अनदेखी:वन अधिकार के तहत न पट्‌टा मिला न खेती के लिए जमीन, 3869 आिदवासी परिवार परेशान

कराहलएक वर्ष पहले
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  • आदिवासी बोले- पट्‌टे के लिए कई बार कर चुके हैं आवेदन लेकिन नहीं हो रही सुनवाई

वर्षों से जंगल में काबिज होने के बाद भी अधिकतर आदिवासी परिवार वन अधिकार के तहत खेती की जमीन मांगने के लिए जनपद और तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन न तो उनके नाम का उन्हें पट्टा मिल रहा है और न ही जमीन पर उन्हें खेती करने के लिए हक दिया जा रहा है। ऐसे में आदिवासी परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ये स्थितियां तब हैं जब आदिवासी परिवारों को वन अधिकार के तहत पट्टे देने के लिए निर्देश खुद मुख्यमंत्री दे चुके हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन अधिकार के तहत आदिवासी परिवारों को पट्टे दिए जाने के लिए निर्देश जारी किए थे। इस संबंध में दो सप्ताह पहले कराहल में एसडीएम, जनपद सीईओ, तहसीलदार ने पटवारियों, पंचायत सचिवों के साथ बैठक करते हुए वन अधिकार के तहत निरस्त दावों का दोबारा सर्वे करते हुए आदिवासी परिवारों को उनका हक दिए जाने की बात कही थी। जमीन नहीं मिलने के चलते कराहल तहसील के पनवाड़ा गांव के पर सुघन आदिवासी, मोहरपाल, देवसिंह, गंगाराम, रंगई, महावीर, गणेश, प्रीतम, तुलसी, हरफूल, रामचरण, बद्दू आदिवासी पिछले सप्ताह भी तहसील कार्यालय पर पहुंच गए। किसानों ने उन्हें बताया कि उनके पास वनअधिकार के तहत पट्टा और कब्जा नहीं बना। दावेदार पट्टे से वंचित रह गए हैं। जबकि कई आदिवासियों ने अपने दावों के पक्केे सबूत भी लगाए हैं। ये दावे ग्राम पंचायतों और तहसील में पड़े हुए हैं। ऐसे मे किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं साथ ही उन्हें  अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। तब पटवारी राकेश अग्रवाल ने उन्हें  रिकार्ड दिखवाने का आश्वासन दिया और वन अधिकार के तहत जमीन दिलवाने की बात भी कही थी। लेकिन उन्हें अभी तक जमीन नहीं मिल सकी है। किसानों ने उन्हें वनअधिकार के तहत जमीन दिलाए जाने की मांग की है। 

3869 ने आवेदन किए आवेदन, 56 का हुआ अनुमोदन
कराहल के अंतर्गत आने वाली पंचायतों से वनअधिकार के तहत पिछले दो सप्ताह के अंदर 3 हजार 869 लोगों ने वनअ धिकार के तहत आवेदन करते हुए अपने लिए जमीन मांगी है। लेकिन पंचायतों से अबत क जनपद कार्यालय तक 56 किसानों का अनुमोदन ही पहुंचा है। पंचायतों के द्वारा अनुमोदन की चाल कछुआ गति से चलने के की वजह से हजारों किसान जमीन से वंचित बने हुए हैं। लेकिन अधिकारियों के द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उधर अधिकारी ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा आवेदन जमा करने और पोर्टल का धीमी रफ्तार से काम करने का लगातार बहाना बना रहे हैं।

वनभूमि पर सालों से रह रहे, फिर भी नहीं मिल रहा पट‌्टा
कराहल में रहने वाले गोबरा पुत्र रति आदिवासी, मनीराम आिदवास का कहना है कि वनभूमि पर पिछले कई सालों से झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। पूर्व में उनके द्वारा खेती भी की जाती थी। लेकिन के उनके पास न तो वन अधिकार का पट्टा है और न  ही उन्हें जमीन पर कब्जा मिल सका है। ऐसे में वनविभाग के अधिकारियों ने उन्हें  खेती करने से रोक दिया। अब उनकी झोपड़ी यहां बनी हुई है। लेकिन वे खेती नहीं कर पा रहे हैं। पट्‌टे के लिए आवेदन भी कर चुके हैं।

नेटवर्क की समस्या है इसलिए प्रक्रिया धीमी चल रही है 
वर्ष-2012-13 में जिन आदिवासियों के पट्‌टे निरस्त हो गए थे, अभी उन्हें पट‌्टे देने की प्रक्रिया चल रही है। अभी ऑनलाइन नेटवर्क कम आने से प्रक्रिया धीमी जरूर चल रही है। वहीं जब नए लोगों को पट्‌टे उपलब्ध कराने के निर्देश आएंगे तो उन्हें भी पट्‌टे दिलवाए जाएंगे।
एसएस भटनागर, जनपद सीईओ, कराहल

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