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घटिया निर्माण:पहली बारिश से भरभरा कर गिरी छत, बाल-बाल बचा परिवार

कोलारस25 दिन पहले
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  • हितग्राहियों का आरोप- सरपंच-सचिव ने ठेका दिलाकर कराया निर्माण, फिर अंगूठा लगवाकर निकाले पैसे
  • ग्राम पंचायत सचिव बोले- मेरे कार्यकाल का नहीं है निर्माण, पूर्व सचिव व रोजगार सहायक सहित ठेकेदारों ने की गड़बड़ी
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गरीबों को आवास प्रदान करने के लिए शासन द्वारा चलाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना में सरपंच-सचिव द्वारा किस कदर शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है या फिर हितग्राहियों को किस प्रकार चूना लगाकर उनके हक को डकारा जा रहा है। इसका उदाहरण कोलारस जनपद की ग्राम पंचायत खैरोना में देखने को मिल रहा है।  हालात ये हैं कि यहां हितग्राहियों के मुताबिक सरपंच-सचिव द्वारा जबरदस्ती आवास निर्माण कार्य का अपने नजदीकियों को ठेका दिलाकर घटिया निर्माण करा दिया। इसके बाद हितग्राहियों से अंगूठा लगवाकर उनके खाते में आई राशि आहरण कर ली। इतना ही नहीं कई हितग्राहियों ने घटिया निर्माण व खाते से पैसे निकालने का विरोध किया तो सरपंच-सचिव व ठेकेदार ने हितग्राहियों से मारपीट तक करने का आरोप लगाया है।  वहीं आदिवासियों का कहना है आवास बनने के बाद पहली ही बारिश में गांव में बने आवासों की छत भरभरा कर गिर गई तो कई आवासों की छत नीचे झुक गई है। पंचायत सचिव देवी सिंह वर्मा का कहना है कि ये निर्माण कार्य मेरे कार्यकाल से पहले का है। इसमें गड़बड़िया पूर्व सचिव, रोजगार सहायक व ठेकेदारों द्वारा की गई है।

ठेका से कराया निर्माण, जबरदस्ती अंगूठा लगवाकर निकाली राशि
ग्राम पंचायत खैरोना के ग्राम करमई के हितग्राही शिवराज आदिवासी और उसके पुत्र सोनी आदिवासी को आवास स्वीकृत हुए थे, लेकिन पंचायत सचिव और रोजगार सहायक ने मिलकर पहले तो आदिवासियों को डरा धमकाकर जबर्दस्ती अपने नजदीकी ठेकेदार को आवास निर्माण के ठेके दिलवा दिए। इसके बाद हितग्राहियों के खाते में आई राशि अंगूठा लगवाकर निकाल ली, जबकि आवास का निर्माण कमजोर करने के कारण छत पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। इतना ही नहीं कई आवास टूटने कि कगार पर आ चुके हैं। आदिवासियों का कहना है कि सचिव ने हमारे बगैर पूछे ठेका यह कहकर दे दिया था कि तुम्हारी कुटीरों का अच्छा निर्माण कराया जाएगा।
आवास होने के बावजूद झोपड़ी में सोने को मजबूर 
आदिवासी परिवारों के लिए स्वीकृत आवास और पूरा पैसा निकलने के बाद भी छत लटक गई। साथ ही एक आवास का बीच का हिस्सा बारिश में आधी रात को ढह गया। खासबात यह रही कि छत गिरते समय आवास में सो रहे परिवार और बच्चों कि जान बमुश्किल बच सकी। अगर छत पूरी तरह से ढह जाती तो आदिवासी परिवार के साथ बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बाद परिवार आवास के बाहर बारिश में झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हो गए हैं। वहीं हितग्राही सोनी आदिवासी का कहना था कि मैंने जब कुटीर में घटिया निर्माण होने के चलते पैसे निकालने से मना किया तो सचिव और ठेकेदार ने मारपीट की। इसकी शिकायत पुलिस से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई

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