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आजादी का अमृत महोत्सव:बांस के पेड़ लगा फसलों की सुरक्षा के साथ उन्हें बेच आमदनी भी ले सकते हैं

दतिया11 दिन पहले
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मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान केंद्र पर किसानों ने किया भ्रमण। - Dainik Bhaskar
मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान केंद्र पर किसानों ने किया भ्रमण।
  • एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण का किया गया आयोजन

आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत गत दिवस भारतीय मृदा एवं जल सरंक्षण संस्थान अनुसंधान केन्द्र दतिया पर भारतीय चारा एवं चरागाह अनुसंधान संस्थान झांसी द्वारा प्रायोजित उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के 31 किसानों को मृदा एवं जल सरंक्षण तकनीकियों के बारे में प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर केन्द्राध्यक्ष डॉ. आरएस यादव ने मृदा एवं जल सरंक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की तथा किसानों को केंद्र द्वारा सुझाई गईं तकनीकों को अपनाकर मिटटी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

झांसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने घासों द्वारा मृदा एवं जल सरंक्षण के बारे में बताया। काफरी, झांसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरपी द्विवेदी, भारतीय चारा एवं चरागाह अनुसंधान संस्थान झांसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुनील सेठ एवं डॉ. एसके सिंह ने भी किसानी की आय बढाने तथा परिवार पोषण सुरक्षा के लिए जानकारियां दी।

केंद्र के डॉ. दिनेश कुमार ने मृदा एवं जल सरंक्षण की विभिन्न शस्य तकनीकी के बारे में जानकारी दी। डॉ. दिनेश ने आगे बताया कि बुंदेलखंड के किसान भाई बांस आधारित सजीव बाड़ खेतों की बाउंड्री पर अपनाकर अपनी फसलों को बचा सकते हैं तथा हर वर्ष बांस के कुछ डंडे बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी कर सकते हैं। बांस सजीव बाड़ के साथ साथ आज के परिवेश में पर्यावरण सुरक्षा में बहुत बड़ा योगदान देगी।

केंद्र के लखन लाल एवं अनिल दोहरे ने अनुसंधान फार्म पर किसानों को आवला आधारित कृषि वानिकी एवं बांस की सजीव बाड़ का भ्रमण कराया। इससे पहले केंद्र के बीडी कुशवाहा एवं गौतम सिंह ने किसानों का पंजीकरण किया और केंद्र की विभिन्न गतिविधियों की एक विडियो फिल्म भी दिखाई। इस प्रशिक्षण में सतेन्द्र त्रिपाठी एवं प्रतीक श्रीवास्तव भी शामिल रहे।

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