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अनदेखी:चार साल पहले 36 लाख की लागत से बनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला पर ताला

गोहद7 दिन पहले
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गाेहद में चार साल पहले बनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में ताला लगा हुआ है। - Dainik Bhaskar
गाेहद में चार साल पहले बनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में ताला लगा हुआ है।
  • गोहद में बनाई मिट्‌टी परीक्षण लैब, न मशीनें न स्टाफ, किसान परेशान

एक तरफ सरकार खेती को लाभ के व्यापार में बदलने की बात कर रही है। वहीं दूसरी ओर गोहद नगर में चार साल पहले बनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला स्टाफ व मशीन न लगने के कारण चालू नहीं हो पा रही है। जबकि 36 लाख रुपए खर्च कर प्रयोगशाला बनाई गई। लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। किसानों को खेती की मिट्टी परीक्षण के लिए भिंड और ग्वालियर जाना पड़ता है।

वहीं गोहद से भिंड की दूरी अधिक होने से क्षेत्र के अधिकांश किसान जिला मुख्यालय न आकर मिट्टी परीक्षण के लिए ग्वालियर जाना पसंद करते हैं। इसके अलावा गोहद क्षेत्र के किसानों ने कई बार मिट्टी परीक्षण केंद्र पर कर्मचारी व मशीन लगाकर चालू कराने की मांग की। लेकिन इस ओर कृषि अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में कृषि विभाग द्वारा 36 लाख रुपए की लागत से मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी बाद भी परीक्षण केंद्र शुरू नहीं हो पाया है। किसान मिट्टी परीक्षण के लिए परेशान हो रहे हैं। क्षेत्र के 80 हजार से अधिक किसान मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला शुरू न होने के कारण इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

प्रयोगशाला में मिट्‌टी में पाए जाने वाले इन तत्वों की होती हैं जांच
पौधों की समुचित वृद्धि एवं विकास के लिए सर्वमान्य रूप से सोलह पोषक तत्व आवश्यक पाए गए है । यह अनिवार्य पोषक तत्व है। कार्बन,हाइड्रोजन, आक्सीजन, नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश,कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर ( मुख्य या अधिक मात्रा मे लगने वाले आवश्यक पोषक तत्व )इन पोषक तत्वों मे से प्रथम तीन तत्वों को पौधे प्राय:वायु व पानी से प्राप्त करते है तथा शेष 13 पोषक तत्वों के लिए ये भूमि पर निर्भर होते है। सामान्यत:ये सभी पोषक तत्व भूमि में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रहते हैं। लेकिन खेत में लगातार फसल लेते रहने के कारण मिट्टी से इन सभी आवश्यक तत्व निरंतर कम हो रहे है।

असंतुलित पौध पोषण की दशा में फसलों की वृद्धि समुचित नहीं हो पाती तथा पौधों के कमजोर होने एवं रोग व्याधि, कीट आदि से ग्रसित होने की संभावना अधिक रहती है। परिणामस्वरूप फसल उत्पादन कम होता है इसके अतिरिक्त उर्वरक भी काफी महंगे होते जा रहे है। अत: इन पोषक तत्वों को खेत में आवश्यकतानुरुप ही उपयोग करना जिससे खेती लाभदायक बन सकती है। खेतों में उर्वरक डालने की सही मात्रा की जानकारी मिट्टी परीक्षण द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। अत: मिट्टी परीक्षण उर्वरकों के सार्थक उपयोग एवं बेहतर फसल उत्पादन के लिए बहुत आवश्यक है।

नहीं आईं मिट्टी परीक्षण करने वाली मशीनें
प्रयोगशाला की इमारत बनकर चार साल पहले तैयार हो चुकी है। लेकिन तैनात होने वाला स्टाफ और मशीनों की आपूर्ति अभी तक यहां नहीं हुई है। भवन का उपयोग शुरू करने से पहले परीक्षण के लिए मशीनें जरूरी हैं, जो अभी तक नहीं रखी गईं हैं। जिससे मिट्टी परीक्षण का कार्य कर सकें।

किसानों को जाना पड़ता है भिंड और ग्वालियर
गोहद क्षेत्र से 88 ग्राम पंचायतों से 80 हजार से अधिक किसानों की आबादी जुड़ी हुई है। इन सभी किसानों को मिट्टी परीक्षण के लिए ग्वालियर और भिंड जाना पड़ता है। जिसमें किसानों को धन और समय दोनों नुकसान होता है । किसानों की समस्या को लेकर कृषि विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उप संचालक को सुपुर्द की
मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को निर्माण के बाद कृषि उप संचालक को सुपुर्द कर किया गया था। प्रयोशाला को चालू करना अब उनके हाथ में है।
राजेंद्र सिंह जादौन, उपयंत्री, कृषि उपज मंडी, भिंड

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