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अनदेखी:3 महीने बीते, बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश का इंतजार

मुरैना11 दिन पहले
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  • निजी स्कूलों ने आरटीई के लिए लॉक की 25 फीसदी सीटें, लेकिन आगे नहीं बढ़ पा रही प्रक्रिया

स्कूलों का नया सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं। इन 3 महीनों में छात्रों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। लेकिन अब तक शिक्षा के अधिकार से वंचित वर्ग के छात्रों की शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इसकी वजह काेरोना संक्रमण का प्रभाव होना बताया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग की योजना के मुताबिक, हर वर्ष वंचित वर्ग के छात्रों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उन्हें प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाता है। और उनकी फीस स्कूल शिक्षा विभाग अपने स्तर से निजी स्कूलों को भुगतान करता है। इस साल आधा सितंबर बीत जाने तक वंचित वर्ग के बच्चाें को निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई गई है।

यहां बता दें कि वंचित वर्ग के छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया हर साल मई व जून महीने में शुरू होकर जुलाई में पूर्ण हो जाती है लेकिन इस बार शासन के आदेश नहीं आने के कारण वंचित वर्ग के छात्रों को पब्लिक स्कूलों में एडमिशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों में वंचित वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित सीट भी लॉक करा ली गईं लेकिन प्रवेश के आदेश अब जारी नहीं किए जाने से काम अटका हुआ है।

अभिभावकों का कहना है कि शहर के 5 से 7 प्राइवेट स्कूलों में वह अपने बच्चों को एडमिशन के लिए लेकर पहुंचे लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उन्हें यह कहकर वापस कर दिया कि अभी इस संबंध में डीईओ कार्यालय से कोई आदेश नहीं आए हैं।

अक्टूबर में भी प्रवेश हुए तो पढ़ाई पिछड़ जाएगी शिक्षा के अधिकार के तहत वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को अक्टूबर के महीने में प्रवेश दिए भी गए तो मानिए कि उनका कोर्स बहुत पिछड़ जाएगा क्योंकि 2 महीने बाद अर्द्धवार्षिक परीक्षा आयोजित होने की दशा में वंचित वर्ग के छात्र बिना पढ़े क्या लिख पाएंगे। इस हाल में स्कूल प्रबंधन को वार्षिक परीक्षा से पहले कोर्स कवर कराना कठिन होगा । जानकारों का कहना है कि इस बार आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो इसकी संभावना कम ही है।

फीस देने में कोताही बरत रही सरकार
शिक्षा के अधिकार के तहत वंचित वर्ग के 2000 बच्चों ने प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश लिए थे। एक छात्र को अध्यापन के एवज में शासन 4629 रुपए की सालाना फीस का भुगतान करता है। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने अभी तक वर्ष 2017-18 की फीस का भुगतान किया है। 2018-19 की फीस में से 30 फीस शुल्क का भुगतान स्कूल संचालकों को किया गया है। 70 फीसदी पेमेंट के लिए स्कूल संचालक अभी भी शासन से पत्राचार कर रहे हैं।
पिछले वर्षों में 2000 छात्रों ने इस योजना का लाभ लिया है
इस साल अभी तक शासन से वंचित वर्ग के छात्रों को प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश दिलाने के आदेश नहीं आए हैं। नए निर्देश आने के बाद ही प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी। पिछले वर्षों में 2000 छात्रों ने इस योजना का लाभ हासिल किया है।
सुभाष शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी मुरैना

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