परेशानी:लाला के ताल की सफाई के लिए नपा पर कोई योजना नहीं, दिनों दिन गंदा होता जा रहा पानी

दतिया13 दिन पहले
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  • लाला के ताल में नौका विहार शुरू करने की तैयारी में नपा, सफाई पर ध्यान ही नहीं, पूरा पानी हरा हो गया
  • इन तीन वजहों से गंदा हुआ लाला के ताल का पानी

शहर के प्रमुख तालाबों में शामिल लाला का ताल का पानी दिनों दिन गंदा होता जा रहा है। पूरे ताल में काई (चोई) फैल गई है और पानी हरा हो गया है। अब जानवरों के पीने लायक भी नहीं बचा है। पानी के गंदे होने से जलीय जीव जंतुओं खासकर मछलियों के लिए खतरा पैदा हो रहा है। खास बात यह है कि तीन साल पहले तालाब की छोटी-छोटी मछलियां बड़ी तादाद में मर गई थीं और अब फिर से वही स्थिति पैदा होने की आशंका है। यह नहीं तालाब के गंदे पानी से महामारी का खतरा भी बढ़ गया है।

नगर पालिका न तो तालाब को खाली करा रही है और न ही तालाब की साफ सफाई पर ध्यान है। नगर पालिका लाला के ताल में नौका बिहार शुरू करने की योजना तो बना रही है लेकिन तालाब के गंदे पानी की सफाई अथवा पानी को साफ करने के लिए अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है। बता दें कि शहर में आधा दर्जन प्राचीन तालाब हैं। वर्तमान में ये सभी तालाब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। कहीं पर अतिक्रमण हो गया तो कहीं तालाब को मिट्‌टी भरकर पूर दिया है।

शहर के सबसे बड़ा ताला सीतासागर में चारों तरफ अतिक्रमण हो गया है और वर्तमान में जलकुंभी की चपेट में है। इसी तरह करनसागर तालाब का भी यही हाल है। लक्ष्मण ताल में मकान बन गए हैं और अब यह ताल पोखर बन रह गया है। लाला के ताल अतिक्रमण की चपेट में नहीं है लेकिन पानी इतना गंदा हो गया है कि पास खड़े होने पर दुर्गंध का सामना करना पड़ता है।

इस तालाब में वाटर स्पोर्टस भी है और अब नगर पालिका इस तालाब में नौका बिहार भी शुरू कर रही है। लेकिन तालाब की सफाई को लेकर काेई प्लान नहीं बनाया गया है। तालाब में ताजिया विसर्जन, प्रतिमाएं विसर्जन और जवारे विसर्जन होते हैं। लेकिन तालाब में सफाई कभी नहीं होती है।

कारण 1- शहर की आधी आबादी का गंदा पानी रिसाला मंदिर, रर के पास इमलीपुरा के रास्ते होते हुए सीधे तरनताल में पहुंचता है जिससे तरनताल का पानी गंदा हो गया और इसी तरनताल के जरिए पुलिया से निकलकर गंदा पानी लाला के ताल में पहुंचता है जिससे लाला का ताल का पानी गंदा हो गया है। तरनताल जलकुंभी की चपेट में है और अब जलकुंभी लाला के ताल में पहुंच रही है जिससे इस ताल में भी जलकुंभी फैल रही है।

कारण 2- वर्ष भर की दोनों नवरात्र में इस तालाब में जवारे विसर्जित किए जाते हैं। इसके अलावा मोहर्रम पर बुर्राकें और ताजिए भी इसी तालाब में ठंडे होते हैं। शारदीय नवरात्र में दुर्गा प्रतिमाएं और डोल ग्यारस पर गणेश प्रतिमाएं विसर्जित होती हैं। जिससे घास फूस इसी में सड़ते हैं। शहर भर के लोग इसी तालाब में पूजन सामग्री मय पॉलिथीन के फेंकते हैं। इसलिए भी तालाब का पानी गंदा हो रहा है। तालाब कभी खाली नहीं हुआ और इसी में जमा होता रहता है। इसलिए पानी हरा हो गया है।

कारण 3- कोरोना काल में सात महीने तक सब्जी मंडी हाथी खाना से हटाकर लाला के ताल पर ही लगाई गई। इन सात महीनों में करीब डेढ़ सौ थोक और फुटकर सब्जी विक्रेताओं ने लाला के ताल पर सब्जी की दुकानें सजाईं। कोरोना काल में जब सब्जियां कोड़ियों के भाव पर आ गई थीं तब व्यापारियों ने बची व सड़ीं सब्जियां तालाब में ही फेकीं। सात महीने तक लगातार खराब सड़ी हुईं सब्जियां तालाब में फेंकी गईं जिससे तालाब गंदा हो गया।

शहर का प्रमुख तालाब है लाला का ताल
लाला का ताल सतखंडा महला के ठीक पीछे बना है। चारों तरफ सड़क मार्ग है। पहाड़ी भी है इसलिए इस लिहाज से तालाब पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। तीन साल पहले तक शहर के अधिकांश लोग इसी ताल में स्नान करने आते थे। तालाब के किनारे बने घाटों बैठकर नहाते थे। तालाब पर वाटर स्पोर्टस भी बना है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग तालाब के किनारे घूमने भी जाते हैं। सुबह और शाम के समय तालाब पर लोगों की चहल पहल ज्यादा रहती है। रात में तालाब किनारे लगीं लाइटें भी जलने लगती हैं। गर्मियों के मौसम में ज्यादा भीड़भाड़ देखी जाती है।

घाटों की तक सफाई नहीं करा सकी नपा
नगर पालिका जहां सीतासागर तालाब को सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है। लेकिन फिर भी घाट गंदे हैं। घाटों की सफाई कराने भर से घाटों पर फैल रही दुर्गंध खत्म हो जाएगी। तरनताल से आ रहे गंदे पानी को रोकना भी आवश्यक है। इस नाले के रुकने से तालाब में गंदा पानी आना बंद हो जाएगा। बारिश में जब तालाब ओवरफ्लो होगा तो गंदा पानी निकल जाएगा। इसके बाद स्वच्छ पानी भर जाएगा।

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