, अब ओपन स्पेस पर जोर

कोरोना संक्रमण व इसके कारण सवा साल में लगभग 4 माह के लॉक डाउन ने अब घरों को लेकर सोच बदल दी है। नए प्लाट लेकर घर बनवा रहे लोग डिजाइन चेंज करा रहे हैं। लोगों की डिमांड अब घर के बाहर ओपन स्पेश, हर कमरे में बेहतर वेन्टीलेशन व अटैच वॉश रूम की मांग प्रमुखता के साथ की जा रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में घरों के डिजाइन बदले नजर आएंगे।

नए व पुराने मकानों के नक्शा बनाने वाले आर्किटेक्चर रीतेश गंधी बताते है कि एक साल से मकान को लेकर लोगों की सोच बदल गई है। पहले छोटे प्लाट खरीदने वाले लोग अधिक से अधिक कमरे निकालने की डिमांड करते थे। लेकिन अब नहीं करते। अब लोग छोटे प्लाट में में ओपन स्पेश की मांग कर रहे है। कमरों में बेहतर वेन्टीलेशन के साथ हर कमरे में अटैच वॉश रूम की डिमांड भी की जा रही है। गंधी के अनुसार यह कोरोना के कारण हो रहा है।

जानें: मकान को लेकर क्यों बदल रही सोच...

बता दें कि सवा साल के कोरोना काल में दो बार लॉक डाउन लग चुका है। लगभग 4 माह लोग घरों से नहीं निकल सके। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों में ऑक्सीजन की कमी देखने को मिली। ऐसे में लोग ओपन स्पेश में पेड़ पौधे लगाने के साथ लॉक डाउन जैसी स्थिति में कुछ समय कमरों से हट कर खुले में व्यतीत करने के उद्देश्य से ओपन स्पेश की मांग कर रहे हैं।

कोरोना संक्रमित होने पर होम आइसोलेशन के दौरान शासन की गाइड लाइन थी कि संक्रमित मरीज का लैटबाथ अलग होना चाहिए। ऐसे में लोग हर कमरे के साथ अटैच वॉश रूम की डिमांड कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि रहने वाली जगह का वेन्टीलेशन अच्छा हो तो कोई भी संक्रमण कमरों में नहीं ठहरता। इसलिए हर कमरे में वेन्टीलेशन की मांग की जा रही है। गंधी के अनुसार सवा साल पहले तक छोटे या बड़े प्लाॅट के मालिक अधिक से अधिक कमरों की मांग करते थे। जो अब बालकनी और वेंटीलेशन के साथ अटैच लेटबाथ की मांग कर रहे हैं।

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