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  • The Nephew Told On The Phone Here Is A Bad Life From Hell, Uncle Said Son Don't Worry, Cut It Four five Days, Will Take It Home Soon ...

परेशानी :भतीजे ने फोन पर बताया- यहां नरक से बुरी जिंदगी है, चाचा बोला- बेटा चिंता मत कर, चार-पांच दिन काट ले, जल्दी घर ले जाएंगे...

दतिया2 महीने पहले
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  • कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड की हालत खराब है
  • संदिग्धों ने सीएमएचओ डॉ. एसएन उदपुरिया से भी शिकायत की
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कोरोना मरीजों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड की हालत खराब है। 10 दिन में टॉयलेट की सफाई होती है। पलंगों पर चादर नहीं बिछाए गए। गर्मी में पंखे भी नहीं चल रहे। वार्ड में रखे डस्टबिन कचरे से भरे हैं। आइसोलेशन में भर्ती संदिग्ध मरीजों का कहना है कि यहां तो नरक से बुरी जिंदगी जी रहे हैं... जाने किस पाप की सजा काट रहे हैं। संदिग्धों ने सीएमएचओ डॉ. एसएन उदपुरिया से भी शिकायत की। इस पर डॉ. उदपुरिया ने सफाई कर्मचारी को फटकार लगाई।  देश के सबसे ज्यादा संक्रमित शहरों से अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को स्वास्थ्य विभाग सीधे जिला अस्पताल भेजकर आइसोलेट कर रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह का कोरोना रूपी संक्रमण फैलने का खतरा न रहे। घर से दूर अस्पताल में भर्ती परिवार के लोगों से उनके परिजन मिलने आ रहे हैं और ढांढस बंधा रहे हैं। परिजन समझा भी रहे हैं और तसल्ली भी दे रहे हैं।  कुछ ऐसा ही दृश्य मंगलवार को आइसोलेशन वार्ड में भास्कर संवाददाता ने देखा। समरौली निवासी विवेक जाटव महाराष्ट्र के सांगली से ट्रक में बैठकर घर जा रहा था लेकिन बॉर्डर पर पुलिस ने उसे रोककर एंबुलेंस से अस्पताल भिजवा दिया। यहां उसे आइसोलेट कर दिया गया। देर रात वह अस्पताल में पहुंचा तो वह समझ रहा था कि अभी कुछ देर में डॉक्टर उससे घर जाने की कह देंगे। काफी देर इंतजार करने के बाद उससे डॉक्टर ने उसे ओपीडी के द्वितीय तल पर बने आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया और कहा तुम्हें सात दिन तक यहीं रहना है। इधर देर रात बेटा घर नहीं पहुंचा तो मां पिता चिंतित थे। आधी रात में विवेक ने घर फोन किया कि वह अस्पताल में है और यहां उसे 14 दिन के लिए भर्ती किया है। जहां के हालात अच्छे नहीं हैं गंदगी और अव्यवस्थाओं से परेशान है। इससे परिजन की चिंता और बढ़ गई। मंगलवार को सुबह गांव से विवेक का चाचा हरदयाल सिंह अस्पताल पहुंचा और खिड़की के बाहर से ही विवेक को समझाते हुए कह रहा था- विवेक बेटा चिंता नहीं करना... चार-पांच दिन और काट लो हम खाना पीना यही दे जाएंगे। चार-पांच दिन बाद तुम्हें घर ले जाएंगे। किसी बात की चिंता नहीं करना। अगर कभी किसी और चीज की जरूरत हो तो फोन कर देना। वैसे भी हम सुबह शाम तुमसे मिलने आते रहेंगे। चाचा हरदयाल सिंह ने अपने साथ आए युवक से विवेक को साबुन, तेल भी खरीदकर दिया ताकि वह कपड़े धो सके और स्नान आदि कर सके।

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