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मौसम:बीते साल 16 दिन कोहरे से ढंका रहा था शहर, इस बार सिर्फ दो बार, वह भी घना नहीं

दतियाएक महीने पहले
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  • कोहरा न होने से गेहूं की फसल में पानी अधिक लगेगा

सुबह से घना कोहरा न केवल सर्दी का अहसास बढ़ा देता है, बल्कि मौसम का आनंद भी देता है। बीते साल दिसंबर व जनवरी माह में 16 दिन घना कोहरा छाया रहा था। घना भी इतना कि दृश्यता 15 मीटर तक दर्ज की गई थी। लेकिन वर्तमान में चल रहे सर्दी के मौसम में कोहरा सिर्फ 1 दिन आया, वह भी कुछ समय के लिए दृश्यता भी 100 मीटर तक रही।

बर्फबारी के बाद भी कोहरा ने आने का कारण इस साल बारिश कम होने के साथ सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ के सिस्टम तो बने, लेकिन बारिश नहीं हुई। हवा व जमीन में नमी की कमी के कारण कोहरा नहीं आ रहा। जिसका प्रभाव रबी फसलों पर पड़ सकता है।

बता दें कि दिसंबर 2019 में 8 दिन व जनवरी 2020 में 8 दिन घना कोहरा रहा था। 15 जनवरी 20 को जिले में 47 मिमी बारिश भी दर्ज की गई थी। दिसंबर 2019 में कोहरा ने 12 दिसंबर को दस्तक दी थी। दिसंबर के अंतिम सप्ताह कोहरा में विदा हुआ था।

दिसंबर 2020 में भी 12 दिसंबर को कोहरे ने दस्तक दी। लेकिन इसके बाद गायब हो गया। 3 जनवरी को बूंदाबांदी के बाद 5 जनवरी को कोहरा आया। लेकिन घना नहीं। आमतौर पर जनवरी के अंतिम सप्ताह में कोहरा की संभावना कम रहती है। कोहरा व बारिश न होने से इस बार लोगों को सर्दी का सही आनंद नहीं मिल पा रहा।

क्या है कोहरा

कोहरा ठंडी व आद्र (नम) हवा से बनता है। जो जमीन के नजदीक ही रहता है। ऊपरी गर्महवा ठंडी हवा को जमीन के पास रखती है। ठंडी हवा जमीन से नमी लेकर कोहरा बन जाता है। आमतौर पर यह रात को सुबह छाता है। धूप निकलते ही हवा की नमी कम होने से कोहरा छंटने लगता है।

जानें, इस बार कोहरा क्यों नहीं पड़ा

मौसम केन्द्र ग्वालियर के वैज्ञानिक डॉ. सीके के उपाध्याय के अनुसार इस बार सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ के सिस्टम तो बने, लेकिन यह बरसे नहीं। बारिश न होने से हवा में जमीन में नमी न होने के कारण ठंडी हवाओं के बाद भी कोहरा नहीं छा पा रहा है।

कोहरा का फसलों पर क्या प्रभाव पड़ता है

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह के अनुसार कोहरा से फसल पर सीधा तो कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन कोहरा छाने से धूप कम निकलती है। कोहरा से फसल के पौधों को सीधी नमी मिलती है।

धूप कम निकलने से जमीन में नमी अधिक समय तक बनी रहती है। जिससे किसान को फसलों को कम पानी देना पड़ता है। दूसरी ओर अधिक समय तक धूप रहने व तापमान बढ़ने से फसलों में कीट व्याधि की संभावना बढ़ जाती है। मसलन हाल ही में चना में इल्ली का प्रकोप शुरू हो गया था। लेकिन तापमान में गिरावट के कारण यह थम गया।

धूप निकलते ही डेढ़ डिग्री बढ़ा था दिन का तापमान, रात में ठिठुरन

मंगलवार को दिन में तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान डेढ़ डिग्री बढ़कर 23.6 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान लगातार दूसरे दिन भी 10.6 डिग्री पर स्थिर रहा। बता दें कि सोमवार को अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री दर्ज किया गया था।

गुरुवार को दिन का पारा बढ़कर 25.9 तक पहुंच गया। हालांकि आगामी दिनों में मौसम साफ होने दिन में तापमान बढ़ने के साथ ही ठंड से राहत मिलेगी। जबकि न्यूनतम तापमान नीचे जाने की उम्मीद है जिससे रात में फिर से हाड़ कंपकंपा देने वाली ठंड शुरू हो जाएगी। वर्तमान में न्यूनतम तापमान बढ़ने से ठंड से राहत मिल रही है।

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