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खिलाड़ियों से खिलवाड़:7.20 करोड़ रु. से नहीं बना सिंथेटिक ट्रैक, कुश्ती के लिए भेजे गए गद्दे स्टोर में बंद, खिलाड़ी हो रहे परेशान

मुरैना3 महीने पहले
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  • हर साल 30 से 40 मैडल लाते हैं जिले के खिलाड़ी, सुविधाएं शून्य क्योंकि खेल विभाग नहीं ले रहा रुचि
  • पड़ाेसी जिलों में करोड़ों रुपए खर्च, हमारे यहां बजट सेंक्शन लेकिन विभागीय अधिकारियों की सुस्ती से खर्च नहीं हो रही राशि

जिले में खेल व खिलाड़ियों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हालात यह है कि 7.20 करोड़ से स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए खेलो इंडिया लगातार पत्राचार कर रहा है लेकिन जिला खेल विभाग के अफसर इस दिशा में कतई गंभीर नहीं हैं। इसी प्रकार पूर्व विधायक गिर्राज डंडौतिया व रघुराज कंषाना के प्रयासों से डायरेक्टोरेट ने कुश्ती के लिए लाखों रुपए के गद्दे भेजे, वह भी स्टोर में धूल खा रहे हैं। जबकि हमारे पहलवान मिट्‌टी में अभ्यास कर चोटिल हो रहे हैं। इसी प्रकार खेलो इंडिया के तहत 5 करोड़ की लागत से मल्टीपरपज हॉल बनाया जाना है, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अभी पत्राचार में ही जिंदा है। इस हॉल के लिए विभाग जमीन चिह्नित नहीं कर सका है।

5 करोड़ की लागत से मल्टीपरपज हॉल मुरैना के लिए स्वीकृत किया है। इसमें 14 खेल हो सकते हैं। इस हॉल के बनने से खिलाड़ियों को वॉलीबाल, ताईक्वांडो, जूडो-कराटे, कबड्‌डी, खो-खो, लाँग जंप, हाई जंप, खो-खो, बैडमिंटन आदि खेलों की सुविधा खिलाड़ियों को मिलेगी। पूर्व कलेक्टर प्रियंका दास ने इस हॉल के लिए खेल विभाग को स्टेडियम के नजदीक स्थित मेला ग्राउंड की जमीन देने की बात कही थी। लेकिन जिला खेल अधिकारी प्रशांत कुशवाह ने इस मामले को पत्राचार में उलझाए रखा। अगर वे गंभीरता से प्रयास करते तो यह जमीन हॉल बनाने के लिए आवंटित हो जाती।

खेलो इंडिया के तहत खेल व खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने डायरेक्टोरेट के माध्यम से करोड़ों रुपए भेजे हैं। हमारे पड़ोसी जिलों श्योपुर व भिंड में 8 से 10 करोड़ के काम सेंक्शन होकर धरातल पर दिखने भी लगे हैं। हमारे यहां 10 करोड़ रुपए की राशि के काम होने हैं लेकिन जिला खेल विभाग के अफसर सिर्फ पत्राचार तक सीमित रहते हैं। यदि वे डायरेक्टोरेट व जिला प्रशासन से थोड़ी एप्रोच लगाएं तो यह काम जल्द से जल्द धरातल पर आ जाएंगे।

अंबाह स्टेडियम: 95 लाख खर्च, 2 करोड़ और सेंक्शन

अंबाह में 95 लाख रुपए की लागत से पीडब्ल्यूडी ने स्टेडियम का निर्माण किया है। 10 सितंबर को सीएम ने इसके उन्नयन के लिए 2 करोड़ और सेंक्शन कर दिए लेकिन अभी तक जिला खेल अधिकारी प्रशांत कुशवाह ने एक भी बार मुआयना नहीं किया है। इससे साबित होता है कि खेलों व खिलाड़ियाों को प्राेत्साहित करने में उनकी कितनी दिलचस्पी है।

स्टेडियम मेंटेनेंस के लिए 35 लाख का प्रस्ताव बनवाया, हुआ कुछ नहीं: जर्जर स्टेडियम के मेंटेनेंस के लिए पूर्व कलेक्टर प्रियंका दास ने 35 लाख रुपए का एस्टीमेट बनवाया था, जिससे क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत, खिलाड़ियों को पीने के पानी के लिए 3 वाटर कूलर, गर्ल्स-वॉयज के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने की बात कही गई थी। इसी प्रकार लॉन टेनिस ग्राउंड के लिए 10 से 12 लाख के चेंजिंग रूम का प्रस्ताव एमपी पुलिस हाउसिंग ने भेजा था। लेकिन यह दोनों प्रस्ताव भी आज तक धरातल पर नहीं आ सके।

शहर में एक बैडमिंटन हाल जर्जर, उसका भी नहीं हो रहा मेंटेनेंस

जिले में बैडमिंटन के 100 से अधिक प्लेयर हैं, जो काफी उम्दा खेलते हैं। लेकिन इनके लिए शहर मुख्यालय पर पुलिस मुख्यालय स्थित सिर्फ एक कोर्ट है। जबकि स्टेडियम में नगर निगम के आधिपत्य का बैडमिंटन हॉल जर्जर होकर 2 साल से बंद है। ऐसे में खिलाडिय़ों को प्रेक्टिस के लिए समय नहीं मिल पाता। अगर खेल विभाग चाहता तो इस हॉल का मेंटेनेंस करा ही सकता था। लेकिन यह काम भी नहीं हुआ।

हमने तो नोटशीट चला दी, राशि तो अफसर ही सेंक्शन करेंगे

खेलो इंडिया के तहत 5 करोड़ के मल्टीपरपज हॉल के लिए मेला ग्राउंड की जमीन का प्रस्ताव बनाकर हमने एसडीएम साहब को भेज दिया था। सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए जो राशि जारी होनी है, उसके लिए डायरेक्टरेट में बैठे अफसर जिम्मेदार हैं। स्टेडियम का बैडमिंटन हॉल निगम के आधिपत्य में है, उसका मेंटेनेंस विभाग क्यों कराएगा।
प्रशांत कुशवाह, जिला खेल अधिकारी

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