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  • Due To Cracks In Houses, 45 Families Living Under The Sky, The Restrictions Of The Code Of Conduct Further Increased The Pain

समस्या:मकानाें में दरारें आने से आसमान के नीचे रात गुजार रहे 45 परिवार, आचार संहिता की बंदिशों ने और बढ़ा दिया दर्द

मौ9 दिन पहले
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छत में छेद, दीवारें दरकीं।
  • दावा- बेघर लोगों के लिए छात्रावास में की व्यवस्था, हकीकत- 5 कमरों में 250 लोग कैसे रहेंगे
  • पीड़ित लोग बोले- दिन तो जैसे तैसे कट जाता है, रात आंखों में कटती है

मौ नगर के लोहारपुरा मोहल्ले में रामलीला भवन के पास पक्के मकानों में निवास करने वाले 40 परिवार के 250 से ज्यादा लोग पिछले चार दिन से खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। महिलाएं जहां सड़क पर खाना बना रही हैं, वहीं बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं। जर्जर हो चुके घरों में बंधी मवेशी की सुरक्षा का डर उन्हें अलग से सता रहा है।

मदद की उम्मीद में यह लोग पिछले 48 घंटे से अनिश्चित कालीन धरने पर भी बैठ गए हैं। लेकिन इनकी स्थायी समस्या के समाधान में आचार संहिता की बंदिशों का राेड़ा सामने आ रहा है। पीड़ितों को जितना गुस्सा प्रशासन पर है, उससे कहीं ज्यादा चुनाव के दौर में नेताओं पर भी आ रहा है। वजह यह है कि इस संकट की घड़ी में उन्होंने भी उनसे दूरी बना ली है। अब यहां के लाेगाें ने फैसला किया है कि जाे प्रत्याशी वाेट मांगने आएगा, उसे भगा दिया जाएगा।

बता दें कि चार दिन पहले रामलीला भवन के पास भू-गर्भीय हलचल की वजह से 40 से ज्यादा मकानों में काफी बड़ी दरारें आ गई थी। वहीं यह सिलसिला अभी भी जारी है। स्थिति यह है कि यह मकान कभी धराशायी हो सकते हैं। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर भी इन्हें खतरनाक बता चुके हैं।

बावजूद इसके प्रशासन ने अस्थाई तौर पर बेघर हुए लोगों को कस्बे के एक छात्रावास में निवास करने की व्यवस्था का दावा तो कर दिया। लेकिन 5 कमरों वाले इस भवन में 250 से ज्यादा लोगों का यहां जीवन गुजारना संभव नहीं हो रहा है।

बच्चों की पढ़ाई हो रही है प्रभावित
भास्कर प्रतिनिधि जब इन पीडितों के बीच पहुंचा तो उनके आंसू छलक पड़े। लोगों ने बताया कि पांच दिन से हम लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक हमारे रहने के लिए स्थाई आवास की व्यवस्था नहीं की है। दिन की धूप से तो जैसे तैसे पेड़ की छांव में बच्चों को बचा लेते हैं। लेकिन रात का अंधेरा भी खुले में काटना पड़ रहा है।

स्थाई जगह चाहिए
^पवन सिंह ने बताया कि मोहल्ले में 45 लोगों के मकान भूस्खलन के कारण टूट चुके हैं। प्रशासन से हमारी मांग है कि वह हम पीड़ितों को रहने के लिए स्थाई जगह उपलब्ध कराए। सबसे अधिक डर हम लोगों पालतू मवेशी चोरी होने का सता रहा है।

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
^शिवनारायण सिंह ने बताया कि मकान धराशायी होने के कारण मुझे परिवार के 14 सदस्यों के साथ सड़क पर रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक चिंता मुझे अपने बच्चों की पढ़ाई की हो रही है। रोड पर रहने के कारण वे पढ़ नहीं पा रहे हैं।

प्रत्याशियों को भगा देंगे
^भारत सिंह का कहना है कि हमारी तो मजबूरी है कि आज हमें रोड पर रहना पड़ रहा है, हमारी परेशानी को देखने के लिए कोई नेता तक नहीं आया है। अगर वोट मांगने के लिए किसी भी पार्टी का प्रत्याशी मोहल्ले में आता है तो उसको भगा देंगे।

घर में रहना मतलब मौत का बुलावा देना, सड़क पर चोरी का डर

आशीन खान, शांति देवी, बल्लू जैन, महावीर कोरी, किशोरी वर्मा आदि का कहना है कि भूस्खलन से जहां हमारे घर टूट चुके हैं। ऐसे में उनमें रहना मौत को बुलावा जैसा है। सड़क पर रहने के दौरान लोगों को रात के समय क्रमशः जागकर परिवार, मवेशी और सामान की सुरक्षा करनी पड़ रही है। इस कारण से हम लोग खेतों में पलेवा करने भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस आपदा से जहां हमारे घर जर्जर हो गए हैं। वहीं पलेवा नहीं करने से हम रबी सीजन की फसल भी नहीं कर पाएंगे।

नेचुरल ग्राउंड नहीं है इसलिए ऐसे हालात
^मौ में जिस जमीन पर बने मकानों में दरारें आ रही हैं वहां की मिट्‌टी अच्छी नहीं है। यह भी कह सकते हैं कि वह नेचुरल ग्राउंड नहीं है। पुराने समय बस्ती रही होगी, जिसके उजड़ने के बाद भराव होता रहा होगा, जिसमें पानी जाते रहने से मिट्‌टी के धंसकने की स्थिति बन रही है। मकान बनते जाने से लोड भी बढ़ता जा रहा है। इस कारण जमीन में लोड लेने की क्षमता नहीं है। प्रशासन द्वारा परीक्षण कराए जाने के बाद सही स्थिति सामने आएगी। ऐसी जमीन पर बने मकानों में लोगों का रहना सुरक्षित नहीं है। इन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कराया जाना जरूरी है।
- केके शर्मा, कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी, भिंड

अभी ज्यादा कुछ नहीं कर सकते
^मौ कस्बे में मकानों में दरारें आने का मामला सामने आया है। एडीएम, एसडीएम सहित पीडब्लूडी के अफसरों को जांच के लिए भेजा था। पीडितों को अस्थाई तौर पर छात्रावास में ठहराने की व्यवस्था की है। अभी आचार संहिता चल रही है इसलिए कुछ ज्यादा नहीं कर सकते।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत, कलेक्टर, भिंड

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