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दवाओं की किल्लत:रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की मांग बढ़ी तो प्रिंट रेट से ज्यादा में बेच रहे

गोहद13 दिन पहलेलेखक: रिंकू कटारे
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मेडिकल के उपकरण भी हुए महंगे, 800 का ऑक्सीमीटर मिल रहा 2 हजार रुपए में। - Dainik Bhaskar
मेडिकल के उपकरण भी हुए महंगे, 800 का ऑक्सीमीटर मिल रहा 2 हजार रुपए में।
  • विटामिन सी, जिंक, पेरासिटामोल सहित अन्य दवाएं गायब होने लगी
  • ऑर्डर देने के 15 से 20 दिन में मेडिकल स्टोर पर पहुंच रही हैं दवाएं इसलिए हुई कमी

गोहद नगर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के चलते मेडिकल स्टोर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की किल्लत शुरू हो गई है। स्थिति यह है कि बाजार में मेडिकल स्टोर से विटामिन सी, जिंक, एजिथ्रोमाइसिन, पेरासिटामोल सहित अन्य दवाएं गायब होने लगी हैं। वहीं जिन दुकानों पर यह दवाएं मिल रही है तो लोगों दवाओं के दाम प्रिंट रेट से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि कोरोना को हराने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना आवश्यक है। वर्तमान समय में लोग अपने शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। खपत बढ़ जाने से दवाएं बाजार से गायब होने लगी हैं। नगर के मेडिकल स्टोर संचालकों ने बताया कि विटामिन सी और जिंक सहित अन्य दवाइओं की ऊपर से ही सप्लाई समय पर नहीं हो रही है। जिस दिन हमारे द्वारा दवाओं का आर्डर लगाया जाता है। उसके 15से 20 दिन बाद माल पहुंच रहा है। वहीं इन दवाओं की विक्री अधिक है।

लोग घरों में कर रहे हैं दवा का स्टोरः नगर के मेडिकल स्टोर संचालक बताते हैं कि एक तरफ तो ऊपर से ही ऑर्डर लगाने के बाद दवाएं समय पर नहीं आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर लोग भी बड़ी तादाद में लिम्सी, जिंक, जिनको पिट, डोकसी एलबी सहित अन्य रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं को खरीदकर घर में स्टोर कर रहे हैं। इस कारण से भी दवाओं की मार्केट में कमी आई है। इसके पीछे मूल कारण यह है कि लोगों को डर है कि कहीं शासन पूरी तरह से लॉकडाउन न लगा दे। जिसमें मेडिकल स्टोर भी बंद हो जाएं।
प्रिंट रेट से अधिक में दवा न लें; जिला मेडिकल एसोसिएशन अध्यक्ष प्रवीण जैन का कहना है कि मेडिकल स्टोर पर अगर प्रिंट रेट से अधिक में दुकानदार कोई दवा बेच रहा है तो लोग उसको न खरीदें। साथ ही इस संबंध में विभागीय अधिकारी को सूचित करें। वहीं भिंड में दवाओं का स्टॉक इंदौर से आता है। लेकिन वहां पर अधिकांश कर्मचारी कोरोना संक्रमित होने से ऑर्डर समय पर नहीं लग पा रहे हैं। इस कारण से दवाओं की कमी बाजार में हुई है। जल्द ही स्थिति सामान्या हो जाएगी, लोग चिंतित नहीं हों।

संक्रमण काल में भी कुछ लालची दुकानदार कालाबाजारी में जुटे; संक्रमण काल में कुछ दुकानदारों ने कालाबाजारी शुरू कर दी है। दवाओं के साथ मेडिकल उपकरण भी महंगे हो गए हैं। इससे गरीब लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टीम मशीन पहले 100 से 150 में मिल जाती थी, लेकिन वर्तमान में यह 350 से 400 रुपए में मिल रही है। बीपी मशीन वर्तमान में 1600 रुपए और नेबुलाइजर मशीन 800 की जगह 2200 रुपए में मिल रही है। हालांकि दुकानदारों का कहना है उन्हें ही उपकरण महंगे मिल रहे हैं, इसलिए महंगा बेचना पड़ रहा है।

प्रिंट रेट से अधिक में मिल रही हैं ज्यादातर दवाएं; सोमवार को मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे गोहद निवासी कैलाश नारायण सिंह, मोहित दौहरे, विक्रम सिंह ने बताया कि एलोपैथी दवाओं में विटामिन सी बढ़ाने के लिए लिम्सी जैसी टेबलेट कारगर है कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने से पहले लिम्सी टेबलेट का 15 गोलियों का पैकेट 23 रुपए में आसानी से उपलब्ध था। लेकिन वर्तमान में है 25 से 26 रुपए का मिल रहा है। वहीं एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट की पांच गोली 118 रुपए में मिलती थी, अब 150 रुपए में मिल रही हैं। इस प्रकार जिंक, जिनको पिट, डोकसी एलबी दवाएं भी प्रिंट रेट से अधिक में मिल रही हैं। इसके अलावा पहले ऑक्सीमीटर 800 रुपए में आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब यह कुछ ही दुकानों पर मिल रहा है वो भी 1800 से 2 हजार रुपए में।

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