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पीएम आवास की लेटलतीफी:नहीं मिल रही पीएम आवास की किस्त, अधूरे मकानों पर त्रिपाल डालकर रह रहे गरीब

भांडेर22 दिन पहले
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  • अफसरों की लेटलतीफी से गरीब परिवारों के लोग हो रहे परेशान
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प्रधानमंत्री आवास योजना में अफसरों की लेटलतीफी की वजह से गरीब तबके के लोग परिवार के साथ खुले में रहने को मजबूर हैं। इससे उनकी सेहत भी बिगड़ रही है। बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। दो साल पहले नगर पंचायत द्वारा 484 परिवारों को कच्चे मकान के लिए प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे। लेकिन अब तक किसी का भी आवास पूरा नहीं बन सका। वजह किश्त। अब तक एक भी हितग्राही को पूरी किश्तें नहीं दी गई। जिससे हितग्राही अपने परिवार सदस्यों के साथ अधबने मकान में टीनशेड व तिरपाल डालकर खुले में गुजर बसर कर रहे हैं।  नगर पंचायत इंदरगढ़ में कुल 484 मकानों का निर्माण होना है। इसके लिए 2017-18 में डीपीआर तैयार की गई थी। डीपीआर में 484 परिवारों को शामिल किया गया। 2017 सितंबर महीने में सभी को मकान बनाने के लिए पहली किश्त के रूप में एक लाख रुपए दिए गए। रुपए मिलने के बाद लोगों ने अपनी झोपड़ी गिराकर काम शुरू करा दिया, लेकिन वह पैसे मकान की बुनियाद व कुछ दिवारें खड़ी करने में ही खत्म हो गया। अधिकांश लोगों का यह काम एक दो महीने यानि नवंबर दिसबंर तक पूरा हो गया था। बावजूद दूसरी किश्त के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कुछ समय पहले बड़ी मशक्कत के बाद लगभग 434 लोगों को दूसरी मिल सकी। शेष लगभग आधा सैंकड़ा लोगों को तब से अब तक दूसरी किश्त भी नहीं मिली है। जिसके कारण लाभार्थी अपने परिवार के साथ पिछले कई महीनों से खुले में सोने को मजबूर हो रहे हैं। किसी तरह से अधबने मकान में पॉलीथिन व टीनशेड आदि लगाकर रहने लायक किया गया। सर्दी व गर्मी तो लोगों ने जैसे तैसे निकाल ली, लेकिन बारिश उनके लिए मुसीबत बन गई है। बारिश के दिनों में मकान के अंदर घर गृहस्थी में आ रहा पानी मुसीबतें बढ़ा रहा है। हितग्राहियों का कहना है कि उनके पास रुपए नहीं है, नहीं तो वह मकान बना लेते। अब दूसरी किश्त या तीसरी किश्त मिलने के बाद ही दोबारा काम शुरू किया जा सकता। लेकिन किश्त कब तक मिलेगी, यह नहीं कहा जा सकता। जिम्मेदार अधिकारी भी सही जानकारी नहीं देते। जिससे लोग परेशान हैं।

दो केसों से जानें पीएम आवास के लिए कैसे परेशान हैं गरीब
1. वार्ड क्रमांक 1. में रहने वाले काशीराम अहिरवार अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ रहते हैं। बच्चे छोटे हैं। दो साल पहले आवास स्वीकृत होने के बाद झोपड़ी तोड़ दी थी। ताकि नया मकान बन सके। लेकिन आवास स्वीकृत होने के बाद निर्माण के लिए अब तक एक ही किस्त (साठ हजार रुपए) मिल सकी है। जिससे जिससे इन्होंने बड़ी मुश्किल से दिवारें खड़ी की हैं। लेकिन छत नहीं है। छाया के लिए मकान के ऊपर तिरपाल व पटिया डालकर काम चला रहा रहे हैं। गर्मी व सर्दी तो निकल गई, लेकिन बारिश में समस्या बड़ गई है। बारिश का पानी घर के अंदर जाता है। 

2. छेलबिहारी नामदेव निवासी सीटोला मोहल्ला में निवास करते हैं। फरवरी 2019 तक दो किस्त के रूप में दो लाख रुपए भुगतान हुआ है। दो लाख रुपए से लेटर का काम तो हो गया है, लेकिन प्लास्टर का काम रह गया है। बारिश के दौरान दीवाराें में पानी बैठता है। जिससे मकान कमजोर हो रहा है। वहीं मकान अंदर पानी आने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। घर में पत्नी के अलावा छोटे छोटे दो बच्चे हैं। दस साल का लड़का है, 14 साल की लड़की है। मकान ठीक से नहीं बना होने की वजह से सभी को एक ही कमरे में गुजर बसर करनी पड़ रही है। 

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