कल्ला अहिरवार हत्याकांड:मुख्य आरोपी के रिश्तेदार ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट बरामद, जांच में जुटी पुलिस

दतियाएक महीने पहले
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मुख्य आरोपी के रिश्तेदार ने लगाई फांसी - Dainik Bhaskar
मुख्य आरोपी के रिश्तेदार ने लगाई फांसी

कल्ला हत्याकांड मामले में फिर एक नया मोड़ आया है। जिसमें हत्याकांड के मुख्य आरोपी मंगल यादव के एक रिश्तेदार ने खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिजनों का आरोप है कि जिगना पुलिस इस मामले में उसे जबरदस्ती फंसा रही थी और दबाव बना रही थी। इसके अलावा 1 दिन पहले हत्याकांड में मारे गए कल्ला अहिरवार के कुछ साथियों ने मिलकर इनके घर पर मारपीट और तोड़फोड़ की थी। पुलिस और मृतक कल्ला के साथियों के दबाव में आकर वीरसिंह (60) ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।

ये है मामला
आत्महत्या करने वाले मृतक किसान वीरसिंह के बेटे हिम्मत यादव ने जानकारी में बताया कि कल्ला अहिरवार के कुछ साथी जिनमें अच्छेलाल राजपूत, पुष्पेंद्र राजपूत, रामेश्वर यादव, आलोक यादव, हरप्रसाद अहिरवार, महेंद्र यादव, आजाद और अन्य अज्ञात आरोपियों ने उनके घर पर आकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट कर तोड़फोड़ की थी। इधर दूसरी ओर पुलिस भी लगातार हम पर दबाव बना रही थी। इसी के चलते पूरा परिवार खेत में रहने लगे थे। पिछली रात परिवार वापस घर लौटा और पिता खेत पर ही रहे जब रात को 10 बजे उन्हें वह खाना देने गया तब तक वह ठीक थे। गुरुवार सुबह 6 बजे जब वापस खेत पर पहुंचा तो पिता पेड़ पर फांसी से लटके हुए थे।

मृतक के पास मिला सुसाइड नोट
मृतक वीर सिंह की जेब से एक सुसाइड नोट पुलिस ने बरामद किया है, जो एसडीओपी दीपक नायक ने जब्त कर लिया है। बताया जाता है कि सुसाइड नोट में कल्ला हत्याकांड से जुड़े आरोपियों के बेगुनाही को लेकर कुछ लिखा गया है। अभी पुलिस ने सुसाइड नोट स्पष्ट नहीं किया है।

रंजिश का पुस्तैनी मामला
बताया जाता है कि मृतक वीरसिंह के भाई पूर्व में इस रंजिश का शिकार हो चुके हैं। 3 महीने पहले कल्ला के परिजनों ने संजीव यादव की हत्या कर दी थी। इसके बाद पिछले 14 अक्टूबर को कल्ला की हत्या कर दी गई थी। इससे पहले 2013 में संजीव के पिता की भी हत्या रंजिश में की गई थी।

जिगना थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबाव बना रही थी। यह बात सही है। लेकिन किसी भी प्रकार के पैसे की कोई मांग नहीं कि गई थी। इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट भी लगा है, जिसकी कार्रवाई राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाती है। अभी तक एसडीओपी वहां पहुंचे ही नहीं है। मामले की विवेचना की जा रही है। इसके बाद ही केस दर्ज किया जाएगा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी अभी नहीं आई है।

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