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सिंचाई:धान व बाजरा के लिए कोटा से छोड़ा 3500 क्यूसेक पानी

मुरैना3 दिन पहले
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  • सबलगढ़ तक पानी आने के बाद उसे लोअर मैन कैनाल से माध्यम से आसन नदी में डाला जाएगा

मुरैना, गोहद व भिंड विधानसभा में धान व बाजरा की फसल को सूखे से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग सक्रिय हो गया है। मध्यप्रदेश की मांग पर राजस्थान सरकार ने बुधवार की शाम 7 बजे कोटा बैराज से चंबल नहर में 3500 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। 20 सितंबर से इस पानी को कोतवाल डैम भरने के लिए आसन नदी में डाला जाएगा। इस बार 25 फीसदी बारिश कम होने के कारण खरीफ सीजन की बाजरा व धान की फसल को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल सका है। इस कारण मुरैना, गोहद व भिंड विधानसभा में 12000 हैक्टेयर क्षेत्र में खड़ी धान की फसल व 20 हजार हैक्टेयर में उपजायी बाजरा की फसल सूखने की स्थिति में आ गई है।

इस समय किसानों को धान व बाजरा में सिंचाई की जरूरत है लेकिन बारिश न होने से सिंचाई के लिए नहरों से पानी के प्रबंधन को विकल्प बनाया गया है। उपचुनाव होने के कारण शिवराज सरकार सिंचाई के इश्यू काे प्राथमिकता देकर राजस्थान से प्रतिदिन 3500 क्यूसेक पानी लेने का प्रस्ताव भेज चुकी है। पानी की आपात जरूरत को देखते हुए राजस्थान सरकार जल संसाधन विभाग ने अफसरों ने बुधवार की शाम 7 बजे कोटा बैराज से चंबल नहर में 3500 क्यूसेक पानी भेज दिया है।

एबीसी में भी चलेगा पानी मिलेगी पलेवा की सुविधा
सबलगढ़ के सुनहरा हैड पर श्योपुर से प्रतिदिन 1500 क्यूसेक पानी मिलने की उम्मीद है। क्योंकि शेष पानी को श्योपुर जिले के किसान भी उपयोग में लेंगे। इसके अलावा राजस्थान के किसान भी चंबल नहर में पंप लगाकर सिंचाई करेंगे। सुनहरा हैड से अंबाह ब्रांच कैनाल में प्रतिदिन 500 क्यूसेक पानी दिया जाएगा जिससे सबलगढ़, जौरा मुरैना, अंबाह व अटेर क्षेत्र के किसान रवी सीजन की बोवनी के लिए खेतों का पलेवा कर सकेंगे।

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