अनदेखी / लाला के ताल में फैंक रहे सड़ी सब्जियां, जलकुंभी से तालाब का पानी और अधिक हो रहा दूषित

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  • नपा अिधकारी बोले- तालाब में गंदगी करने वालों पर करेंगे कार्रवाई, वास्तविकता: बेहाल तालाब
  • तालाब के पास से सब्जी मंडी हटे तो गंदगी से बच सके तालाब

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

दतिया. दतिया का तालाबों को शहर कहा जाता है। नपा की संपत्ति माने जाने वाले शहर के कुछ तालाब अगर अपना अस्तित्व खो चुके है, तो कुछ खोने की कगार पर है। जो बचे है वह नपा की अनदेखी का शिकार। हाल यह है कि अधिकांश तालाब वर्षों से जलकुंभी की चपेट में है। लाला के ताल एक मात्र तालाब है जो इससे मुक्त है। लेकिन इसको भी दूषित किया जा रहा है। तालाब के किनारे कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन से थोक व फुटकर सब्जी मंडी लगाई जा रही है। ऐसे में सब्जी विक्रेता सड़ी गली सब्जियां इसमें फैंक कर इसे दूषित कर रहे है। ऑन लॉक 2 शुरू हो चुका है। लेकिन तालाब से सब्जी मंडी को यथा स्थान शिफ्ट नहीं किया गया। जिससे समस्या बढ़ रही है। 
बता दें कि दतिया शहर के चारो ओर सीतासागर, करन सागर, राधा सागर, लक्ष्मण ताल, मुन्नी सेठ की तलैया, रामसागर बांध, नया ताल, तरन ताल मिला कर कुल 8 तालाबों ने घेर रखा था। कारण शहर पहाड़ी पर बसा है। ऐसे में तत्कालीन राजाओं ने जनता को दैनिक दिनचर्या के लिए पानी की समस्या न हो, समय समय पर तालाबों का निर्माण कराया। लेकिन जैसे ही शहर में नल जल योजना शुरू हुई। इनकी उपयोगिता कम होती गई। तालाब सिर्फ धार्मिक रीति रिवाजों के लिए रह गए। परिणाम इनकी अनदेखी भी शुरू कर दी गई। अनदेखी होते ही इनका अस्तित्व भी संकट में आ गया। 

अपने स्थान पर लगे सब्जी मंडी

सब्जी के थोक व फुटकर विक्रेता चाहते है कि अनलॉक 2 लागू हो चुका है। सभी बाजार भी खुल चुके है। ऐसे में सब्जी मंडी को भी पुराने स्थान यानि हाथी खाना के पास शिफ्ट किया जाना चाहिए। बता दें कि थोक सब्जी विक्रेताओं की हाथी खाने के पास दुकानें है। थोक विक्रेता रफीक राइन कहते है कि अगर आलू प्याज जैसी सब्जी बचती है तो उन्हें दुकान में रखने में सुविधा होती है। तालाब के किनारे से दुकान तक लाने ले जाने में समय के साथ मजदूरी के रूप में पैसों की बर्बादी होती हैं। 

जानें... वर्तमान में क्या हालात हैं तालाबों के...
राधा सागर तालाब समाप्त हो चुका है। लक्ष्मण ताल का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। राम सागर बांध के भराव स्रोतों पर अतिक्रमण हो जाने से इसका आकार सिकुड़ता जा रहा है। सीतासागर भी सिकुड़ कर तलैया के रूप में नजर आता है। शेष सीता सागर, करन सागर सहित अन्य तालाब इन दिनों जलकुंभी का शिकार है। जलकुंभी के कारण यह तालाब किसी उपयोग के नहीं बचे। स्थानीय लोग कई बार इनकी साफ सफाई की मांग कर चुके है। लेकिन नपा इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं।

मंडी में सब्जी विक्रेताओं ने लाला का ताल बनाया डस्टबीन

लाला के ताल का पानी गंदा है। लेकिन फिलहाल यह जलकुंभी से बचा हैं। कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन में आवश्यक वस्तुओं में शामिल सब्जी, फल के लिए लोग परेशान न हो। लोगों के बीच शारीरिक दूरी बनी रहे, इसलिए प्रशासन ने तालाब किनारे सब्जी, फल की थोक व फुटकर मंडी लगवाना शुरू कर दी। यहां सब्जी मंडी लगते ही जैसे ही किसी दुकानदार के पास कोई सस्ती सब्जी बचती है या थोक विक्रेता के पास सब्जी खराब हो जाती है तो उसने तालाब को डस्टबीन समझ कर इसमें  फैंकना शुरू कर दिया। जिससे तालाब का पहले से ही गंदा पानी और दूषित होने लगा। जिस पर न तो नपा का ध्यान जा रहा है और न ही इस पर प्रशासनिक अधिकारी ध्यान दे रहे है।

कर्मचारी तैनात करेंगे, गंदगी करने वालों पर कार्रवाई होगी
तालाब में सब्जियां फैंकने की जानकारी मिलने के बाद निरीक्षण किया था। सब्जी विक्रेताओं को हिदायत दी थी कि तालाब में सब्जी फैंकने पर कार्रवाई करेंगे। अगर फिर भी कोई सब्जी फैंक रहा है तो कर्मचारी तैनात कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। कोरोना मरीज मिलने के कारण सब्जी मंडी को पुराने स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया।
एके दुबे, सीएमओ, नपा दतिया

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