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अनदेखी:52 गांवाें में खारे पानी की समस्या 3 किमी दूर से साइकिल से ढो रहे

गोहद10 महीने पहले
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  • वर्ष 2006 में 50 करोड़ रु. से नल-जल योजना बनाई, लेकिन समस्या बरकरार
  • इन गांवों में पीएचई विभाग के अधिकारी जाते तक नहीं

गोहद क्षेत्र के 52 गांव आज भी खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इन गांवों में वर्ष 2006 में शासन ने पीएचई के माध्यम से 50 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री नल-जल योजना की शुरुआत की थी। इसके साथ ही खारे पानी के शुद्धीकरण को लेकर फिल्टर प्लांट स्वीकृत किए गए थे। लेकिन पिछले 14 साल बीत जाने के बाद भी इन गांवों में खारे पानी का संकट बरकरार है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण रोजाना दो से तीन किमी तक पैदल चलकर ट्यूबवैल से पानी भरने के लिए जाते हैं। खास बात तो यह है कि इन गांवों में पीएचई विभाग के अधिकारी कभी झांकने तक के लिए नहीं पहुंचते हैं।  गौरतलब है कि शासन द्वारा सर्वा, देहगांव, केशवपुरा, अंसौली, महुरी, हरनामपुरा, खरौआ, माधौगढ़, सिलौहा, हवीपुरा, नेनौली, सिथौली, धूमरी, देहगांव, रतवा, चितौरा, एंडोरी, खनेता, टूटीला, मालनपुर, बरथरा सहित क्षेत्र के कुल 52 गांवों में खारे पानी की समस्या को खत्म करने के साथ ग्रामीणों को मीठा पानी उपलब्ध हो सके।  इसके लिए मुख्यमंत्री नल-जल योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत इन गांवों में काम तो शुरू हुआ था,लेकिन जो पिछले 14 साल में पूरा नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि कुछ गांव में पीएचई विभाग ने बोर तो करा दिए, लेकिन उनको चालू नहीं किया है, वहीं कुछ गांव में अभी तक पानी की पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। वहीं विभाग द्वारा सरकारी कागजों में नल-जल योजना का चालू होना बताया दिया।

दो से तीन किलोमीटर दूर से ग्रामीण लाते हैं पानी
निबरोल निवासी धीरज योगी, चितौरा निवासी निहाल सिंह राणा, मालनपुर निवासी आदित्य दुबे आदि बताते हैं कि आधुनिक भारत में आज भी गोहद क्षेत्र इन 52 गांवों के ग्रामीण रोजाना मीठे पानी के लिए गांव के बार दो से तीन किलो मीटर दूर ट्यूबवैल पर पानी भरने के लिए जाते हैं। वहीं किसी गांव में अगर सौभाग्य से कुआं या हैंडपंप में मीठा पानी निकल आए तो पूरा गांव व्याकुल हो जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार मीठा पानी कुओं से निकला है, लेकिन कुछ समय पश्चात वह भी खारा हो गया। योजना चालू न होने को लेकर हमारे द्वारा प्रशासन के उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
मुझे जानकारी नहीं
52 गांवों में मीठे पानी के लिए योजना कब शुरू हुई इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। योजना क्यों बंद है इस बारे में पता करूंगा।
बीआर जर्मन, एसडीओ, पीएचई, गोहद

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