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लेटलतीफी और लापरवाही:जिन खजूर के पेड़ों से नाम ठंडी सड़क पड़ा, नाला निर्माण के लिए उन्हें ही काटकर फेंक दिया

दतियाएक महीने पहले
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  • पांच साल देरी से बन रही सड़क फिर भी हो रही सिर्फ खानापूर्ति

शहर में प्रशासन द्वारा पेड़ तो लगाए नहीं जा रहे, उल्टा निर्माण कार्यों के नाम पर उन पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर फेंका जा रहा है। ठंडी सड़क इसका ताजा उदाहरण है। पांच साल से ठंडी सड़क का निर्माण चल रहा है हैरानी कि सड़क तो बनकर तैयार नहीं हुई, उल्टा सड़क और नाला निर्माण के लिए करीब 50 से 70 साल पुराने पेड़ पौधे उखाड़कर फेंक दिए हैं। खास बात यह है कि इन पेड़ों की वजह से ही सड़क ठंडी रहती थी और इसलिए ही सड़क का नाम ठंडी सड़क पड़ गया। पेड़ काट दिए गए और अब ठंडी सड़क नाम की ही रह गई है। सड़क किनारे न पेड़ बचे हैं और न सड़क ठंडी रह गई है।

बता दें कि ठंडी सड़क दो दशक पहले शहर की सबसे सुंदर सड़क थी। सड़क के दोनों छोर पर प्राचीन दरवाजे बने हैं। दोनों दरवाजों के पास छोटे और बड़े फव्वारे भी राजशाही समय में बनवाए गए थे। ठंडी सड़क के दोनों किनारों पर खजूर के पेड़ और दोनों तरफ नहर बनी थी। दोनों तरफ की नहरों में पानी बहता था। नहर के पानी और पेड़ की छाया से ही सड़क ठंडी रहने लगी और इसका नाम ठंडी सड़क पड़ गया। दो दशक पहले यह शहर की सबसे ज्यादा सुंदर सड़क थी। शहर के लोग यहां सुबह और शाम के समय घूमने जाते थे। गुजरते वक्त के साथ लोगों ने सड़क के दोनों तरफ बनी नहरों पर कब्जा कर इमारतें बनाकर खड़ी कर दी हैं।

अतिक्रमणकारियों ने खजूर के बड़े-बड़े पेड़ भी धराशायी कर दिए। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री अधोसंरचना के तहत ठंडी सड़क को उत्कृष्ट सड़क बनाने के लिए नगर पालिका ने पीडब्ल्यूडी के अधीन इस सड़क को अपने अधीन लिया। तभी इसकी दुर्दशा शुरू हो गई। पांच साल से सड़क अधूरी पड़ी है। वर्तमान कलेक्टर संजय कुमार ने विशेष रुचि दिखाकर ठंडी सड़क के निर्माण में तेजी कराई तो निर्माण एजेंसी ने सड़क और नाला निर्माण के लिए दोनों तरफ लगे खजूर के पेड़ उखाड़ दिए और कुछ को बीच से काट डाला।

नष्ट कर दिए हरे भरे पेड़ पौधे, उजड़ा हुआ लगने लगा क्षेत्र
निर्माण एजेंसी को किसी भी तरह के निर्माण के लिए संबंधित विभाग से एनओसी लेना होती है। इसके बाद भी निर्माण शुरू किया जाता है। अगर पेड़ पौधे काटे जाना है तो वन विभाग से लिखित अनुमति लेना होती है और अनुमति इसी शर्त पर मिलती है कि आवश्यक होने पर ही पेड़ काटे जाएंगे और उनके स्थान पर दूसरे पौधे लगाए जाएंगे। यही नहीं केंद्र और मप्र सरकार पौधारोपण कराने के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाती है। लेकिन दतिया शहर में ठंडी सड़क पर हरे भरे पेड़ों को काटने से लोगों में आक्रोश है। जिम्मेदार अफसर एक बार भी ठंडी सड़क पर काटे जा रहे पेड़ों को देखने नहीं पहुंचे। यही हाल रहा तो एक दिन दतिया शहर वीरान सा नजर आने लगेगा।

कब्जा करने वालों को फायदा
ठंडी सड़क के दोनों तरफ प्राचीन नाला है। निर्माण एजेंसी को इसी नाले पर पक्का नाला बनाना था। लेकिन निर्माण एजेंसी ने प्राचीन नाले को छोड़कर अतिक्रमणकारियों को सुरक्षित बचाकर पक्का नाला सड़क के किनारे जहां खजूर के पेड़ लगे थे उन्हें काटकर बना दिया। यही नहीं उत्कृष्ट विद्यालय के सामने पहले से ही नाला बना है, उसे छोड़कर दूसरा नाला बना डाला।

पेड़ लगाने की जगह नपा अफसर पेड़ कटवा रहे हैं
सरकार पर्यावरण को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। समाजसेवी शहर में जगह जगह पौधरोपण कर रहे हैं वहीं नपा के जिम्मेदार अधिकारी हरे भरे पेड़ कटवा रहे हैं। अधिकारियों को बहुत पुराने हरे भरे पेड़ नहीं कटवाना चाहिए।
जीतू, निवासी दतिया

मुझे जानकारी नहीं है अगर पेड़ काटे गए हैं तो पौधरोपण किया जाएगा
कहां पेड़ काटे गए हैं मुझे जानकारी नहीं है। अगर शहर के विकास के लिए पेड़ों काटना आवश्यक रहा होगा इसीलिए काटे गए होंगे। हम इसकी भरपाई के लिए पौधरोपण कराएंगे।
एके दुबे, सीएमओ नपा दतिया

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