लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग बेचेगा शक्कर कारखाना, मशीनरी व स्क्रैप:अब बिकेगा शक्कर कारखाना: मशीनरी व स्क्रैप खरीदने 4 राज्यों से आए 28 खरीदार

कैलारस21 दिन पहले
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शक्कर कारखाना में लगी मशीनरी को खरीदारों को दिखाया गया। - Dainik Bhaskar
शक्कर कारखाना में लगी मशीनरी को खरीदारों को दिखाया गया।
  • लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग बेचेगा 2.78 करोड़ की मशीनें

शक्कर कारखाना की मशीनरी व स्क्रेप को बेचने की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हाे गई है। लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के अफसरों ने 7 प्रांतों से आए खरीदारों काे फैक्टरी हाउस की मशीनरी व स्क्रेप मौके पर जाकर दिखाया ताकि टेंडर डालने की इच्छुक पार्टियां मशीनरी की कीमत का मूल्यांकन कर सकें। इधर शक्कर कारखाना के कर्मचारियों ने कहा है कि सहकारिता आयुक्त पहले उनकी 18 करोड़ की देनदारियों का भुगतान करें उसके बाद फैक्टरी बेचने की कार्रवाई।

2008-09 से बंद सहकारी शक्कर कारखाना को बेचने के लिए गुरुवार को लोक परिसंपत्ति विभाग के सहायक प्रबंधक अर्पित पटेल, प्रशासन व सहकारिता विभाग के अफसरों के साथ कारखाना परिसर पहुंचे। इस मौके पर मुंबई, अहमदाबाद, हरियाणा, दिल्ली, इंदौर, ग्वालियर, मुजफ्फरपुर, पंजाब की 28 पार्टियां शक्कर कारखाना में लगी मशीनरी व स्क्रेप देखने के लिए उपस्थित हुए। कारखाना के परिसमापक सीपीएस भदौरिया ने सभी पार्टियों को कारखाना हाउस में लगी मशीनरी मिल हाउस, टरबाइन, डोर,क्वाड समेत सेट्रीफ्यूगल पंप, मैगमा पंप, केन लोडर का अवलोकन कराया।

कारखाना की पूरी मशीनरी व स्क्रेप को खरीदने के एवज में क्रेता को 2 करोड़ 78 लाख रुपए की राशि लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग को अदा करना होगी। मशीनरी खरीदने के ई- टेंडर के साथ ठेकेदार को 5 लाख 56 हजार रुपए की धरोहर राशि जमा कराना होगी जो वापसी योग्य नहीं है। शक्कर कारखाना की मशीनरी को खरीदने के लिए कस्बा के स्थानीय लोग भी इच्छुक हैं लेकिन कारखाना में लगी मशीनरी का मौजूदा मूल्य मालूम न होने कारण वह आगे नहीं आ पा रहे हैं।

7 प्रांतों से जो पार्टियां मशीनरी लेने के उद्देश्य से आई हैं वह अपने साथ एक्सपर्ट लेकर आए हैं ताकि मशीनरी के आधार पर मुनाफे-घाटे का मौके पर मूल्यांकन किया जा सके। गुरुवार की बैठक में एसडीएम एलके पांडेय, तहसीलदार भरत कुमार समेत कारखाना के सहायक प्रबंधक रमेश गुप्ता उपस्थित रहे। वहीं शक्कर कामगार एकता यूनियन सीटू के प्रधानमंत्री अशोक तिवारी ने कहा है कि 12 साल से बंद सहकारी शक्कर कारखाना के 400 सेअधिक कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, ग्रेच्युटी व प्रोवीडेंट फंड के 18 करोड़ रुपए का भुगतान कर्मचारियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाए तब शक्कर कारखाना को बेचने की कार्रवाई की जाए।

सहकारिता उपपंजीयक व परिसमापक ने डेढ़ साल पहले कर्मचारियों व गन्ना उत्पादक किसानों से उनके क्लेम मांगे थे। 500 से अधिक कर्मचारियों व किसानों ने अपने क्लेम आवेदन उप पंजीयक सहकारिता के समक्ष प्रस्तुत किए लेकिन सहकारिता आयुक्त ने 18 करोड़ की देनदारियों का भुगतान 2021 बीतने तक नहीं किया है। लगभग 15 करोड़ की देनदारियां सरकारी विभागों से लेकर सप्लायरों की भी बकाया हैं। राज्य शासन पहले देनदारियों को चुकता करे उसके बाद किसानों की संपत्ति को नीलाम करने की कार्रवाई आगे बढ़ाए।

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