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डॉक्टर अपहरणकांड:अपहृत डॉक्टर की 24 घंटे बाद रहस्यमय ढंग से रिहाई, पूरी कहानी पर संशय, चर्चा: 50 लाख देकर पकड़ छूटी

मुरैना3 महीने पहले
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जिस खेत में डॉक्टर को बंधक बनाकर रखा, वहां पुलिस ने किया सीन रि-क्रिएशन। - Dainik Bhaskar
जिस खेत में डॉक्टर को बंधक बनाकर रखा, वहां पुलिस ने किया सीन रि-क्रिएशन।
  • डॉ. गुरुबख्शानी बोले- अपहरणकर्ता आज मुझे छोड़ने के एवज में फिरौती मांगते, परिजन बोले- ऐसा कुछ नहीं

झांसी से अपहृत मेडििसन विशेषज्ञ डाॅ आरके गुरबख्शानी की अपहरण के 24 घंटे बाद ही मुरैना में सिविल लाइन थाना क्षेत्र के हिंगौना गांव स्थित खेत से रहस्यमय ढंग से रिहाई हो गई। कार से डॉक्टर का अपहरण करके लाए बदमाश खेत में गहरी नींद में सो गए। सुबह 5 बजे जब डॉक्टर ने डकैतों को गहरी नींद में सोते देखा तो वह एक किमी दूर खेतों के बीच से कोहनी और घुटनाें के बल रेंगते हुए हिंगौना गांव की सड़क तक आया और सुबह 6.15 बजे डायल-100 के पुलिस कर्मचारियों ने उसे रिसीव कर लिया।

लेकिन पुलिसकर्मियों ने नजदीक स्थित खेत में सो रहे बदमाशों की तलाश करने के बजाय डॉक्टर को थाने पहुंचना मुनासिब समझा। जबकि पुलिस चाहती तो खेतों की सर्चिंग करके बदमाशों को दबोचा जा सकता था। हालांकि डॉक्टर की निशानदेही पर मुरैना व झांसी से आई पुलिस पार्टी ने खेत का री-क्रिएशन किया लेकिन स्निफर डाॅग भी आधा किमी के दायरे में भटकने के बाद लौट आया। चर्चा है कि पचास लाख रुपए की फिरौती लेकर पकड़ छोड़ी गई है।

हाइवे पर मार्निंग वॉक कर रहे थे डॉ. राधाकृष्ण गुरबख्शानी, तभी बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया।
हाइवे पर मार्निंग वॉक कर रहे थे डॉ. राधाकृष्ण गुरबख्शानी, तभी बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया।

यह 3 जवाब अपहरणकांड व डॉक्टर की रिहाई पर खड़े कर रहे सवाल

1. झांसी से अपहृत डॉक्टर आरके गुरबख्शानी को इंडिगो कार सवार 3 लोग डकैत ददुआ के परिजन (नाती) के इलाज के लिए लेकर आए थे।

सवाल: अगर बदमाशों ने डॉक्टर का अपहरण ददुआ के इलाज के लिए किया तो फिर उन्हें लेकर बदमाश ददुआ के गृहक्षेत्र चित्रकूट-सतना के बजाय मुरैना लेकर क्यों आए?

2. बदमाश डॉक्टर को सरसों के खेत में बंधक बनाकर सोए, जहां से डॉक्टर खुद 1 किमी क्रॉलिंग करते हुए हिंगौना गांव की सड़क तक आए।

सवाल: 6 डिग्री तापमान में खेत में बदमाश व अपहरणकर्ता सोते तो रातभर में सर्दी से खड़े होने लायक नहीं बचते फिर अपहरणकर्ता गहरी नींद में कैसे गए और डॉक्टर निकलकर कैसे भाग गए।

3. सुबह 5 बजे बदमाशों को गहरी नींद में सोता छोड़ क्रॉलिंग करते सुबह 6 बजे हिंगौना गांव की सड़क तक आए, 20 मिनट बाद डायल-100 उन्हें थाने ले गई।

सवाल: जहां डॉक्टर को डायल-100 ने रिसीव किया, वहां से घटनास्थल (खेत) महज 1 किमी दूर था। एक घंटे पहले गहरी नींद में सो रहे अपहरणकर्ताओं को तलाशने के बजाय पुलिस लौटकर थाने क्यों पहुंच गई।

बीमार के इलाज के बहाने में कार में बैठाकर किया अपहरण

डॉक्टर गुरबख्शानी के अपहरण के मामले में एक बात क्लियर हुई कि इंडिगो कार में सवार होकर 4 बदमाश मौके पर पहुंचे। उनमें से एक बदमाश मॉर्निंग वॉक कर रहे डॉक्टर के पास पहुंचा और कहा कि कार में मेरा परिजन बीमार है, प्लीज उसे देख लीजिए। डॉक्टर जैसे ही कार के अंदर पहुंचे।

