सीएमएचओ का अजीब आदेश:ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम होने पर ही लिया जाए सैंपल

दतिया6 महीने पहले
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दतिया में कोविड जांच केंद्र पर मंगलवार को भारी भीड़ थी। लेकिन नए आदेश का पता चलने से कम ही लोग आए। - Dainik Bhaskar
दतिया में कोविड जांच केंद्र पर मंगलवार को भारी भीड़ थी। लेकिन नए आदेश का पता चलने से कम ही लोग आए।
  • जान पर बन आएगी तभी लिया जाएगा कोरोना का सैपल, फीवर क्लीनिक पर जांच कराने पहुंचे लोगों को लौटाया, घट गई संख्या

सीएमएचओ के एक अजीब आदेश ने कोराना के लक्षण वाले मरीजों की मुसीबत बढ़ा दी है। सीएचएमओ डॉ. आरबी कुरेले ने मंगलवार को सभी फीवर क्लीनिक प्रभारियों को एक आदेश जारी किया।

इसमें उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 37.2 डिग्री यानि 98.96 से अधिक या ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम होने पर ही कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया जाए। आदेश में सर्दी, जुकाम, दस्त, हाथपैरों में दर्द होने जैसी स्थिति में कोरोना सैंपल लेने का जिक्र नहीं है।

ऑक्सीजन स्तर 94 से कम होने का मतलब फेफड़ों में संक्रमण होना माना जाता है। यानी आपकी जान खतरे में पड़ने तक सैंपलिंग नहीं होगी। बताया जा रहा है कि ऐसा आदेश जारी करने के पीछे कोरोना संक्रमितों की संख्या को कम दिखाना माना जा रहा है। दूसरी लहर में कोरोना स्ट्रेन बार-बार बदल रहा है। स्ट्रेन बदलने से लक्षणों में भी बदलाव आ रहा है। पहले तेज बुखार, गला सूखना जैसे लक्षण थे, लेकिन अब हाथपैरों में दर्द, डायरिया, पेट, आंख और सिर में दर्द भी कोरोना के लक्षण में शामिल हैं।

इन्ही लक्षणों के कारण फीवर क्लीनिकों पर कोरोना की जांच कराने वालों की कतारें लग रही हैं। इसी कारण संक्रमितों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। कोरोना संक्रमण को रोकने में असफल स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को तुगलकी फरमान जारी कर दिया है।

तुगलकी फरमान से जांच कराने वालों की होगी कमी
तुगलकी फरमान से कोरोना जांच कराने वालों की संख्या में तेजी से कमी आएगी। इससे संक्रमितों का आंकड़ा भी गिरेगा। लेकिन कोरोना दोगुनी रफ्तार के साथ बढ़ता रहेगा। बता दें कि 13 अप्रैल से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ना शुरू हुई और मंगलवार को सबसे ज्यादा 269 लोग पॉजिटिव पाए गए थे।

सैंपल कराने वाला हर दूसरा व्यक्ति पॉजिटिव मिल रहा है। मंगलवार तक 1215 लोग होम आइसोलेट थे जबकि 184 लोग कोविड वार्डों में भर्ती हैं। 50 से ज्यादा की मौत हो चुकी है। इनमें छह लोगों ने बुधवार को दम तोड़ दिया।

अपनी लापरवाही छिपाने की फिराक में स्वास्थ्य विभाग

कोरोना मरीज बढ़े तो प्रशासन ने लॉकडाउन लगाया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कोरोना संक्रमण फैलने का कारण बन रही है। इसके दो उदाहरण हैं। मुड़ियन का कुआं निवासी जगत शर्मा व बुन्देला कॉलोनी निवासी अनिल शर्मा। दोनों ने 22 अप्रैल को कोरोना जांच के लिए सैंपल दिया।

25 अप्रैल तक दोनों को कोई रिपोर्ट नहीं मिली। जगत से अधिकारियों से पूछा तो बताया गया कि रिपोर्ट निगेटिव होगी इसलिए कोई मैसेज नहीं आया। जगत चिंता मुक्त हो गए। लेकिन 26 अप्रैल को उनके मोबाइल पर पॉजीटिव होने का मैसेज आ गया। अनिल शर्मा के साथ भी यही हुआ, उन्हें 27 अप्रैल को मैसेज मिला।

अन्य के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। आमतौर पर दो दिन में रिपोर्ट आ जाती है। दो दिन में रिपोर्ट न आने पर लोग चिंता मुक्त होकर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने लगते हैं। लेकिन जब पॉजिटिव होने का पता चलता है तब तक देर हो चुकी होती है।

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