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  • The Contract Was Only For The Road, Without Permission, Baradari Was Also Built, The Department Could Not Even Take Approval In 9 Years.

निर्माण कार्य:अनुबंध सिर्फ रोड का था, बगैर अनुमति बारादरी भी बनवा दी, 9 साल में स्वीकृति तक नहीं ले पाया विभाग

दतिया19 दिन पहले
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धराशायी हुई बारादरी। - Dainik Bhaskar
धराशायी हुई बारादरी।
  • एमपीआरडीसी के पास न तकनीकी स्वीकृति न प्रशासकीय स्वीकृति के दस्तावेज

श्री पीतांबरा पीठ के सामने बनी बारादरियों का निर्माण बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना प्रशासकीय स्वीकृति के कराया गया था। मप्र रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआरडीसी) का अनुबंध सिर्फ झांसी चुंगी से सेंवढ़ा चुंगी तक टू लेन सड़क बनाने का था। लेकिन विभाग ने रोड के साथ-साथ बारादरियों का निर्माण भी करा दिया। लेकिन इसके निर्माण के नौ साल बाद भी विभाग इसकी स्वीकृति नहीं ले सका। स्थानीय अमले ने भोपाल स्वीकृति के लिए पत्र भेजा लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। यही नहीं जो बारादरी बनाई गई हैं वो महज शोपीस (सजावती स्ट्रक्चर) के रूप में थी। ठाेकर लगने पर बारादरी का यही हाल होना था। यह बातें जांच कमेटी की जांच पड़ताल में सामने आईं।

बता दें कि 24 मई को रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली की ठोकर से मां पीतांबरा के सामने दांये तरफ बनी बारादरी ढह गई थी। इसकी गहनता से जांच के लिए कलेक्टर संजय कुमार द्वारा अपर कलेक्टर एके चांदिल के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी, राजघाट, नगर पालिका और पीएचई कार्यपालन यंत्रियों की टीम गठित की थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने मौके पर जाकर सलामत खड़ी बारादरी, टूटी बारादरी, फाउंडेशन, नींव आदि को करीब से देखा। साथ ही एमपीआरडीसी से बारादरियों के निर्माण के संबंध में एमपीआरडीसी से दस्तावेज भी मंगाए।

दस्तावेज शनिवार को जांच टीम को प्राप्त हो चुके थे। लेकिन इन दस्तावेजों में बारादरियों को लेकर जो रिकार्ड भेजा गया है उसमें कुछ भी खास नहीं है। यहां तक कि प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति भी नहीं मिली। एमपीआरडीसी का अनुबंध सड़क बनाने वाली एजेंसी तोमर बिल्डर्स से सड़क निर्माण का ही था। बीच में बारादरियों का निर्माण भी तोमर बिल्डर्स से कराया गया। इसके बाद विभाग ने प्रस्ताव शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा। लेकिन वहां से नौ साल बाद भी स्वीकृति नहीं मिली। यही नहीं बारादरियों का सजावटी स्ट्रक्चर तो बनाया गया और स्ट्रक्चर सही भी पाया गया।

लेकिन जहां इस तरह के सजावटी स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं वहां हैवी वाहनों के आवागमन पर रोक रहती है। शहर के अंदर पीतांबरा पीठ के सामने हैवी वाहनों पर प्रतिबंध नहीं था। सिर्फ यात्री बसों, ट्रकों के आवागमन रोक थी। बांकी रेत से भरे ट्रेक्टर ट्रॉलियों के आवागमन पर प्रतिबंध नहीं था। यहीं कारण रहा कि ट्रैक्टर ट्रॉली की जरा सी ठोकर से पूरी बारादरी गिर गई। इसी तरह की ठोकर दूसरी बारादरी में लगने पर वह भी इसी तरह भरभराकर गिर जाएगी। जांच टीम ने पाया कि बारादरियों का निर्माण तो सही हुआ लेकिन उनका रखरखाव सही नहीं था। जांच टीम सोमवार को अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेज सकती है।

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