पहले से मौजूद 3 लोगों ने उन्हें अंदर खींचकर कनपटी पर हथियार अड़ा दिए और पिछली सीट पर बैठाकर मुरैना ले आए। यहां शाम 7 बजे उन्हें खेत से होते हुए नहर के दूसरी ओर ले गए, जहां रातभर उन्हें बंधक बनाकर रखा गया।

अपहरण के मामले में डकैत ददुआ के नाती के इलाज कराने का भी जिक्र आया लेकिन अगर ऐसा होता तो इतने नामी-गिरामी डकैत को नाम सुनकर डॉक्टर कार तक नहीं जाते। दूसरा अगर ददुआ के नाम पर अपहरण होता तो बदमाश उसे चित्रकूट, सतना साइड में ले जाते, जो ददुआ गिरोह का क्षेत्र है। मुरैना में डॉक्टर की रिहाई से स्पष्ट है कि यह काम राजस्थान के केशव गुर्जर गिरोह के इशारे पर किया गया।

डॉक्टर का दावा: बदमाश रिहाई के एवज में आज मांगते फिरौती

29 जनवरी को झांसी के शिवपुरी हाईवे से सुबह 5 बजे कार सवार 3 बदमाशों द्वारा अपहृत डॉ. गुरबख्शानी शनिवार सुबह छूटकर सिविल लाइन थाने पहुंचे।

यहां मीडियाकर्मियों से चर्चा में उन्होंने कहा- तीन हथियारबंद बदमाश मुझे इलाज के बहाने अपहरण कर लाए और रात में 7 बजे एक खेत पर पैरों में जंजीर बांधकर सुला दिया। सुबह मैं किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर ग्रामीणों की मदद से थाने पहुंचा।

फिरौती के मामले में डॉक्टर ने कहा कि निश्चित ही डकैत आज मुझे छोड़ने के एवज में फिरौती मांगते, लेकिन परिजन व यूपी पुलिस के पहुंचने के बाद पूरा मामला पलट गया। न तो परिजन न पुलिस ने स्वीकार किया कि उनके पास फिरौती के लिए कोई कॉल आया।

भास्कर इन्वेस्टिगेशन

हिंगौनाखुर्द गांव तक कार से लेकर आए बदमाश, बाइक से दूसरी तरफ ले गए

झांसी के डॉक्टर आरके गुरबख्शानी के अपहरण के मामले में खुद डॉक्टर व पुलिस जिस खेत में बंधक बनाए जाने का दावा कर रहे हैं, उसमें भी पेच है।

आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि रात में 7 बजे के करीब एक कार सड़क पर आकर रुकी, उसके बाद एक बाइक पर 2 लोग बीच में किसी वृद्ध को बैठाकर खेतों को क्रॉस करते हुए नहर के दूसरी तरफ पहुंचे।

इस कहानी में इसलिए भी हकीकत नजर आ रही है क्योंकि न्यूनतम 6 डिग्री तापमान में खेतों में चल रहे पानी के बीच न तो अपहरणकर्ता सो सकते हैं न डॉक्टर। अगर ऐसा होता तो अपहरणकर्ता व अपहृत दोनों खुले खेत में सर्दी से ठिठुरकर सुबह चलने-फिरने लायक नहीं बचते।

राजस्थान की गुर्जर गैंग को सौंपने से पहले 50 लाख की फिरौती वसूलने की चर्चा

हिंगौनाकलां व हिंगौना खुर्द गांव के दूसरी ओर नहर किनारे पट्‌टी में गुर्जर बहुल गांव हैं। यहां रहने वाले बदमाश रैकी करने के बाद डॉक्टर का अपहरण करके लाए और उसे राजस्थान के सवा लाख के इनामी केशव गुर्जर गैंग को सौंपने की तैयारी में थे। लेकिन इससे पहले ही डॉक्टर के परिजन द्वारा 50 लाख की फिरौती देकर उसे छुड़ाने की चर्चा दिनभर हलके में होती रहीं।

झांसी के रसूखदार परिवार से हैं अपहृत डॉक्टर, यूपी डीजी ने एमपी में किया संपर्क, इसलिए जिले के अफसर चुप

यूपी झांसी के संगम विहार में रहने वाले डॉ. आरके गुरबख्शानी रसूखदार परिवार से हैं। परिवार में पत्नी जयश्री गुरबख्शानी के अलावा एक बेटा अक्षत गुरबख्शानी मद्रास से बी-टेक कर चुका है। बड़े बेटे अंकित (30) की कोरोनाकाल में अप्रैल 2020 में मृत्यु हो चुकी है। परिवार में 3 छोटे भाई महेश गुरबख्शानी (रिटायर्ड बैंककर्मी), दौलत गुरबख्शानी तथा अशोक गुरबख्शानी व्यापारी हैं।

अशोक का रेडीमेड बाजार में कपड़ों का शोरूम है। वहीं अशोक की पत्नी शालिनी गुरबख्शानी उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल की महानगर अध्यक्ष हैं। डॉक्टर के अपहरण के बाद उत्तरप्रदेश डीजीपी ने सीधे एमपी के अफसरों से चर्चा की। इसलिए पूरे मामले में यूपी-एमपी के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।

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