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बिजली परेशानी:29 हजार मीटर खराब; रीडर सिर्फ 50, एक पर 2-2 हजार कनेक्शन का लोड

मुरैना20 दिन पहले
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  • कई जगह मीटर रीडर बदले तो 150 से 200 यूनिट के बिल बढ़ाकर 300 यूनिट के थमाए
  • आंकलित खपत, मनमाने बिलों की शिकायतें कम करने शुरू हुई स्पॉट बिलिंग स्कीम बेअसर

मेरे घर में 3 पंखे, 4 सीएफएल, एक पानी की मोटर, एक फ्रिज है। हर महीने 1600 रुपए तक का बिल आता था लेकिन इस बार मुझे 4 हजार 167 रुपए का बिजली मीटर रीडर थमा गया। 4 महीने पहले ही 8 हजार का बिल थमा दिया था।

2 महीने तक बिजली कंपनी के दर्जनों चक्कर लगाए तब कहीं जाकर 1200 रुपए कम किए। लेकिन जुलाई में फिर एक महीने का बिल 4 हजार रुपए थमा दिया। अब इस बिल को कम करने के लिए कंपनी के चक्कर लगाऊं या अपनी नौकरी करूं। यह दर्द है शहर के गणेशपुरा में रहने वाले प्रेमसिंह का। जिनके घर इस बार 300 यूनिट से अधिक का बिल मीटर रीडर थमा गया। प्रेमसिंह अकेले ऐसे उपभोक्ता नहीं है जिन्हें जुलाई में आकलित खपत के डेढ़ से दोगुनी यूनिट के बिल थमाए गए हैं। उनके जैसे सैकड़ों उपभोक्ताओं को इस महीने 1200 से 2400 रुपए अधिक राशि के बिल दिए गए हैं।

स्पॉट बिलिंग: चालू मीटर के फोटो खींचकर जारी करने थे बिल, बंद मीटर में मनमानी रीडिंग कर रहे दर्ज: जुलाई महीने से शहर में स्पॉट बिलिंग सुविधा शुरू की गई है। इसके तहत मीटर रीडर को उपभोक्ता के घर के बाहर लगे चालू मीटर में दर्ज रीडिंग की फोटो खींचकर बिल जारी करने थे। लेकिन शहर में 30 प्रतिशत मीटर खराब हैं। इसलिए रीडर बंद मीटर के फोटो खींचकर उसमें 100 से 150 यूनिट बढ़ाकर बिल थमा आए। वहीं जिलेभर में 39 हजार मीटर खराब हैं, जिन्हें जल्द चेंज करने के निर्देश सीएमडी गणेश शंकर ने दिए थे। लेकिन कंपनी अभी तक सिर्फ 10 हजार मीटर बदल सकी है। 29 हजार खराब मीटरों की वजह से लोगों काे मीटर रीडर आकलित खपत के बिल भी बढ़ाकर दे रहे हैं।

जानिए बिल सुधरवाने में कितनी होती है मशक्कत

  • उपभोक्ता अपने बढ़े हुए बिल में संशोधन कराने उपमहाप्रबंधक के पास जाता है, वहां से बिल संशोधन की टीप लगाई जाती है।
  • उपमहाप्रबंधक से लगी टीप को लेकर उपभोक्ता गणेशपुरा डीसी पर पहुंचता है, यहां शहर के एई राहुल चौहान इसमें चेक रिपोर्ट लगाने के आदेश जारी करते हैं।
  • उपभोक्ता को लाइनमैन घर ले जाकर लोड चेक कराना पड़ता है। इसके लिए दो से तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं।
  • लाइनमैन अपनी चेक रिपोर्ट दफ्तर मे सबमिट करते हैं, जिसे जेई वेरिफाई करते हैं।
  • इसके बाद चेकलिस्ट को ऑफिस में पदस्थ बाबू अपने रजिस्टर में इंद्राज करते हैं, इसके लिए भी दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं।
  • संशोधित बिल जारी होने के बाद उपभोक्ता इसे जमा करता है लेकिन 70 प्रतिशत बिलों की कंप्यूटर में एंट्री नहीं होती और अगले महीने बिल में सुधार के बाद कम की गई राशि दोबारा जोड़कर दे दी जाती है।

जानिए लोगों की परेशानी

  • 1. गणेशपुरा स्थित अंतोबाई रोड पर रहने वाले अनिल कुमार को 4 महीने का बिल जारी नहीं किया गया। 5 जुलाई को नया मीटर रीडर स्पॉट बिलिंग के लिए आया। जून महीने में 3 महीने का उनका बिल 4500 रुपए के करीब था यानि हर महीने 1400 से 1500 रुपए का बिल 200 यूनिट का आता था। इस बार रीडर 250 यूनिट से अधिक का बिल ढाई हजार का थमा गया।
  • 2. गोपालपुरा में रहने वाले अरुण कुमार दीक्षित को भी इस महीने बिजली कंपनी ने 3200 रुपए का बिल जारी किया है। जबकि उन्हें लॉकडाउन से पहले 150 यूनिट का बिल दिया जा रहा था। इसे बढ़ाकर 250 यूनिट कर दिया गया है।

हमारे पास भी आते हैं शिकायतों के फोन
बिजली बिलों में यूनिट बढ़ाकर बिल देने की शिकायतें हमारे पास भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि जल्द ही खराब मीटर बदलकर लोगों वास्तविक खपत के बिल दें। जुलाई महीने में हुई गड़बड़ी के संबंध में हम स्थानीय अफसरों से चर्चा करेंगे। -प्रद्युम्न सिहं तोमर, ऊर्जा मंत्री मप्र

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